Momos Red Chutney: कानपुर में 115 किलो मोमोज की लाल चटनी नष्ट, तीखे स्वाद के पीछे छिपा सेहत का बड़ा खतरा
Momos Red Chutney: कानपुर में 115 किलो मोमोज की लाल चटनी नष्ट, तीखे स्वाद के पीछे छिपा सेहत का बड़ा खतरा
Momos Red Chutney: शाम ढलते ही शहर की किसी भी गली या नुक्कड़ पर खड़े मोमोज के ठेले के चारों ओर लगी भीड़ इस बात की गवाही देने के लिए काफी है कि यह व्यंजन देश के युवाओं और बच्चों के बीच कितना लोकप्रिय है। भाप से बने उन गोल पकौड़ों के साथ जब तक प्लेट में वह आग जैसी लाल और तीखी चटनी न परोसी जाए, तब तक खाने का असली मजा अधूरा ही माना जाता है। लोग चटकारे लेकर उस चटनी को प्लेट से चाट जाते हैं, बिना यह सोचे कि यह स्वाद उनके शरीर के लिए कितना भारी पड़ सकता है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने इस लोकप्रिय स्ट्रीट फूड की स्वच्छता और गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग की एक औचक कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने शहर के विभिन्न हिस्सों से छापेमारी कर करीब 115 किलोग्राम मोमोज की लाल चटनी को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। जब इस चटनी की प्रयोगशाला और मौके पर जांच की गई, तो यह इंसान के खाने योग्य बिल्कुल भी नहीं पाई गई। इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब यह चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि आखिर जिस चटनी को लोग इतने चाव से खाते हैं, उसके अंदर ऐसी कौन सी छिपी हुई चीजें मिलाई जाती हैं जो सीधे तौर पर इंसानी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं।
Momos Red Chutney: कृत्रिम रंग और एमएसजी का खतरनाक खेल
मोमोज की इस तीखी चटनी का प्राकृतिक रूप से चमकदार लाल रंग देखकर अक्सर लोगों को यह भ्रम होता है कि इसे शुद्ध टमाटर और लाल मिर्च पीसकर तैयार किया गया होगा। हकीकत इससे कोसों दूर है क्योंकि ठेले और कमर्शियल दुकानों पर इस आकर्षक लाल रंग को बनाए रखने के लिए धड़ल्ले से सिंथेटिक फूड कलर्स का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह के हानिकारक आर्टिफिशियल रंग न केवल शरीर में गंभीर एलर्जी पैदा कर सकते हैं, बल्कि त्वचा पर रिएक्शन और बच्चों के नाजुक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालते हैं।
इसके अलावा स्वाद को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए इसमें मोनोसोडियम ग्लूटामेट यानी एमएसजी जैसी सामग्री मिलाई जाती है। वाणिज्यिक स्तर पर बनने वाली इस चटनी में एमएसजी की अत्यधिक मात्रा होने के कारण कई लोगों को खाने के तुरंत बाद तेज सिरदर्द, जी मिचलाना, बेचैनी और दिल की धड़कन तेज होने जैसी असहज समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
प्रिजर्वेटिव्स और तीखेपन की हदें पार
चटनी को लंबे वक्त तक खराब होने से बचाने के लिए व्यापारी उसमें तरह-तरह के रासायनिक प्रिजर्वेटिव्स झोंक देते हैं। सोडियम बेंजोएट और पोटैशियम सोर्बेट जैसे तत्व सीमित मात्रा में भले ही उपयोग किए जाते हों, लेकिन व्यावसायिक लालच में इनकी मात्रा इतनी बढ़ा दी जाती है कि लोगों के पेट की आंतें जवाब देने लगती हैं। इससे पाचन तंत्र कमजोर होता है और गंभीर एलर्जी की शिकायत हो सकती है।
दूसरी तरफ, चटनी के नाम पर इसमें जरूरत से ज्यादा लाल मिर्च और कैप्साइसिन का इस्तेमाल किया जाता है। इतनी तीखी चटनी पेट के अंदर जाते ही भयंकर जलन, एसिडिटी, गैस, दस्त और असहनीय पेट दर्द का कारण बनती है। जिन लोगों को पहले से ही पेट का अल्सर या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी दिक्कतें हैं, उनके लिए यह तीखापन किसी जहर से कम साबित नहीं होता।
Momos Red Chutney: हाइजीन की कमी और सड़े-गिरे इंग्रेडिएंट्स
सबसे बड़ा जोखिम तब पैदा होता है जब चटनी को बनाने के लिए सड़े-गिरे टमाटर, खराब लहसुन और पुरानी मिर्चों का इस्तेमाल किया जाता है। कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में व्यापारी अक्सर बासी और खराब हो चुकी सामग्री को पीसकर चटनी तैयार कर देते हैं, जिसमें खतरनाक बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपने लगते हैं। ऐसी दूषित चटनी खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी और गंभीर पेट के संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इसके ऊपर से स्ट्रीट फूड स्टॉल्स पर यह चटनी खुले बर्तनों में घंटों तक मक्खियों और धूल के बीच रखी रहती है। चटनी का गाढ़ापन बढ़ाने और उसकी लागत घटाने के लिए इसमें घटिया किस्म के रिफाइंड तेल, अत्यधिक नमक और जैंथन गम या कैरेजीनन जैसे केमिकल्स मिलाए जाते हैं। बार-बार इस तरह की मिलावटी चीजें खाने से हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और शरीर में अंदरूनी सूजन जैसी बड़ी बीमारियां शरीर को घेर सकती हैं।
Momos Red Chutney: किन लोगों को रहना चाहिए सबसे ज्यादा सतर्क
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क किनारे मिलने वाली इन चटनी और फास्ट फूड से हर वर्ग के व्यक्ति को दूरी बनानी चाहिए, लेकिन कुछ लोगों को इसके प्रति अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। जिन लोगों को पुरानी एसिडिटी या गैस की समस्या है, उन्हें इसे भूलकर भी हाथ नहीं लगाना चाहिए। पेट के अल्सर से पीड़ित मरीजों और आईबीएस के रोगियों के लिए यह चटनी अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचाने का रास्ता बन सकती है। इसके अलावा बवासीर की समस्या से जूझ रहे लोग, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी कमजोर है, उन्हें इस तीखे जहर से पूरी तरह परहेज करना चाहिए ताकि उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।
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