Brij Bhushan Sharan Singh Acquitted: यौन शोषण मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट से बृजभूषण शरण सिंह बरी, उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्या हैं मायने
Brij Bhushan Sharan Singh Acquitted: बृजभूषण शरण सिंह बरी, यूपी की राजनीति पर असर क्या?
Brij Bhushan Sharan Singh Acquitted: भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व प्रमुख और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों की तरफ से लगाए गए यौन शोषण के आरोपों से बड़ी राहत मिल गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस लंबे समय से चले आ रहे चर्चित मामले में बृजभूषण शरण सिंह को सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया है। अदालत के इस फैसले के साथ ही उस कानूनी लड़ाई का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया है जिसने पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश की राजनीति और खेल जगत में भूचाल ला दिया था। इस मामले में उनके साथ एक अन्य आरोपी विनोद तोमर को भी अदालत ने राहत प्रदान की है। फैसले के वक्त अदालत में मौजूद रहे बृजभूषण ने शांत मुद्रा में कहा था कि वे केवल वही सुनेंगे जो अदालत तय करेगी। इस न्यायिक फैसले के बाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति के गलियारों में उनके सियासी रसूख और भविष्य की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
यह पूरा कानूनी विवाद जनवरी 2023 में शुरू हुआ था जब देश के नामी-गिरामी पहलवान जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ गए थे और कुश्ती संघ के तत्कालीन अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए थे। उस समय इस घटना ने देश भर में तूल पकड़ लिया था और खेल जगत के साथ-साथ राजनीतिक दलों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं। दिल्ली पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद जांच का दौर चला और आरोप पत्र दाखिल किए गए। अब अदालत द्वारा निर्दोष करार दिए जाने के बाद इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि, अदालत के फैसले के प्रभाव और उत्तर प्रदेश की सियासत में उनके दबदबे पर नए सिरे से मंथन शुरू हो गया है। आइए जानते हैं कि इस बहुचर्चित मामले की पूरी कानूनी यात्रा कैसी रही और भारतीय राजनीति में उनका कितना बड़ा प्रभाव माना जाता है।
Brij Bhushan Sharan Singh Acquitted: महिला पहलवानों के आरोप और कानूनी लड़ाई की पूरी टाइमलाइन
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत जनवरी 2023 के तीसरे सप्ताह में हुई थी जब विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया समेत कई प्रमुख पहलवान जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ गए थे। पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के कामकाज और तत्कालीन प्रमुख पर पद के दुरुपयोग तथा महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। बढ़ते दबाव के बाद सरकार ने एक जांच समिति का गठन किया और शुरुआती जांच के बाद मामला दिल्ली पुलिस तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने अप्रैल 2023 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की और अपनी जांच आगे बढ़ाई। इसके बाद जून 2023 में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र अदालत में पेश किया था।
शुरुआती दौर में एक नाबालिग पहलवान द्वारा भी आरोप लगाए गए थे जिसके कारण पॉक्सो अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की बात सामने आई थी। हालांकि, बाद में उस नाबालिग खिलाड़ी द्वारा अपनी शिकायत वापस ले ली गई और दिल्ली पुलिस ने उस विशेष हिस्से में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। मई 2025 में अदालत ने उस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए एक बड़े हिस्से में राहत दे दी थी जबकि बाकी मामलों पर सुनवाई लगातार जारी रही थी। अब लंबी कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट ने मुख्य मामलों में भी फैसला सुनाते हुए बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया है। इस तरह लगभग तीन साल तक चली इस कानूनी खींचतान के बाद अदालत ने उन्हें इन सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बृजभूषण शरण सिंह का सियासी रसूख
बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक सफर बेहद लंबा और प्रभावशाली रहा है, जो छह बार लोकसभा सांसद के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में पांच बार भारतीय जनता पार्टी और एक बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर संसद में प्रतिनिधित्व किया है। साल 1991 में उन्होंने पहली बार गोंडा सीट से लोकसभा चुनाव जीता था और उसके बाद से चुनावी मैदान में उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अलग-अलग समय पर उनकी चुनाव लड़ने की सीटें बदलती रहीं, लेकिन उनका चुनावी परिणाम हमेशा उनके और उनके समर्थकों के पक्ष में ही रहा। वर्ष 2008 में संसद में विश्वास मत के दौरान क्रॉस वोटिंग के बाद उन्हें भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थामा था।
साल 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने एक बार फिर से अपनी पुरानी पार्टी यानी भाजपा में वापसी की और लगातार दो बार कैसरगंज सीट से जीत दर्ज की। हालांकि, साल 2024 के आम चुनाव के दौरान उपजे विवादों के कारण पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, लेकिन उनके परिवार का राजनीतिक दखल क्षेत्र में पूरी तरह कायम रहा। उनकी पत्नी केतकी देवी सिंह भी सांसद और जिला पंचायत अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं। उनके बेटे प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर सीट से विधायक हैं जबकि दूसरे बेटे करण भूषण सिंह वर्तमान में कैसरगंज से सांसद हैं। परिवार की यह मजबूत राजनीतिक पकड़ इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्रीय स्तर पर उनका प्रभाव किसी एक चुनाव या पद तक सीमित नहीं है।
Brij Bhushan Sharan Singh Acquitted: गोंडा और आसपास के जिलों में जातिगत समीकरण और मजबूत दबदबा
पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बृजभूषण शरण सिंह का प्रभाव केवल राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में भी उनकी गहरी पैठ है। गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती और कैसरगंज जैसी लोकसभा सीटों के आसपास के इलाकों में टिकट वितरण से लेकर स्थानीय समीकरणों को तय करने में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। वे क्षत्रिय समाज से ताल्लुक रखते हैं और उस वर्ग के बीच उनका जनाधार काफी मजबूत माना जाता है, जो चुनाव के वक्त निर्णायक साबित होता है। इस पूरे क्षेत्र में उनके समर्थकों की संख्या और उनका संगठनात्मक कौशल उन्हें एक कद्दावर नेता के रूप में स्थापित करता है।
स्थानीय स्तर पर उन्हें चाहने वाले लोग अक्सर उन्हें एक दबंग और मददगार नेता के रूप में देखते हैं जो हर परिस्थिति में अपने लोगों के साथ खड़े रहते हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस क्षेत्र में उनकी स्वीकार्यता विभिन्न दलों के समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। अदालतों से राहत मिलने के बाद अब उनके राजनीतिक जीवन में एक नया अध्याय शुरू होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। उनके विरोधी भले ही उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हों, लेकिन जमीन पर उनकी पकड़ को नकारा नहीं जा सकता है। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी सक्रियता किस रूप में सामने आती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
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