Indian Railways Rules: क्या आपने कभी सोचा है रेलवे प्लेटफॉर्म पर क्यों नहीं होती कोई मेडिकल शॉप? जानिए इसके पीछे की असली वजह
Indian Railways Rules: रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर क्यों नहीं होती दवा की दुकानें? जानें बड़ी वजह
Indian Railways Rules: जब भी हम भारतीय रेलवे (Indian Railways) से सफर करते हैं, तो हमें रेलवे स्टेशनों और प्लेटफॉर्म्स पर खान-पान के स्टॉल, चाय की दुकानें, खिलौने और किताबों की दुकानें आसानी से देखने को मिल जाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि देश के लगभग 99% रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर कोई अलग से दवाइयों की दुकान (Medical Shop) या केमिस्ट स्टॉल क्यों नहीं दिखाई देता? अचानक तबीयत खराब होने या सफर के दौरान सिरदर्द, उल्टी या बुखार जैसी आम दवाइयों के लिए यात्रियों को स्टेशन से बाहर भागना पड़ता है। रेलवे के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, पहले प्लेटफॉर्म पर केमिस्ट स्टॉल के लिए जगह अलॉट की जाती थी, लेकिन कुछ साल पहले नीतिगत बदलावों और प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की सुरक्षा व भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से रेलवे बोर्ड ने इन नियमों को पूरी तरह बदल दिया। अब सिर्फ दवा बेचने के लिए अलग से कोई नई दुकान नहीं दी जाती, बल्कि यात्रियों की सुविधा के लिए ‘मल्टी पर्पज स्टॉल’ (MPS) का कॉन्सेप्ट लाया गया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि रेलवे प्लेटफॉर्म से केमिस्ट की दुकानें क्यों गायब हो गईं और सफर के दौरान किसी आपातकालीन स्थिति (Medical Emergency) में रेल यात्री किस तरह तुरंत मेडिकल सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
Indian Railways Rules: क्या पहले रेलवे स्टेशनों पर दवा की दुकानें होती थीं? जानिए साल 2001 का नियम
ऐसा बिल्कुल नहीं है कि रेलवे में कभी दवाइयों की दुकानें नहीं हुआ करती थीं। भारतीय रेलवे के पुराने आधिकारिक नियमों और दस्तावेजों पर नजर डालें तो साल 2001 में रेलवे बोर्ड ने केमिस्ट स्टॉल को लेकर एक स्पष्ट गाइडलाइन जारी की थी।
उस समय के नियम के मुताबिक, जिन रेलवे स्टेशनों पर रेलवे डॉक्टरों की चौबीसों घंटे सुविधा उपलब्ध होती थी, वहां केमिस्ट स्टॉल खोलने के लिए अधिकतम 108 वर्ग फुट की जगह पर्याप्त मानी जाती थी। इसके अलावा, यात्रियों की छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए बुकस्टॉल के अंदर ही एक छोटा सा ‘मेडिसिन कॉर्नर’ बनाने की अनुमति भी दी गई थी, जिस पर जगह की कोई सीमा लागू नहीं होती थी।
Indian Railways Rules: प्लेटफॉर्म पर भीड़ कम करने के लिए रेलवे ने क्यों बदला अपना पुराना नियम?
समय के साथ रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ, जिससे प्लेटफॉर्म पर पैर रखने तक की जगह कम पड़ने लगी। पहले के समय में स्टेशनों पर तीन अलग-अलग तरह की दुकानें प्रमुखता से अलॉट की जाती थीं, जिनमें बुकस्टॉल, केमिस्ट स्टॉल और दैनिक उपयोग के सामानों की दुकानें शामिल थीं।
प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग स्टॉल्स होने की वजह से यात्रियों के चलने-फिरने के लिए बहुत कम जगह बचती थी और ट्रेन आते समय भगदड़ जैसी स्थिति बनने का खतरा रहता था। इसी समस्या को हल करने के लिए रेलवे मंत्रालय ने कुछ साल पहले एक नई नीति अपनाई, जिसके तहत इन सभी अलग-अलग दुकानों को मर्ज करके ‘मल्टी पर्पज स्टॉल’ (Multi-Purpose Stalls) यानी एमपीएस में बदल दिया गया।
अब केमिस्ट स्टॉल की जगह काम कर रहे हैं ‘मल्टी पर्पज स्टॉल’ (MPS)
रेलवे के नए नियमों के तहत अब किसी भी स्टेशन पर केवल नई दवा की दुकान खोलने के लिए अलग से कोई कमर्शियल स्पेस अलॉट नहीं किया जाता है। इसकी जगह अब स्टेशनों पर केवल मल्टी पर्पज स्टॉल (MPS) ही खोले जा रहे हैं।
इन आधुनिक और बड़े स्टॉल्स पर यात्रियों को किताबें, मैगजीन, खाने-पीने की डिब्बाबंद चीजें और दैनिक जरूरत के सामानों के साथ-साथ दवाइयां भी एक ही छत के नीचे मिल जाती हैं। हालांकि, इन स्टॉल्स पर केवल वही आम दवाइयां (Over-The-Counter Drugs) बेची जा सकती हैं, जिन्हें खरीदने के लिए किसी डॉक्टर की पर्ची (Prescription) की जरूरत नहीं होती है, जैसे ओआरएस, दर्द निवारक बाम या उल्टी की दवा।
Indian Railways Rules: देश के सिर्फ 21 स्टेशनों पर हैं अलग से मेडिकल स्टोर; अब खुल रहे हैं जन औषधि केंद्र
वर्तमान आंकड़ों की बात करें तो पूरे भारत में केवल 21 बड़े और प्रमुख ए-वन (A1) श्रेणी के रेलवे स्टेशन ही ऐसे बचे हैं, जहां आज भी पुराने नियमों के तहत अलग से स्वतंत्र मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं। इन चुनिंदा स्टेशनों को छोड़कर बाकी सभी जगहों पर पुरानी केमिस्ट दुकानें बंद की जा चुकी हैं।
हालांकि, सरकार अब यात्रियों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए एक नई योजना पर तेजी से काम कर रही है। इसके तहत देश के कई बड़े और व्यस्त रेलवे स्टेशनों पर ‘प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र’ खोले जा रहे हैं, जहां यात्रियों को सफर के दौरान भी बेहद किफायती दामों पर जेनेरिक दवाइयां आसानी से मिल सकेंगी।
Indian Railways Rules: चलती ट्रेन या स्टेशन पर अचानक तबीयत खराब हो जाए, तो इमरजेंसी में क्या करें?
सफर के दौरान यदि किसी यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ जाती है, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। भारतीय रेलवे अपने यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए चौबीसों घंटे पूरी तरह मुस्तैद रहता है। आपातकालीन स्थिति में आप इन तरीकों से मदद पा सकते हैं:
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ट्रेन स्टाफ से संपर्क करें: ट्रेन में मौजूद टीटीई (TTE), ट्रेन गार्ड या ट्रेन सुपरिंटेंडेंट को तुरंत अपनी बीमारी के बारे में बताएं। इन सभी फ्रंटलाइन कर्मचारियों को प्राथमिक उपचार (First Aid) की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।
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स्टेशन मास्टर की मदद लें: यदि आप किसी स्टेशन पर हैं, तो तुरंत स्टेशन मास्टर से संपर्क करें। हर छोटे-बड़े रेलवे स्टेशन पर पास के सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टरों की एक पूरी लिस्ट और उनके इमरजेंसी नंबर हमेशा उपलब्ध रहते हैं।
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मेडिकल बॉक्स की सुविधा: भारतीय रेलवे की हर पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेन के साथ-साथ सभी प्रमुख स्टेशनों पर आपातकालीन मेडिकल बॉक्स की सुविधा हमेशा तैयार रखी जाती है, जिसमें प्राथमिक इलाज की सभी जरूरी दवाइयां और पट्टियां मौजूद होती हैं।
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