Gold News: भारतीय घरों और मंदिरों में जमा 32,000 टन सोने पर सरकार की नजर, पीएम मोदी की अपील से कैसे बचेगा विदेशी मुद्रा भंडार?

Gold News: नया सोना खरीदने के बजाय पुराने गोल्ड को करें रीसायकल

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Gold News: भारत में सोना सिर्फ एक कीमती धातु नहीं, बल्कि लोगों की गहरी भावनाओं, परंपराओं और संकट के समय की सबसे बड़ी सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। शादी-ब्याह, तीज-त्योहार या कोई भी शुभ काम हो, हमारे देश में सोना खरीदना बेहद पवित्र माना जाता है। लेकिन इसी बीच देश की अर्थव्यवस्था और खजाने को मजबूत करने के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से एक खास अपील की है, जिसके तहत उन्होंने लोगों से नया सोना खरीदने के बजाय घरों और मंदिरों में रखे पुराने सोने को रीसायकल (Recycle) करने का आग्रह किया है। इसके पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के बढ़ते आयात बिल (Import Bill) को कम करना, डॉलर की बचत करना और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को एक नई मजबूती देना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय घरों और धार्मिक स्थलों में करीब 32,000 टन सोना निष्क्रिय पड़ा हुआ है, जिसे आर्थिक मुख्यधारा में लाना वक्त की बड़ी जरूरत बन गया है।

पीएम मोदी ने देशवासियों से क्या अपील की है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक सेहत को ध्यान में रखते हुए नागरिकों से एक बेहद महत्वपूर्ण विचार साझा किया है। उन्होंने अपील की है कि लोग अपनी जरूरत के लिए बाजार से नया सोना खरीदने के बजाय, अपने घरों की तिजोरियों और मंदिरों के लॉकरों में पहले से मौजूद पुराने सोने को रीसायकल करने पर विचार करें।

पीएम मोदी का मानना है कि अगर देश के भीतर पहले से ही मौजूद इस भारी-भरकम सोने का सही तरीके से दोबारा इस्तेमाल (Reutilization) शुरू हो जाए, तो विदेशों से भारी मात्रा में सोना मंगाने की मजबूरी काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इससे घरेलू स्तर पर सोने की मांग और आपूर्ति का संतुलन बिना नया आयात किए ही सुधारा जा सकता है।

भारत में कितना सोना है? तिजोरियों में बंद है दुनिया का सबसे बड़ा खजाना

अगर आंकड़ों की बात करें, तो विभिन्न वित्तीय और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय घरों और मंदिरों में कुल मिलाकर करीब 32,000 टन सोना मौजूद है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह दुनिया के सबसे बड़े निजी गोल्ड स्टॉक (Private Gold Stock) में से एक है।

समस्या यह है कि इतनी बड़ी और मूल्यवान संपत्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा केवल तिजोरियों, लॉकरों और व्यक्तिगत संदूकचों में बंद पड़ा है। आर्थिक दृष्टिकोण से इस सोने को ‘डेड इनवेस्टमेंट’ या निष्क्रिय संपत्ति माना जाता है, क्योंकि यह देश की रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों या बाजार के रोटेशन में सक्रिय रूप से शामिल नहीं हो पाता है।

सरकार क्यों दे रही है गोल्ड रीसाइक्लिंग पर जोर? समझिए असली वजह

भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है, लेकिन विडंबना यह है कि हम अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात (Import) करते हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 72.4 अरब डॉलर का सोना आयात किया है।

 जब भी भारत विदेशों से बड़ी मात्रा में सोना खरीदता है, तो उसका अंतरराष्ट्रीय भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। जितना अधिक सोना देश में आएगा, उतना ही अधिक डॉलर हमारे खजाने से बाहर जाएगा। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ता है और रुपया भी कमजोर होता है। सरकार इसी चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को नियंत्रित करने के लिए गोल्ड रीसाइक्लिंग को बढ़ावा दे रही है।

सिर्फ 1% सोने की रीसाइक्लिंग से बच सकते हैं अरबों डॉलर

आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर भारतीय परिवारों और मंदिरों में रखे कुल 32,000 टन सोने का सिर्फ 1 प्रतिशत हिस्सा भी हर साल ईमानदारी से रीसायकल कर लिया जाए, तो भारत का वार्षिक सोना आयात लगभग 25% से लेकर 30% तक घट सकता है।

इतने बड़े पैमाने पर आयात घटने का सीधा मतलब है कि देश के अरबों डॉलर बाहर जाने से बच जाएंगे। यह बची हुई विदेशी मुद्रा देश के बुनियादी ढांचे, तकनीकी विकास और अन्य आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं में निवेश की जा सकती है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार मिलेगी।

Gold News: आयात रोकने के लिए सरकार ने उठाए सख्त कदम: बढ़ाया इम्पोर्ट टैक्स

सोने के अंधाधुंध आयात पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार को रीसाइक्लिंग की तरफ मोड़ने के लिए सरकार ने हाल ही में कुछ कड़े नीतिगत कदम भी उठाए हैं। इसके तहत सरकार ने सोना और चांदी पर लगने वाले बुनियादी आयात शुल्क (Customs Duty) को सीधे 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है।

इस भारी टैक्स बढ़ोतरी का मुख्य उद्देश्य विदेशों से आने वाले सोने को महंगा करना है, ताकि लोग नया इम्पोर्टेड सोना खरीदने के प्रति हतोत्साहित हों। सरकार के इस कदम से घरेलू स्तर पर पुराने सोने के लेन-देन और उसकी रीसाइक्लिंग की मांग में तेजी आने की उम्मीद है।

Gold News: आम जनता और उपभोक्ताओं पर इसका क्या असर पड़ेगा?

सरकार की इस नई मुहिम और अपील का यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि देश में लोग अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को छोड़ दें या सोना खरीदना पूरी तरह से बंद कर दें। इसका सीधा और व्यावहारिक मकसद आम उपभोक्ताओं को यह समझाना है कि वे समझदारी से काम लें।

जब भी परिवार में कोई शादी या उत्सव हो, तो नया सोना खरीदने के लिए नकदी खर्च करने के बजाय, लॉकर में रखी पुरानी ज्वेलरी को नए डिजाइन में ढलवा लें। ऐसा करने से न केवल मेकिंग चार्जेस और टैक्स की बचत होगी, बल्कि देश के प्रति एक नागरिक के रूप में आपका बड़ा योगदान भी दर्ज होगा।

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