Delhi MCD Action: सत्य निकेतन हादसे के बाद 41 जगहों पर बुलडोजर, 61 संपत्तियां सील

अवैध निर्माण और खतरनाक PG पर MCD की सख्ती, 12 जोनों में एक साथ चला अभियान

0

Delhi MCD Action: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बहुमंजिला इमारत हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी में अनधिकृत निर्माण और संरचनात्मक रूप से खतरनाक इमारतों के खिलाफ व्यापक ध्वस्तीकरण और सीलिंग अभियान छेड़ दिया है। सत्य निकेतन में जर्जर और अवैध रूप से विस्तारित इमारत के ढहने से सात लोगों की दर्दनाक मौत और कई अन्य के गंभीर रूप से घायल होने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इसके जवाब में निगम ने दिल्ली के सभी 12 प्रशासनिक जोनों में एक साथ प्रवर्तन अभियान चलाते हुए 41 स्थानों पर बुलडोजर चलाकर अवैध ढांचे ध्वस्त किए हैं और 61 विवादित व खतरनाक संपत्तियों को मौके पर ही सील कर दिया है।

इस बड़े प्रशासनिक एक्शन का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में बिना स्वीकृत नक्शे के खड़े किए गए अवैध निर्माणों, स्वीकृत तल से अतिरिक्त बनाई गई मंजिलों और नियमों की अनदेखी कर व्यावसायिक रूप से संचालित किए जा रहे असुरक्षित पेइंग गेस्ट (PG) आवासों पर पूर्ण अंकुश लगाना है। दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणियों और लगातार निगरानी के बीच एमसीडी का यह अभियान अब शहरव्यापी सुरक्षा समीक्षा में बदल चुका है।

Delhi MCD Action: 41 स्थलों पर बुलडोजर कार्रवाई और 61 संपत्तियां सील

सत्य निकेतन की दुखद घटना के बाद एमसीडी के भवन निर्माण विभाग और प्रवर्तन दस्तों ने राजधानी के दक्षिणी, पश्चिमी, मध्य, शाहदरा, रोहिणी और करोल बाग समेत सभी 12 जोनों में सघन औचक निरीक्षण अभियान शुरू किया। कार्रवाई के दौरान जहां सुरक्षा मानकों का घोर उल्लंघन पाया गया, वहां भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर अवैध पक्के निर्माणों, बालकनियों और अतिरिक्त मंजिलों को ध्वस्त किया गया।

ताजा आंकड़ों के अनुसार निगम ने 41 संवेदनशील स्थलों पर संरचनात्मक ढांचे गिराए हैं, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाली 61 संपत्तियों पर सीलिंग की मुहर लगा दी गई है। इससे पूर्व के सत्रों में भी निगम ने 34 से अधिक अवैध निर्माणों को आंशिक रूप से ध्वस्त किया था और दर्जनों संपत्तियों को तत्काल प्रभाव से ‘डिमोलिशन ऑर्डर’ तामील कराए थे। निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शहर के हर उस कोने में पहुंचेगी जहां मानव जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाले ढांचे खड़े हैं।

सत्य निकेतन में तीन पीजी इमारतें घोषित हुईं खतरनाक: छात्रों में दहशत

सत्य निकेतन क्षेत्र दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटा हुआ है, जिसके चलते यह इलाका देश भर से आने वाले हजारों छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए प्रमुख पीजी और रेंटल हब बना हुआ है। हादसे के बाद निगम द्वारा कराए गए त्वरित संरचनात्मक सर्वेक्षण (Structural Safety Survey) में सत्य निकेतन की ही तीन बड़ी पीजी इमारतों को बेहद जर्जर और खतरनाक श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।

हादसे के प्रत्यक्षदर्शी छात्रों और स्थानीय निवासियों में असुरक्षित ढांचों को लेकर गहरा खौफ देखा जा रहा है। कई छात्रों ने संभावित खतरे को भांपते हुए अपने-अपने पीजी खाली कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी शुरू कर दी है। छात्रों का आरोप है कि मकान मालिकों द्वारा अधिक किराया वसूलने के लालच में 50 से 60 गज के छोटे भूखंडों पर बिना पिलर और बुनियादी नींव की मजबूती के पांच-पांच, छह-छह मंजिलें खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे पूरी संरचना मौत का जाल बन जाती है।

लापरवाह अधिकारियों पर गिरी गाज: इंजीनियर निलंबित

इमारत ढहने की घटना के बाद केवल अवैध संपत्तियों पर ही बुलडोजर नहीं चला, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर निगम की अंदरूनी जवाबदेही भी तय की गई है। नगर निगम ने क्षेत्र में अवैध निर्माण की अनदेखी करने, शिकायतों पर समय रहते संज्ञान न लेने और प्रथम दृष्टया घोर लापरवाही बरतने के आरोप में भवन विभाग के एक सहायक अभियंता (AE) और दो कनिष्ठ अभियंताओं (JE) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

इससे पहले दक्षिणी जोन के पांच अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय अनुशासनात्मक जांच शुरू की जा चुकी है। दिल्ली की सतर्कता शाखा इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इन खतरनाक इमारतों के निर्माण के दौरान स्थानीय अधिकारियों और बिल्डरों के बीच कोई अवैध सांठगांठ थी।

अदालती सख्ती और 18 सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी का गठन

सत्य निकेतन इमारत हादसे को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए निगम की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं, वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने भी उच्च न्यायालय को मामले की सीधी निगरानी जारी रखने का निर्देश दिया है। न्यायिक दबाव और सार्वजनिक आक्रोश को देखते हुए दिल्ली सरकार ने छात्र आवास और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए 18 सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति (High-Powered Committee) के गठन को स्वीकृति दी है।

शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में गठित इस उच्चस्तरीय समिति में दिल्ली के मुख्य सचिव, पुलिस आयुक्त, एमसीडी आयुक्त, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के उपाध्यक्ष और दिल्ली विश्वविद्यालय सहित प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं। इस समिति को 60 दिनों के भीतर अपनी व्यापक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। समिति का मुख्य कार्य राजधानी में छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती हॉस्टल/पीजी की मांग का आकलन करना, जर्जर इमारतों में चल रहे अवैध पीजी पर रोक लगाना और सरकार की अप्रयुक्त संपत्तियों को छात्र आवास में तब्दील करने की संभावनाओं पर नीतिगत सुझाव देना होगा।

अवैध निर्माण के साथ ओवरक्राउडिंग और अग्नि सुरक्षा पर भी नजर

राजधानी में पीजी और किराए के मकानों की सबसे बड़ी समस्या संरचनात्मक कमजोरी के साथ-साथ क्षमता से अत्यधिक भीड़ (ओवरक्राउडिंग) और अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) मानकों का पूर्ण अभाव है। तंग गलियों में बनी बहुमंजिला इमारतों में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट), अग्निशामक यंत्र और वेंटिलेशन की कोई व्यवस्था नहीं होती।

प्रशासनिक जांच में यह भी रेखांकित किया गया है कि यदि किसी इमारत का ढांचा स्थिर भी हो, तब भी उसमें स्वीकृत सीमा से तीन गुना अधिक लोगों का रहना और एकल संकीर्ण सीढ़ी होना किसी भी आपात स्थिति में भगदड़ और जानमाल के भारी नुकसान का कारण बन सकता है। प्रस्तावित नई नियमावली में अब पीजी संचालन के लिए स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट और फायर एनओसी को अनिवार्य बनाने पर विचार किया जा रहा है।

Delhi MCD Action: निष्कर्ष

सत्य निकेतन की त्रासदी ने दिल्ली में लंबे समय से फल-फूल रहे अनधिकृत निर्माण और असुरक्षित पीजी कारोबार के काले सच को पूरी तरह उजागर कर दिया है। एमसीडी द्वारा 41 स्थानों पर चलाया गया बुलडोजर और 61 संपत्तियों की सीलिंग अवैध निर्माणकर्ताओं के लिए एक कड़ा संदेश अवश्य है, किंतु यह अभियान केवल कुछ दिनों की औपचारिकता बनकर नहीं रह जाना चाहिए। राजधानी के नागरिकों और विशेषकर युवा छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित संरचनात्मक ऑडिट, भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई और एक पारदर्शी रेगुलेटरी तंत्र की स्थायी स्थापना समय की सबसे बड़ी मांग है।

Read more here

Gold-Silver Price 11 September 2026: सोने-चांदी के आज के ताजा भाव जारी

Friday Lakshmi Puja: शुक्रवार को करें ये उपाय, मां लक्ष्मी की कृपा से बढ़ेगी समृद्धि

Aaj Ka Rashifal 11 September 2026: मेष से मीन तक जानें दैनिक राशिफल

Hartalika Teej Mistakes: हरतालिका तीज पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना अधूरा रह जाएगा व्रत का फल

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.