Hot Tea Coffee Cancer Risk: बहुत गर्म चाय-कॉफी पीना पड़ सकता है भारी, बढ़ सकता है कैंसर का खतरा
Hot Tea Coffee Cancer Risk: नई रिसर्च के मुताबिक बहुत गर्म चाय-कॉफी पीने से एसोफेगल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। जानें एक्सपर्ट की राय और सुरक्षित तापमान से जुड़ी अहम जानकारी।
Hot Tea Coffee Cancer Risk: चाय और कॉफी के शौकीन अक्सर कप में डालते ही बिना देर किए इसे पीना पसंद करते हैं, लेकिन यह आदत सेहत के लिए भारी पड़ सकती है। हाल ही में हुई एक नई रिसर्च में सामने आया है कि बहुत ज्यादा गर्म चाय या कॉफी पीने से एसोफेगल कैंसर यानी भोजन नली के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। ब्रिटेन में हुई इस रिसर्च के अनुसार जो लोग बहुत तेज गर्म पेय पदार्थ पीते हैं, उनमें गुनगुनी चाय-कॉफी पीने वालों की तुलना में यह खतरा लगभग तीन गुना ज्यादा पाया गया। यह खतरा पेय पदार्थ की वजह से नहीं, बल्कि उसके तापमान की वजह से पैदा होता है। यह रिसर्च खासतौर पर उन लोगों के लिए अहम मानी जा रही है जो दिन में कई बार बेहद गर्म चाय या कॉफी पीने के आदी हैं।
Hot Tea Coffee Cancer Risk: रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की यह रिसर्च इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित हुई है, जिसमें बहुत गर्म पेय पदार्थों और कैंसर के बीच संबंध को विस्तार से समझाया गया है। शोध के मुताबिक जब बेहद गर्म तरल पदार्थ फूड पाइप से होते हुए पेट तक पहुंचता है, तो रास्ते में मौजूद कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि इस तरह के कैंसर के विकसित होने की संभावना आमतौर पर कम ही रहती है, लेकिन बार-बार यह आदत दोहराने से खतरा बढ़ सकता है। यह रिसर्च खासतौर पर उन लोगों के लिए चेतावनी है जो नियमित रूप से बहुत गर्म पेय पदार्थों का सेवन करते हैं।
एक्सपर्ट ने बताई तापमान से जुड़ी अहम बात
डॉक्टर के अनुसार इस रिसर्च में यह पाया गया कि 65 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान वाली चाय या कॉफी बार-बार पीने से एसोफेजियल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा नामक फूड-पाइप कैंसर का खतरा काफी बढ़ सकता है। यूके में लगभग दस लाख वयस्कों पर की गई इस 14 साल लंबी स्टडी में यह भी सामने आया कि जो लोग अपने पेय पदार्थों को बहुत गर्म पीना पसंद करते थे, उनमें यह खतरा अपेक्षाकृत ज्यादा दर्ज किया गया। एक्सपर्ट के मुताबिक बहुत ज्यादा गर्म तरल पदार्थ एसोफेगस की परत को बार-बार थर्मल नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे समय के साथ कोशिकाओं में कैंसर जैसे खतरनाक बदलाव होने की आशंका बढ़ जाती है।
किन लोगों के लिए है ज्यादा खतरा
अहम बात यह है कि ज्यादातर लोगों में इस तरह के कैंसर होने का समग्र खतरा अभी भी कम माना जाता है, और स्टडी में एसोफेजियल एडेनोकार्सिनोमा नामक कैंसर के साथ इस आदत का कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया। हालांकि जो लोग नियमित रूप से बहुत ज्यादा गर्म पेय पदार्थ पीते हैं, खासकर दिन में छह या उससे अधिक कप चाय-कॉफी का सेवन करने वाले लोगों के लिए यह बढ़ा हुआ खतरा काफी मायने रखता है। ऐसे लोगों को अपनी आदत पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है, ताकि लंबे समय में किसी गंभीर समस्या से बचा जा सके।
सुरक्षित तापमान पर पीना है जरूरी
एक्सपर्ट का साफ कहना है कि चाय या कॉफी बनाने के तुरंत बाद उसे पीने की बजाय कुछ मिनट ठंडा होने देना चाहिए। अगर पेय पदार्थ होंठों या जीभ पर बहुत ज्यादा गर्म महसूस हो, तो यह संकेत है कि उसका तापमान सुरक्षित सीमा से अधिक हो सकता है। ऐसे में चाय, कॉफी या किसी भी अन्य गर्म पेय पदार्थ को हमेशा गुनगुना होने पर ही पीना बेहतर माना जाता है। यह छोटी सी आदत लंबे समय में फूड पाइप से जुड़ी गंभीर समस्याओं के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है।
Hot Tea Coffee Cancer Risk: सावधानी ही बचाव का सबसे बेहतर तरीका
इस पूरी रिसर्च से यह साफ हो जाता है कि चाय-कॉफी का शौक रखने वालों को अपने पीने के तरीके पर थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है। यह जरूरी नहीं है कि चाय-कॉफी छोड़ दी जाए, बल्कि इसे सही तापमान पर पीने की आदत डालना ही समझदारी है। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर भविष्य में होने वाली बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। जो लोग पहले से ही पाचन या फूड पाइप से जुड़ी किसी समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें इस विषय में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
कुल मिलाकर बहुत गर्म चाय-कॉफी पीने की आदत को हल्के में लेना उचित नहीं होगा, क्योंकि नई रिसर्च इस ओर स्पष्ट संकेत दे रही है कि तापमान का सीधा संबंध एसोफेगल कैंसर के खतरे से हो सकता है। हालांकि यह खतरा हर किसी के लिए एक समान नहीं है, लेकिन जो लोग नियमित रूप से बहुत ज्यादा गर्म पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, उन्हें सतर्क रहने की जरूरत जरूर है। चाय-कॉफी को कुछ मिनट ठंडा होने देना और गुनगुने तापमान पर पीना एक आसान लेकिन प्रभावी कदम हो सकता है। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए साझा की गई है, और किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श लेना ही सबसे सही तरीका माना जाता है।
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