Homai Vyarawalla: देश की पहली महिला फोटोपत्रकार जिन्होंने कैमरे में कैद किया आजाद भारत का इतिहास
Homai Vyarawalla: होमाई व्यारावाला भारत की पहली महिला फोटोपत्रकार थीं। उन्होंने गांधी नेहरू और आजादी के ऐतिहासिक पलों को अपने लेंस में सहेजा।
Homai Vyarawalla: भारतीय पत्रकारिता के शुरुआती वर्षों में होमाई व्यारावाला का नाम सबसे आगे आता है। वे देश की पहली महिला फोटोपत्रकार मानी जाती हैं। उन्होंने अपने कैमरे से स्वतंत्र भारत के महत्वपूर्ण क्षणों को दुनिया के सामने रखा। उस समय फोटोग्राफी और पत्रकारिता पुरुष प्रधान क्षेत्र थे। फिर भी होमाई ने अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने महात्मा गांधी पंडित जवाहरलाल नेहरू और कई विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की तस्वीरें खींचीं। 1942 में दिल्ली आने के बाद वे साइकिल पर कैमरा लादकर शहर घूमती थीं। उनकी तस्वीरें द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया में छपीं। बाद में उन्होंने डाल्डा 13 नाम से काम किया। 2011 में उन्हें पद्म विभूषण मिला। उनका संग्रह अल्काजी फाउंडेशन में सुरक्षित है। उनकी विरासत आज भी महिला फोटोग्राफरों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।
Homai Vyarawalla: शुरुआती जीवन और फोटोग्राफी से नाता
होमाई व्यारावाला का जन्म 9 दिसंबर 1913 को गुजरात के पारंपरिक परिवार में हुआ। उनके पिता घुमंतू नाटक मंडली में कलाकार थे इसलिए बचपन अलग-अलग शहरों में बीता। बाद में परिवार मुंबई बस गया। वहां उन्होंने जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से पढ़ाई की। कॉलेज में फ्रीलांस फोटोग्राफर मानेकशा व्यारावाला से मुलाकात हुई जो बाद में उनके पति बने। उन्हीं के साथ फोटोग्राफी में रुचि बढ़ी और यह उनका पेशा बन गया।
मुंबई से मिली पहली पहचान
मुंबई की रोजमर्रा की जिंदगी को कैमरे में उतारते हुए होमाई का काम धीरे-धीरे चर्चा में आया। उनकी तस्वीरें प्रतिष्ठित पत्रिका द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुईं। पाठकों ने सराहना की। उस दौर में मुख्यधारा मीडिया में महिला का इतना सक्रिय योगदान बड़ी बात मानी जाती थी। होमाई ने इस क्षेत्र में नई राह खोली और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
डाल्डा 13 के नाम से अलग पहचान
शुरुआत में उनकी तस्वीरें पति के नाम से छपती थीं। बाद में उन्होंने डाल्डा 13 उपनाम अपना लिया। उस समय महिलाओं को पत्रकारिता में गंभीरता से नहीं लिया जाता था। होमाई ने इसी बात का लाभ उठाया। लोग महिला पत्रकार को अनदेखा कर देते थे जिससे उन्हें बिना रुकावट कैंडिड तस्वीरें खींचने की आजादी मिल जाती थी।
दिल्ली में साइकिल पर घूमती निडर फोटोपत्रकार
1942 में होमाई पति के साथ दिल्ली आ गईं। दोनों ने ब्रिटिश इंफॉर्मेशन सर्विस के लिए काम किया। उस समय राजधानी में महिला फोटोपत्रकार बहुत कम थीं। भारी कैमरा पीठ पर लादकर साइकिल से घूमने वाली होमाई जल्द पहचानी जाने लगीं। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और आजादी के बाद के राजनीतिक घटनाक्रम को दस्तावेजी रूप दिया। नेहरू उनके पसंदीदा विषय थे। गांधी के भावुक क्षण इंदिरा गांधी के शुरुआती राजनीतिक जीवन तथा एलिजाबेथ द्वितीय केनेडी चाउ एन लाइ और हो ची मिन्ह की तस्वीरें भी उन्होंने खींचीं।
Homai Vyarawalla: सम्मान और ऐतिहासिक विरासत
होमाई के काम का संग्रह दिल्ली स्थित द अल्काजी फाउंडेशन फॉर द आर्ट्स में रखा गया है। 2010 में नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट मुंबई और अल्काजी फाउंडेशन ने उनके जीवन पर प्रदर्शनी आयोजित की। 2011 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया। होमाई व्यारावाला सिर्फ फोटोपत्रकार नहीं थीं। वे उस बदलाव की गवाह भी थीं जिसने आधुनिक भारत की नींव रखी। पुरुष प्रधान क्षेत्र में उन्होंने अपनी जगह बनाई और आजाद भारत के अहम पलों को हमेशा के लिए सहेज लिया। उनकी विरासत महिला पत्रकारों और फोटोग्राफरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। उस दौर की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने इतिहास को अपने लेंस से दर्ज किया। आज उनकी तस्वीरें देश की स्मृति का अहम हिस्सा मानी जाती हैं।
Read More Here:-
How to Move On: ब्रेकअप के बाद नहीं हो पा रहा मूव ऑन? इन आसान तरीकों से मिलेगी दिल को राहत
Jawa 42 FJ All Stars Launch: Royal Enfield को टक्कर देने आई नई बाइक, जानें कीमत और फीचर्स
Bihar News: बिहार के लालगंज में निर्माणाधीन पुल का लॉन्चर गिरा, 8 मजदूर घायल, 2 की हालत नाजुक