Monsoon Gardening Tips: बारिश के मौसम में लगाएं गुलाब की 5 बेहतरीन वैरायटी, हरा-भरा हो जाएगा आपका गार्डन

Monsoon Gardening Tips: बारिश में ऐसे उगाएं खूबसूरत गुलाब, जानें 5 बेहतरीन किस्में

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Monsoon Gardening Tips: मौसम बदल रहा है और आसमान में छाए बादलों के साथ ही बागवानी प्रेमियों के चेहरे भी खिल उठे हैं। रिमझिम फुहारों का यह दौर सिर्फ प्रकृति को ही नया जीवन नहीं देता, बल्कि पौधों की रोपाई के लिए भी यह साल का सबसे मुफीद वक्त माना जाता है। गीली मिट्टी की सोंधी खुशबू के बीच यदि आपके घर का आंगन या बालकनी रंग-बिरंगे गुलाबों से महक उठे, तो सुहाना मौसम और भी हसीन हो जाता है। उद्यान विशेषज्ञों की मानें तो मानसून की नमी पौधों की जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करती है, जिससे वे तेजी से बढ़ती हैं।

यदि आप भी इस बरसात अपने घर के बगीचे को गुलजार करना चाहते हैं, तो बाजार में उपलब्ध सैकड़ों किस्मों में से सही गुलाब का चुनाव करना बेहद जरूरी है। गलत किस्म चुनने पर पौधे बारिश के पानी से सड़ भी सकते हैं। ऐसे में आपको कुछ चुनिंदा वैराइटी के बारे में जरूर जानना चाहिए, जो बरसात के इस मौसम में सबसे ज्यादा फलती-फूलती हैं और आपके गार्डन की रौनक कई गुना बढ़ा देती हैं।

Monsoon Gardening Tips, देसी गुलाब: कम मेहनत और बेहतरीन खुशबू

जब भी टिकाऊ और मजबूत पौधों की बात आती है, तो सबसे पहला नाम देसी गुलाब का ही आता है। इस पारंपरिक किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हमारे देश के मौसम के अनुकूल खुद को ढाल लेता है। मानसून के दौरान इसकी जड़ें तेजी से फैलती हैं और बहुत कम देखभाल की मांग करती हैं।

इस पौधे पर आने वाले फूलों कीनी भीनी खुशबू पूरे माहौल को तरोताजा कर देती है। अगर आपके पास बागवानी का बहुत ज्यादा अनुभव नहीं है और आप कोई आसान विकल्प तलाश रहे हैं, तो देसी गुलाब आपके लिए सबसे सही चुनाव साबित हो सकता है।

फ्लोरिबुंडा गुलाब: गुच्छों में खिलने वाले रंग

क्या आप चाहते हैं कि आपके पौधे की एक ही टहनी पर दर्जनों फूल एक साथ नजर आएं? अगर हां, तो फ्लोरिबुंडा गुलाब इस जरूरत को बखूबी पूरा करता है। यह वैरायटी अपने बड़े-बड़े फूलों के गुच्छों के लिए पहचानी जाती है।

बारिश की बूंदें जब इन गुच्छों पर पड़ती हैं, तो पूरा पौधा किसी गुलदस्ते की तरह सुंदर दिखने लगता है। इसमें कई तरह के चमकीले रंग देखने को मिलते हैं, जो उदास मौसम में भी आपके गार्डन में ऊर्जा और रंगत भर देते हैं।

मिनिएचर रोज: छोटे गमलों के लिए परफेक्ट चॉप्स

शहरों के छोटे मकानों और अपार्टमेंट्स की बालकनी में अक्सर जगह की कमी एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में बड़े पौधे लगाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं होता। इस समस्या का सबसे बेहतरीन समाधान मिनिएचर रोज यानी छोटे आकार का गुलाब है।

आप इसे बहुत ही कम जगह वाले छोटे गमलों या हैंगिंग बास्केट्स में आसानी से लगा सकते हैं। आकार में छोटे होने के बावजूद इन पौधों पर भरपूर मात्रा में फूल आते हैं। बस जरूरत है कि इन्हें ऐसी जगह रखा जाए जहां हल्की धूप और ताजी हवा मिलती रहे।

हाइब्रिड टी रोज: बड़े और खूबसूरत फूलों की चाहत

यदि आपको बड़े आकार के और शानदार गुलाब पसंद हैं, जो काफी दिनों तक अपनी ताजगी बनाए रखें, तो हाइब्रिड टी रोज को अपनी सूची में जरूर शामिल करें। इसके फूल अपनी बेहतरीन बनावट और रंगों के लिए बागवानों के बीच खासे लोकप्रिय हैं।

हालांकि, इस किस्म को थोड़ी अधिक देखरेख की जरूरत होती है। मानसून के दिनों में इस बात का विशेष ध्यान रखना पड़ता है कि इसके गमले में पानी बिल्कुल न रुके। अगर जड़ के पास पानी जमा हो गया, तो पौधे के सड़ने का खतरा बढ़ सकता है।

Monsoon Gardening Tips, क्लाइम्बिंग रोज: दीवारों और गेट की सजावट के लिए

घर के मुख्य द्वार, लोहे के गेट या बालकनी की ग्रिल को फूलों से सजाने का शौक रखते हैं, तो क्लाइम्बिंग रोज से बेहतर विकल्प शायद ही कोई हो। यह एक ऐसी बेलनुमा वैरायटी है जो बहुत तेजी से ऊपर की ओर बढ़ती है।

बारिश के मौसम में इसकी ग्रोथ की रफ्तार और भी ज्यादा तेज हो जाती है। कुछ ही हफ्तों में यह हरी-भरी लताओं और अनगिनत फूलों से पूरे हिस्से को ढक लेती है, जिससे घर की खूबसूरती देखने लायक बन जाती है।

Monsoon Gardening Tips: बरसात के दिनों में गुलाब की देखभाल के जरूरी टिप्स

केवल अच्छे पौधे खरीदकर लगा लेना ही काफी नहीं है, बल्कि मानसून के दौरान उनकी सही सुरक्षा करना भी उतना ही जरूरी है। जरा सी लापरवाही आपके पूरे गार्डन को नुकसान पहुंचा सकती है।

  • निकासी की व्यवस्था: गमलों की मिट्टी ऐसी होनी चाहिए जिसमें पानी टिके नहीं। जलभराव होने पर जड़ें गल सकती हैं।
  • खाद का इस्तेमाल: पौधे की ग्रोथ बढ़ाने के लिए मिट्टी में गोबर की पुरानी खाद या वर्मी कम्पोस्ट समय-समय पर मिलाते रहें।
  • पर्याप्त धूप: भले ही बादल छाए हों, लेकिन कोशिश करें कि पौधे को दिन में कम से कम चार से पांच घंटे खुली रोशनी और धूप जरूर मिले।
  • सफाई: बारिश के बाद पौधे की पीली पड़ चुकी या खराब हो रही पत्तियों को तुरंत काटकर अलग कर दें, ताकि बीमारी आगे न फैले।
  • फंगीसाइड का प्रयोग: नमी वाले मौसम में फंगस लगने का डर रहता है, इसलिए जरूरत पड़ने पर जैविक फंगीसाइड का छिड़काव करें।

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