Petrol-Diesel Price 12 September 2026: पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, क्रूड से बढ़ी चिंता
दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20, कच्चा तेल 104 डॉलर के पार
Petrol-Diesel Price 12 September 2026: वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी तीव्र भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच देश भर में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम शनिवार, 12 सितंबर 2026 को भी स्थिर बने हुए हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बरकरार है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) द्वारा आज सुबह 6 बजे जारी मूल्य सूची में किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया गया है, जिससे घरेलू वाहन चालकों और उपभोक्ताओं को फिलहाल सीधी राहत मिली हुई है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी ने पेट्रोलियम कंपनियों और नीति निर्माताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य टकराव और प्रमुख समुद्री परिवहन गलियारों में सुरक्षा जोखिम के चलते वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। आयातित कच्चे तेल पर भारत की भारी निर्भरता को देखते हुए बाजार विश्लेषक मान रहे हैं कि यदि यह तेजी लंबे समय तक बनी रही, तो घरेलू स्तर पर ईंधन दरों को स्थिर रखना तेल कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
Petrol-Diesel Price 12 September 2026: चार प्रमुख महानगरों और लखनऊ में पेट्रोल-डीजल की ताजा दरें
देश के विभिन्न राज्यों में लागू स्थानीय मूल्य संवर्धित कर (वैट), उपकर और माल ढुलाई लागत के अंतर के कारण प्रत्येक शहर में ईंधन की खुदरा कीमतों में भिन्नता देखी जाती है।
| महानगर / शहर | पेट्रोल की दर (प्रति लीटर) | डीजल की दर (प्रति लीटर) |
| नई दिल्ली | ₹102.12 | ₹95.20 |
| मुंबई | ₹103.54 | ₹90.03 |
| कोलकाता | ₹113.51 | ₹99.82 |
| चेन्नई | ₹107.74 | ₹99.55 |
| लखनऊ | ₹101.86 | ₹95.02 |
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल 101.86 रुपये प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है। राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले करों के भिन्न-भिन्न स्लैब के कारण कोलकाता में पेट्रोल की कीमतें महानगरों में सबसे अधिक बनी हुई हैं, जबकि मुंबई में राज्य करों के समायोजन के चलते डीजल की दरें तुलनात्मक रूप से कम दर्ज की जा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय क्रूड 100 डॉलर के पार: आपूर्ति संकट और जोखिम प्रीमियम
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ना केवल मांग और आपूर्ति का साधारण खेल नहीं रह गया है, बल्कि पश्चिम एशिया में पैदा हुए गंभीर तनाव ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के रणनीतिक समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही को लेकर उत्पन्न चिंताओं के कारण जहाजों के माल ढुलाई भाड़े और बीमा जोखिम प्रीमियम में तेज उछाल देखा गया है।
सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड जहां 104.18 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 99.52 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर टिका रहा। भारत अपनी कुल आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशी बाजारों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक डॉलर की बढ़त देश के समग्र तेल आयात बिल और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ाती है।
तेल विपणन कंपनियों के मार्जिन पर गहराया संकट: आईसीआरए की चेतावनी
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए इस भारी उछाल का सबसे सीधा असर घरेलू तेल रिफाइनिंग और विपणन कंपनियों के मुनाफे पर पड़ रहा है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए (ICRA) के ताजा अनुमानों के अनुसार, कच्चे तेल की मौजूदा लागत और खुदरा विक्रय मूल्य के बीच अंतर बढ़ने के कारण तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 23 रुपये प्रति लीटर तक का अंडर-रिकवरी (विपणन घाटा) उठाना पड़ रहा है।
पिछले वित्तीय वर्षों में संचित किए गए लाभ के बलबूते कंपनियां फिलहाल इस घाटे को खुद वहन कर रही हैं, जिसके कारण आम जनता पर इसका बोझ तुरंत नहीं डाला गया है। किंतु विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्रेंट क्रूड आगामी सप्ताहों में भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है, तो तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति को संतुलित रखने के लिए खुदरा कीमतों की समीक्षा अपरिहार्य हो सकती है।
रुपये में कमजोरी और घरेलू खपत में गिरावट के संकेत
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के समानांतर विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये पर बना दबाव भी आयात लागत को बढ़ा रहा है। डॉलर महंगा होने से समान मात्रा में कच्चा तेल खरीदने के लिए भारतीय रिफाइनरियों को अधिक रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे ‘आयातित मुद्रास्फीति’ का खतरा बढ़ जाता है।
इसके साथ ही पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) के अनुसार, अगस्त 2026 के दौरान भारत की कुल ईंधन खपत में मासिक आधार पर 6.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले दो वर्षों का निचला स्तर है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि ईंधन की ऊंची दरों और औद्योगिक गतिविधियों के मिजाज ने खपत के पैटर्न को भी प्रभावित किया है।
डीजल की दरों का देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर सीधा असर
ईंधन बाजार में पेट्रोल की तुलना में डीजल की स्थिरता को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत में लगभग 70 प्रतिशत वाणिज्यिक माल ढुलाई और कृषि सिंचाई कार्य डीजल चालित इंजनों पर निर्भर करते हैं।
यदि आने वाले समय में तेल कंपनियां डीजल के खुदरा मूल्यों में संशोधन करती हैं, तो इसका सीधा असर फल, सब्जियों, खाद्यान्न, दवाओं और दैनिक उपभोग की वस्तुओं (FMCG) की परिवहन लागत पर पड़ेगा। माल भाड़ा बढ़ने से व्यापक खुदरा महंगाई दर (CPI) में वृद्धि हो सकती है, जिससे आम परिवारों के मासिक घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ना तय है।
Petrol-Diesel Price 12 September 2026: आगामी दिनों में क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
वर्तमान में सरकारी तेल विपणन कंपनियों और केंद्र सरकार ने दरों को स्थिर रखकर उपभोक्ताओं को राहत दी है। हालांकि, पेट्रोल-डीजल के आगामी मूल्य निर्धारण की दिशा पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव कितनी जल्दी थमता है और वैश्विक क्रूड 100 डॉलर से नीचे लौटता है या नहीं। वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी असत्यापित सूचना पर विश्वास करने के बजाय दैनिक आधार पर आधिकारिक स्रोतों से अपने शहर की अद्यतन दरों की पुष्टि करते रहें।
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