Manisha Nehra UPSC Success Story: राजस्थान के छोटे गांव की बेटी बनी हरियाणा की IPS बहू, छठे प्रयास में मनीषा नेहरा ने पाई यूपीएससी में सफलता

Manisha Nehra UPSC Success Story: राजस्थान के छोटे गांव की बेटी बनी हरियाणा की IPS बहू, छठे प्रयास में मनीषा नेहरा ने पाई यूपीएससी में सफलता

0

Manisha Nehra UPSC Success Story: संघर्ष और धैर्य की मिसाल बनी आईपीएस अधिकारी मनीषा नेहरा एक बार फिर चर्चा में हैं, मगर इस बार वजह उनकी यूपीएससी सफलता नहीं बल्कि उनका कैडर ट्रांसफर है। मनीषा नेहरा का तबादला तेलंगाना कैडर से हरियाणा कैडर में कर दिया गया है, और इसकी वजह उनकी शादी है। 2024 बैच की इस आईपीएस अधिकारी ने भारतीय वन सेवा यानी आईएफएस अधिकारी गौरव को अपना जीवनसाथी बनाया था, जिसके बाद उन्होंने मैरिज ग्राउंड के आधार पर अपना कैडर बदलने का अनुरोध किया था। गृह मंत्रालय ने 14 सितंबर 2026 को उनके इस अनुरोध को मंजूरी दे दी, जिसके बाद अब मनीषा हरियाणा कैडर में अपनी सेवाएं देंगी। राजस्थान के एक छोटे से गांव से निकलकर आईपीएस अधिकारी बनने तक का उनका सफर आसान नहीं रहा, और उनकी यह कहानी आज भी हजारों यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनी हुई है।

Manisha Nehra UPSC Success Story: राजस्थान के छोटे से गांव से निकलकर तय किया बड़ा सफर

मनीषा नेहरा मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनू जिले की खेतड़ी तहसील में स्थित तारा का बास गांव की रहने वाली हैं। एक सामान्य परिवार में जन्मी मनीषा के लिए आईपीएस बनने का सफर आसान नहीं था, फिर भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी। छोटे से गांव से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा तक का सफर तय करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। उनकी यह यात्रा उन तमाम युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का हौसला रखते हैं।

छह बार असफल होने के बाद भी नहीं मानी हार

मनीषा की सबसे प्रेरणादायक बात यह रही कि उन्होंने आईपीएस बनने का सपना पूरा करने के लिए यूपीएससी परीक्षा में छह बार प्रयास किया। हर असफलता के बाद कई उम्मीदवार हिम्मत हार जाते हैं, लेकिन मनीषा ने हर बार खुद को दोबारा तैयार किया और मेहनत जारी रखी। आखिरकार उनकी यह लगन रंग लाई और उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा 2023 में ऑल इंडिया 586वीं रैंक हासिल कर अपना सपना साकार किया। यह सफलता सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर संघर्ष और आत्मविश्वास का जीता-जागता उदाहरण मानी जाती है।

दिल्ली में एक साल कोचिंग, फिर घर पर की तीन साल तैयारी

मनीषा नेहरा की तैयारी का तरीका भी काफी दिलचस्प रहा। उन्होंने शुरुआत में दिल्ली के एक निजी कोचिंग सेंटर से करीब एक वर्ष तक मार्गदर्शन लिया, लेकिन इसके बाद उन्होंने घर पर रहकर ही आगे की तैयारी करने का फैसला किया। अगले तीन वर्षों तक उन्होंने पूरी लगन और मेहनत के साथ घर पर रहकर पढ़ाई जारी रखी। बिना किसी बड़े संस्थागत सहारे के घर पर रहकर तैयारी करना और फिर सफलता हासिल करना, यह दिखाता है कि सही रणनीति और आत्मानुशासन से कैसे भी हालात में मंजिल तक पहुंचा जा सकता है।

डिफेंस बैकग्राउंड से मिली अनुशासन की सीख

मनीषा का जन्म 8 जनवरी 1997 को हुआ था और उनका पारिवारिक पृष्ठभूमि डिफेंस से जुड़ी रही है। उनके दादा रामसिंह नेहरा भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर तैनात रहे, जबकि उनके पिता कृपाल सिंह नेहरा वायु सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में प्रबंधक के तौर पर कार्यरत रहे। इस तरह के अनुशासित पारिवारिक माहौल का सीधा असर मनीषा की जीवनशैली पर भी पड़ा। धैर्य के साथ हर मुश्किल परिस्थिति का डटकर सामना करना उन्होंने अपने परिवार से ही सीखा, जो आगे चलकर उनकी यूपीएससी यात्रा में बेहद काम आया।

शादी के बाद पति के करीब आने के लिए मांगा कैडर ट्रांसफर

मनीषा के पति गौरव हरियाणा से ताल्लुक रखते हैं और भारतीय वन सेवा यानी आईएफएस के 2024 बैच के अधिकारी हैं। शादी के बाद मनीषा ने अपने पति के करीब रहने के लिए तेलंगाना कैडर से हरियाणा कैडर में ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था। इस ट्रांसफर के मंजूर होने से तेलंगाना और हरियाणा के बीच की करीब 1500 किलोमीटर की दूरी खत्म हो जाएगी। खास बात यह भी है कि मनीषा का गृह राज्य राजस्थान भी हरियाणा से सटा हुआ है, जिससे उन्हें आने-जाने में भी काफी सहूलियत मिलेगी।

क्या होता है मैरिज ग्राउंड ट्रांसफर का नियम

अखिल भारतीय सेवा यानी AIS के अधिकारियों, जैसे आईएएस और आईपीएस के लिए मैरिज ग्राउंड ट्रांसफर एक खास प्रावधान है, जिसके तहत पति-पत्नी दोनों को एक ही कैडर या राज्य में सेवा देने की अनुमति दी जाती है। यह नियम कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग यानी डीओपीटी के दिशा-निर्देशों के तहत संचालित होता है। यह सुविधा तभी मिलती है जब पति और पत्नी दोनों आईएएस, आईपीएस या आईएफओएस जैसी अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी हों। पहले यह प्रयास किया जाता है कि किसी एक अधिकारी का कैडर उसके जीवनसाथी के कैडर को स्वीकार कर ले, और अगर दोनों राज्यों की सहमति नहीं बनती, तो केंद्र सरकार आपसी सहमति से किसी तीसरे कैडर में ट्रांसफर पर भी विचार कर सकती है।

हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बनी मनीषा की कहानी

मनीषा नेहरा की कहानी सिर्फ एक सफल कैडर ट्रांसफर की खबर नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं के लिए एक संदेश है जो शुरुआती असफलताओं से घबराकर अपने सपनों को बीच में ही छोड़ देते हैं। एक छोटे गांव से निकलकर, सीमित संसाधनों के बावजूद, छह बार की असफलता को पीछे छोड़कर सफलता हासिल करना आसान नहीं होता। मनीषा की यह यात्रा साबित करती है कि अगर लक्ष्य के प्रति ईमानदारी और निरंतरता बनी रहे, तो देर से ही सही, सफलता जरूर मिलती है।

राजस्थान के एक छोटे से गांव से निकलकर आईपीएस अधिकारी बनने तक मनीषा नेहरा का सफर संघर्ष, धैर्य और निरंतर मेहनत की एक प्रेरक मिसाल है। छह बार की असफलता के बावजूद हार न मानते हुए उन्होंने अपने सपने को साकार किया और अब शादी के आधार पर उनका कैडर तेलंगाना से हरियाणा में बदल दिया गया है। इस फैसले से जहां उन्हें अपने पति के करीब रहने का मौका मिलेगा, वहीं उनकी कहानी उन तमाम युवाओं के लिए भी एक सीख है जो मुश्किलों के आगे हार मान लेते हैं। मनीषा नेहरा की यह यात्रा दिखाती है कि सही दिशा में की गई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।

Read More Here:-

EPS Pension Calculation: 20 साल की नौकरी के बाद कितनी मिलेगी पेंशन? ₹25,000 वेतन सीमा और 2 साल बोनस से समझें पूरा हिसाब

PM Kisan Maandhan Yojana: 60 की उम्र के बाद हर महीने ₹3,000 पेंशन, जानें कौन उठा सकता है लाभ

Bengal Politics: बंगाल की सियासत में भूचाल, दो फूल अब इतिहास, टीएमसी के दोनों गुटों को मिला नया चुनाव चिन्ह और पहचान

IndiGo ने बढ़ाए कई चार्ज, शेयर बाजार में दिखा जोरदार उछाल, जानें पूरी डिटेल

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.