Walking Tips: रोज वॉक करने के बावजूद फिट क्यों नहीं हो रहे? फिटनेस कोच सुमित दुबे ने बताए असली कारण और सही तरीका
फिटनेस कोच ने बताया क्यों सिर्फ वॉक काफी नहीं, जानें बेहतर फिटनेस का सही फॉर्मूला
Walking Tips: बहुत से लोग हर सुबह या शाम को बेहद पाबंदी और नियमितता के साथ वॉक करने निकलते हैं। वे ऐसा मानते हैं कि रोजाना पैदल चलने से उनका शरीर पूरी तरह से फिट हो जाएगा, वजन तेजी से घटेगा, शरीर में ऊर्जा बढ़ेगी और दिल भी मजबूत रहेगा। हालांकि, कई हफ्तों और महीनों तक लगातार टहलने के बाद भी जब मनचाहे नतीजे नहीं मिलते और शरीर की बनावट या स्टैमिना में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता, तो निराशा होना स्वाभाविक है। फिटनेस एक्सपर्ट सुमित दुबे ने इस आम समस्या के मुख्य कारणों का विश्लेषण करते हुए स्पष्ट किया है कि केवल आरामदायक गति से वॉक करना संपूर्ण फिटनेस के लिए पर्याप्त नहीं होता है।
सिर्फ पैदल चलना क्यों संपूर्ण फिटनेस के लिए काफी नहीं है
एक आदर्श और संपूर्ण फिटनेस का अर्थ केवल कुछ किलोमीटर दूरी तय करना या कैलोरी बर्न करना नहीं होता। इसमें कार्डियोवस्कुलर हेल्थ, मांसपेशियों की ताकत, शरीर का संतुलन, जोड़ों का लचीलापन और मूवमेंट कैपेसिटी शामिल होती है। सुमित दुबे के अनुसार, नियमित वॉक इन सभी पहलुओं को एक साथ विकसित नहीं कर पाती है। बहुत धीमी रफ्तार से चलने पर शरीर को हल्की एक्टिविटी तो मिलती है, लेकिन मांसपेशियों को कोई नई चुनौती नहीं मिलती। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति दिनभर सक्रिय तो महसूस करता है, लेकिन वास्तविक शारीरिक मजबूती और फिटनेस हासिल नहीं कर पाता।
वॉक की स्पीड और रूटीन में बदलाव का महत्व
ज्यादातर लोग वॉक करते समय फोन पर बात करते हैं या किसी साथी के साथ बातचीत में मसरूफ रहते हैं। इस धीमी और आरामदायक गति में दिल और फेफड़ों को पर्याप्त मेहनत नहीं करनी पड़ती, जिससे कार्डियो फिटनेस में कोई खास सुधार नहीं होता। एक्सपर्ट की मानें तो सही चाल वह है जिसमें आप बात तो कर सकें, लेकिन गाना न गा पाएं। इसके अलावा, रोजाना एक ही रास्ते पर और एक ही स्पीड से चलने पर शरीर इस पैटर्न का आदी हो जाता है, जिससे प्रोग्रेस रुक जाती है। वॉक में कभी तेज तो कभी धीमी गति (इंटरवल वॉकिंग) को शामिल करने और नए रास्तों का चुनाव करने से शरीर को नई चुनौती मिलती है।
तीस की उम्र के बाद स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को नजरअंदाज न करें
तीस साल की उम्र के बाद मानव शरीर में स्वाभाविक रूप से मांसपेशियों का क्षय (मसल मास लॉस) शुरू हो जाता है। यदि इस उम्र में मांसपेशियों को नियमित रूप से चुनौती न दी जाए, तो शरीर तेजी से कमजोर होने लगता है। वॉक (Walking Tips) मुख्य रूप से एक कार्डियो एक्टिविटी है जो मांसपेशियों को मजबूती नहीं दे सकती। इसके लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बेहद जरूरी है। हफ्ते में दो से तीन दिन साधारण बॉडीवेट एक्सरसाइज जैसे स्क्वैट्स, पुश-अप्स, प्लैंक या हल्के वजन उठाना बेहद असरदार होता है। इससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है और वॉक के फायदे भी कई गुना बढ़ जाते हैं।
जीवनशैली के अन्य घटक और सबसे आम गलतियां
केवल कसरत करना ही काफी नहीं है; इसके साथ सही खानपान, पर्याप्त नींद और मानसिक तनाव का प्रबंधन भी फिटनेस तय करता है। दिनभर एक जगह बैठे रहने से सुबह की वॉक का असर काफी हद तक कम हो जाता है। इसके अलावा, पर्याप्त प्रोटीन न लेना और पूरी नींद न लेना मांसपेशियों की रिकवरी को प्रभावित करता है। लोग अक्सर सालों तक एक जैसी धीमी गति से टहलने और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को पूरी तरह से छोड़ने की गलती करते हैं। इन बुनियादी गलतियों को सुधारकर ही बेहतर और स्थायी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
Walking Tips: फिटनेस का सही और पूरा फॉर्मूला
सुमित दुबे सलाह देते हैं कि वॉक को अपनी दिनचर्या का आधार जरूर बनाएं, लेकिन इसे ही पर्याप्त न मानें। अपनी वॉक की तीव्रता बढ़ाएं, उसमें विविधता लाएं और उसके साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग तथा फ्लेक्सिबिलिटी एक्सरसाइज को जोड़ें। जब शरीर को नियमित रूप से अलग-अलग चुनौतियां मिलेंगी, सही पोषण मिलेगा और पर्याप्त आराम मिलेगा, तभी आप वास्तविक रूप से फिट और ऊर्जावान बन पाएंगे। केवल एक ही पैटर्न पर निर्भर रहने के बजाय इस संपूर्ण फिटनेस फॉर्मूले को अपनाना ही समझदारी है।
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