Health Tips: पैरों में बार-बार दर्द और ऐंठन हो तो विटामिन की कमी भी हो सकती है वजह
Health Tips: पैरों में दर्द, ऐंठन या सुन्नपन कभी थकान से होता है, कभी विटामिन डी, कैल्शियम या बी12 की कमी से। जांच के बिना दवा न लें, डॉक्टर से कारण पता करें।
Health Tips: पैरों में दर्द या ऐंठन आम शिकायत है। देर तक खड़े रहना, ज्यादा चलना या एक ही मुद्रा में बैठे रहना अक्सर वजह बनता है। थोड़ा आराम मिलते ही कई बार राहत हो जाती है। लेकिन बिना ज्यादा मेहनत के भी दर्द, खिंचाव, झनझनाहट या सुन्नपन बार-बार आए तो केवल थकान मान लेना गलत हो सकता है। शरीर में कुछ जरूरी विटामिन और मिनरल कम होने पर भी मांसपेशियां और नसें प्रभावित होती हैं। विटामिन डी, कैल्शियम और विटामिन बी12 इसी सूची में आते हैं। हर दर्द की जड़ यही हो, ऐसा तय नहीं। इसलिए अंदाजे से गोली शुरू करना ठीक नहीं। सही कारण जांच से पता चलता है। खाने में विविधता, पानी और हल्की हलचल सहायक हो सकती है। बार-बार परेशानी हो तो चिकित्सक से मिलें।
Health Tips: कब दर्द सामान्य थकान लगता है
लंबी खड़ी ड्यूटी या ज्यादा पैदल चलने के बाद पिंडली और तलवे भारी लगते हैं। कुछ देर लेटने या पैर ऊपर रखने से आराम मिल जाता है। ऐसी स्थिति अक्सर अस्थायी होती है। अगर दर्द रात को सोते समय बार-बार जगाए या सुबह अकड़न बनी रहे तो ध्यान देना चाहिए। एक ही जगह घंटों बैठने से भी रक्त संचार धीमा लगता है। हल्की सैर के बाद फर्क दिखे तो आदत सुधारना काफी हो सकता है।
विटामिन डी कम होने पर क्या महसूस होता है
विटामिन डी हड्डियों और मांसपेशियों के कामकाज से जुड़ा है। कमी होने पर कुछ लोगों को कमजोरी और शरीर के अलग हिस्सों में दर्द रहता है। पैरों में दर्द या थकान भी इससे जुड़ सकती है। धूप सबसे आसान स्रोत मानी जाती है। भोजन और चिकित्सक की सलाह से कमी पूरी की जा सकती है। बिना जांच के विटामिन डी की दवा लेना सही नहीं माना जाता। जरूरत और मात्रा व्यक्ति के अनुसार तय होती है।
कैल्शियम सिर्फ हड्डियों तक सीमित नहीं। मांसपेशियों के संकुचन के लिए भी यह जरूरी है। कमी होने पर पैर में खिंचाव या ऐंठन हो सकती है। खासकर रात के समय पिंडली में अचानक जकड़न कई लोग बताते हैं। दूध, दही, पनीर और तिल जैसे खाद्य पदार्थ आहार में शामिल किए जा सकते हैं। बार-बार ऐंठन हो तो केवल भोजन बदलना काफी नहीं। डॉक्टर से कारण पूछना बेहतर रहता है।
विटामिन बी12 और सुन्नपन का संबंध
विटामिन बी12 नसों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। कमी पर हाथ-पैर में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी आ सकती है। कुछ लोगों को जलन या अजीब दर्द भी लगता है। शाकाहारी आहार या अवशोषण की समस्या से स्तर गिर सकता है, लेकिन स्वयं निदान न करें। बार-बार ऐसे लक्षण हों तो खून की जांच से स्थिति साफ होती है। बिना सलाह बी12 की सुई या गोली शुरू करना उचित नहीं।
हरी सब्जियां, दालें, दूध-दही, पनीर, अंडे, फल और साबुत अनाज संतुलित थाली बनाते हैं। इनसे विटामिन और मिनरल मिलने की संभावना बढ़ती है। दिन भर पर्याप्त पानी पीना मांसपेशियों के लिए जरूरी माना जाता है। कम पानी पर ऐंठन की शिकायत कुछ लोगों में बढ़ जाती है। रोज थोड़ा चलना-फिरना शरीर को सक्रिय रखता है। कोई एक सुपरफूड जादू नहीं करता, नियमित आदत काम करती है।
आराम और हलचल का संतुलन रखें
पूरा दिन कुर्सी पर बैठे रहना भी पैरों को थकाता है। बीच-बीच में खड़े होकर कुछ कदम चलें। सोते समय अचानक ऐंठन हो तो धीरे पैर खींचकर आराम दें। बहुत ठंडा फर्श या तंग जूते भी तकलीफ बढ़ा सकते हैं। व्यायाम नया शुरू करें तो धीरे बढ़ाएं। अत्यधिक थकान के अगले दिन दर्द आम है। लगातार एक तरफा दर्द हो तो नजरअंदाज न करें।
बाजार में विटामिन की गोलियां आसानी से मिलती हैं। लोग दर्द देखते ही सप्लीमेंट शुरू कर देते हैं। जरूरत से ज्यादा मात्रा भी समस्या खड़ी कर सकती है। पैरों का दर्द नस, जोड़, नसों की बीमारी या अन्य कारण से भी होता है। कमी साबित हुए बिना गोली लेना समय बर्बाद कर सकता है। सही जांच के बाद ही इलाज का रास्ता तय होता है।
Health Tips:डॉक्टर के पास कब जाना जरूरी है
कभी-कभार दर्द या ऐंठन आम हो सकती है। बिना वजह बार-बार हो, पैर सुन्न पड़े, कमजोरी आए या चलने में दिक्कत हो तो सलाह लें। दर्द के साथ सूजन, लालिमा या चोट का इतिहास हो तो देर न करें। चिकित्सक लक्षण सुनकर जांच सुझाते हैं। रिपोर्ट आने पर खानपान या दवा का फैसला होता है। आत्म-उपचार से निदान पीछे रह जाता है।
पैरों में दर्द हमेशा अधिक चलने की सजा नहीं होता। कभी आराम से ठीक हो जाता है, कभी विटामिन डी, कैल्शियम या बी12 की कमी संकेत देती है। झनझनाहट और सुन्नपन को हल्के में न लें। संतुलित भोजन, पानी और हल्की हलचल रोजाना सहारा देते हैं। फिर भी बार-बार तकलीफ हो तो जांच करवाएं। बिना परखे सप्लीमेंट शुरू करना ठीक रास्ता नहीं। कारण पता चलने पर राहत स्थायी हो सकती है और बेवजह दवा से बचा जा सकता है।
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