Petrol-Diesel Price 13 September 2026: पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, क्रूड 105 डॉलर के करीब

दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम नहीं बदले, बढ़ते क्रूड से कंपनियों पर दबाव

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Petrol-Diesel Price 13 September 2026: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी भू-राजनीतिक उछाल के बावजूद घरेलू स्तर पर वाहन चालकों को रविवार, 13 सितंबर 2026 को भी राहत जारी है। देश की प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने आज सुबह जारी अपनी दैनिक मूल्य समीक्षा में पेट्रोल और डीजल की खुदरा दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के पुराने स्तर पर ही स्थिर बना हुआ है।

वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया के तनाव और प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में उत्पन्न व्यवधानों के चलते ब्रेंट क्रूड एक समय 105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है। इसके बावजूद भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने इस अंतरराष्ट्रीय लागत वृद्धि का बोझ फिलहाल आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है, जिससे त्योहारी सीजन से पहले आम नागरिकों और माल ढुलाई क्षेत्र को सीधी राहत मिल रही है।

Petrol-Diesel Price 13 September 2026: महानगरों और प्रमुख शहरों में ईंधन के खुदरा भाव

राज्य स्तरीय मूल्य संवर्धित कर (वैट), स्थानीय उपकर और माल भाड़े में भिन्नता के कारण देश भर के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में अंतर देखने को मिलता है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। वित्तीय राजधानी मुंबई में स्थानीय करों की संरचना के चलते पेट्रोल 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर दर्ज किया गया है, जो महानगरों में सर्वाधिक दरों में से एक है।

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में पेट्रोल की खुदरा दर 107.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर पर टिकी हुई है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी कीमतों में कोई फेरबदल नहीं देखा गया है, जहां पेट्रोल 101.86 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.02 रुपये प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है।

कच्चा तेल 105 डॉलर के करीब: वैश्विक तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता

अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में 9 प्रतिशत से अधिक की भारी तेजी दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य तथा लाल सागर से गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर उत्पन्न आशंकाओं ने क्रूड के बाजार में भारी जोखिम प्रीमियम जोड़ दिया है।

सप्ताहांत पर वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को छूने की दिशा में अग्रसर है। भारत अपनी घरेलू पेट्रोलियम आवश्यकताओं का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशी बाजारों से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में प्रत्येक डॉलर की बढ़ोतरी भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाता घाटे पर अतिरिक्त दबाव डालती है।

तेल कंपनियों के मार्जिन पर गहराया दबाव: आईसीआरए का अनुमान

कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय लागत और घरेलू पंपों पर बिक्री मूल्य के बीच बढ़ते फासले के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के विपणन मुनाफे (मार्केटिंग मार्जिन) पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए (ICRA) के ताजा विश्लेषण के अनुसार, मौजूदा कच्चे तेल की दरों के आधार पर तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 23 रुपये प्रति लीटर का घाटा (अंडर-रिकवरी) वहन करना पड़ रहा है।

हालांकि तेल विपणन कंपनियों ने पिछले वित्तीय वर्षों में अर्जित किए गए मजबूत वित्तीय बफर के दम पर इस घाटे को खुद अवशोषित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर टिका रहता है, तो कंपनियों के लिए खुदरा दरों को अनिश्चितकाल तक स्थिर बनाए रखना वित्तीय दृष्टि से कठिन हो सकता है।

डीजल की स्थिरता से माल ढुलाई और महंगाई को सहारा

अर्थव्यवस्था के जानकारों के अनुसार पेट्रोल की तुलना में डीजल की कीमतों का स्थिर रहना देश की व्यापक महंगाई दर को नियंत्रित रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश में 70 प्रतिशत से अधिक वाणिज्यिक परिवहन, कृषि पंप और औद्योगिक जेनरेटर सीधे तौर पर डीजल पर निर्भर हैं।

यदि डीजल की कीमतों में वृद्धि होती है, तो इसका सीधा असर फल, सब्जियों, दैनिक उपभोग की वस्तुओं (FMCG) और दवाइयों के परिवहन भाड़े पर पड़ता है। ऐसे में खुदरा दरों का स्थिर रहना खुदरा महंगाई दर (CPI) को नियंत्रित रखने में केंद्रीय बैंक और सरकार दोनों के लिए सहायक सिद्ध हो रहा है।

Petrol-Diesel Price 13 September 2026: आगामी दिनों में क्या बढ़ सकते हैं दाम?

वर्तमान में देश भर के पेट्रोल पंपों पर 13 सितंबर को पुरानी दरें ही प्रभावी हैं। आने वाले दिनों में ईंधन की खुदरा कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संकट किस दिशा में आगे बढ़ता है और अंतरराष्ट्रीय क्रूड में नरमी आती है या नहीं। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की चाल भी अंतिम आयात लागत निर्धारित करने में प्रमुख भूमिका निभाएगी। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी असत्यापित दावे के बजाय प्रतिदिन सुबह तेल कंपनियों के अधिकृत पोर्टलों से ही अपने शहर के ताजा रेट सत्यापित करें।

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