BRICS Summit 2026: ब्रिक्स सम्मेलन से भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा, एक्सपर्ट से जानें
BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट से भारत को नए बाजार निवेश और ऊर्जा सुरक्षा के मौके मिल सकते हैं।
BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में हो रहा 18वां ब्रिक्स सम्मेलन सिर्फ कूटनीति के लिए नहीं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम माना जा रहा है। वैश्विक मंदी और अनिश्चितता के बीच यह जमावड़ा अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे सकता है। ब्रिक्स के जरिए भारत को नए बाजार विदेशी निवेश और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में अवसर मिल सकते हैं। विस्तार से भारत के निर्यात के दरवाजे रूस चीन यूएई सऊदी अरब और अफ्रीकी देशों में खुल सकते हैं। अमेरिका के टैरिफ से सीधी राहत की उम्मीद नहीं है लेकिन अन्य देशों में निर्यात बढ़ाकर निर्भरता घटाई जा सकती है। स्थानीय मुद्रा में व्यापार और डिजिटल पेमेंट पर जोर है। खाड़ी देशों से इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग में निवेश की संभावना बताई गई है। समूह में बड़े तेल उत्पादक देश होने से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है। कॉमन करेंसी जल्द आने की संभावना कम है। फिलहाल ध्यान स्थानीय मुद्रा और डिजिटल सिस्टम पर है।
BRICS Summit 2026: नए बाजार और निर्यात के अवसर
ब्रिक्स का विस्तार भारत के लिए निर्यात के नए रास्ते खोल रहा है। रूस चीन यूएई सऊदी अरब और अफ्रीकी देशों में भारतीय सामान और सेवाओं का निर्यात बढ़ाने का मौका है। आर्थिक जानकारों के अनुसार अमेरिका द्वारा लगाए टैरिफ पर ब्रिक्स से सीधी राहत की उम्मीद नहीं है। फिर भी अन्य देशों में निर्यात बढ़ाकर भारतीय अर्थव्यवस्था अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम कर सकती है। यह विविधता व्यापार को स्थिर रखने में मददगार साबित हो सकती है।
स्थानीय मुद्रा और डिजिटल भुगतान पर जोर
वैश्विक व्यापार में डॉलर के दबदबे को चुनौती देने के लिए स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है। रूस के साथ स्थानीय मुद्रा में लेनदेन बढ़ने से भुगतान की दिक्कतें कम होंगी। इससे कच्चे तेल जैसे जरूरी आयात में सुविधा मिलेगी। सीबीडीसी और डिजिटल पेमेंट व्यवस्था के जरिए ब्रिक्स देशों के बीच सीमा पार भुगतान तेज और आसान बनाने पर काम चल रहा है। यह व्यापार लागत घटाने में सहायक हो सकता है।
खाड़ी देशों से निवेश की संभावना
सऊदी अरब और यूएई जैसे नए सदस्य देशों की मौजूदगी से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक खाड़ी देश इंफ्रास्ट्रक्चर ऊर्जा लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में बड़ा पूंजी निवेश करने के इच्छुक हैं। इससे रोजगार और औद्योगिक क्षमता दोनों को बल मिल सकता है। सम्मेलन इन संभावनाओं को आगे बढ़ाने का मंच बन सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बल
ब्रिक्स समूह में रूस सऊदी अरब और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देश शामिल हैं। इनके साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय रणनीतिक संबंध भारत की लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा के लिए फायदेमंद माने जा रहे हैं। आपूर्ति स्थिर रखने और कीमतों के दबाव को संभालने में यह सहयोग काम आ सकता है। वैश्विक अनिश्चितता के दौर में यह पहलू और महत्वपूर्ण हो जाता है।
BRICS Summit 2026: कॉमन करेंसी की फिलहाल संभावना कम
आर्थिक जानकारों का कहना है कि ब्रिक्स की अपनी साझा मुद्रा जल्द लॉन्च होने की संभावना काफी कम है। फिलहाल सदस्य देश अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और डिजिटल भुगतान व्यवस्था मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं। यह व्यावहारिक कदम पहले उठाया जा रहा है। साझा मुद्रा का विषय भविष्य में चर्चा का हिस्सा रह सकता है लेकिन फिलहाल प्राथमिकता व्यापार सुगमता पर है। नई दिल्ली में हो रहा ब्रिक्स सम्मेलन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कई मोर्चों पर अवसर लेकर आया है। नए बाजार निवेश ऊर्जा सुरक्षा और भुगतान व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ सुनील शाह व पंकज जैसवाल सकारात्मक संभावनाएं देखते हैं। अमेरिका पर निर्भरता घटाने और खाड़ी पूंजी आकर्षित करने की दिशा में यह मंच मददगार हो सकता है। साझा मुद्रा भले दूर हो लेकिन स्थानीय मुद्रा और डिजिटल तंत्र पर जोर व्यावहारिक फायदा दे सकता है। सम्मेलन के नतीजे व्यापार और निवेश के वास्तविक कदमों पर निर्भर करेंगे।
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