Nandigram Bypoll: नंदीग्राम में ममता गुट को बड़ा झटका, आशीर्वाद लेने गईं उम्मीदवार ने अचानक लिया नामांकन वापस
Nandigram Bypoll से पहले ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद नामांकन वापस लिया। जानें पूरा सियासी घटनाक्रम।
Nandigram Bypoll: पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल सीटों में शुमार नंदीग्राम में उपचुनाव से ठीक पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ यानी कालीघाट-तृणमूल की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से अचानक मुलाकात करने के कुछ ही घंटों के भीतर अपना नामांकन वापस लेकर सभी को चौंका दिया। यह घटनाक्रम नामांकन वापसी की आखिरी तारीख से ठीक पहले सामने आया, जिसने नंदीग्राम में ममता बनर्जी के गुट को सबसे बड़ा राजनीतिक झटका दे दिया है। संचिता प्रधान डे अपने पति के साथ राज्य के प्रशासनिक मुख्यालय नबन्ना पहुंची थीं, जहां उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से हुई। इस मुलाकात के तुरंत बाद उनके नामांकन वापस लेने की खबर ने पूरे राज्य की सियासत में हलचल मचा दी। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम के गहरे मायने निकाले जा रहे हैं, खासकर तब जब पार्टी पहले ही नाम और सिंबल विवाद से जूझ रही है।
Nandigram Bypoll: नबन्ना में हुई मुलाकात ने बदला सियासी समीकरण
संचिता प्रधान डे अपने पति के साथ राज्य प्रशासनिक मुख्यालय नबन्ना पहुंचीं, जहां उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से हुई। यह मुलाकात नंदीग्राम उपचुनाव के ठीक पहले हुई, जिससे इसके सियासी मायने निकलना स्वाभाविक था। मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद संचिता ने नंदीग्राम सीट से अपना नामांकन वापस लेने का फैसला कर लिया, जिसने पूरे राजनीतिक हलके में हलचल मचा दी। इतनी जल्दी लिया गया यह फैसला अपने आप में कई सवाल खड़े करता है, जिनके जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं।
‘सिर्फ आशीर्वाद लेने गई थी’, संचिता का सफाई भरा जवाब
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद जब मीडिया ने संचिता प्रधान डे से इस बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बेहद सहज अंदाज में जवाब दिया कि वह केवल मुख्यमंत्री से आशीर्वाद लेने गई थीं। हालांकि उनके इस जवाब के बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात के सियासी संकेत निकाले जाने लगे। किसी विपक्षी नेता से चुनाव से ठीक पहले मुलाकात करना और फिर कुछ ही घंटों में नामांकन वापस ले लेना, यह महज संयोग मानना राजनीतिक विश्लेषकों को आसान नहीं लग रहा।
शुभेंदु अधिकारी के पुराने बयान ने बढ़ाई चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम से पहले शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करते हुए एक रहस्यमयी अंदाज में बयान दिया था कि आगे देखते जाइए क्या-क्या होता है। उस वक्त इस बयान को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया गया था, लेकिन संचिता के नामांकन वापस लेने के बाद अब यह बयान एक अलग नजरिए से देखा जा रहा है। कई लोगों का मानना है कि यह बयान पहले से चल रही किसी सियासी रणनीति का हिस्सा था, जिसका खुलासा अब सामने आ रहा है।
पार्टी के नाम और सिंबल विवाद के बाद यह नया झटका
ममता बनर्जी के लिए यह हफ्ता राजनीतिक रूप से बेहद कठिन साबित हुआ है। चुनाव आयोग ने हाल ही में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के ऐतिहासिक ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया था। इसके बाद आयोग ने ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ यानी कालीघाट तृणमूल नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया। वहीं दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले बागी धड़े को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ सिंबल दिया गया। पार्टी अभी नए नाम और सिंबल को लेकर स्थिति संभाल ही रही थी कि नंदीग्राम की उम्मीदवार के इस फैसले ने एक और बड़ा झटका दे दिया।
नंदीग्राम में अब ममता गुट का कोई अधिकृत चेहरा नहीं
संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने के बाद अब नंदीग्राम सीट पर ममता-तृणमूल गुट की तरफ से कोई अधिकृत उम्मीदवार मैदान में नहीं बचा है। इस सीट पर अब भाजपा उम्मीदवार के तौर पर दिवंगत भाजपा नेता की मां हसीरानी रथ चुनावी मैदान में हैं, जिनके खिलाफ ममता गुट का कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं है। यह स्थिति नंदीग्राम जैसी प्रतिष्ठा वाली सीट पर ममता गुट के लिए बेहद असहज मानी जा रही है, क्योंकि यह सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में हमेशा से बेहद संवेदनशील और चर्चित रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय, करियर का सबसे कठिन दौर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर में से एक साबित हो रहा है। पहले पार्टी के भीतर विभाजन हुआ, फिर 28 साल पुराना ‘जोड़ाफूल’ चिह्न और मूल पार्टी का नाम हाथ से निकल गया, और अब नंदीग्राम जैसी अहम सीट पर अपनी ही उम्मीदवार का मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पाले में चले जाना, इन तमाम घटनाओं ने मिलकर पार्टी की स्थिति को कमजोर किया है। विश्लेषकों के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम आने वाले समय में पार्टी की रणनीति और मनोबल दोनों पर असर डाल सकता है।
आगे क्या होगा, इस पर टिकी हैं सबकी नजरें
नामांकन वापसी की आखिरी तारीख नजदीक होने के कारण अब ममता गुट के पास नंदीग्राम सीट पर किसी नए उम्मीदवार को उतारने का विकल्प भी सीमित नजर आ रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस स्थिति से किस तरह निपटती है और आगे की रणनीति क्या तय करती है। नंदीग्राम की जनता के बीच भी इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं, क्योंकि यह सीट हमेशा से राज्य की राजनीति में खास अहमियत रखती आई है।
नंदीग्राम उपचुनाव से ठीक पहले सामने आया यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े उलटफेर के तौर पर देखा जा रहा है। संचिता प्रधान डे का मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के तुरंत बाद नामांकन वापस लेना, ममता गुट के लिए एक और झटका साबित हुआ है। पार्टी पहले से ही नाम और सिंबल को लेकर विवादों में घिरी हुई थी, और अब नंदीग्राम में अधिकृत उम्मीदवार का न होना स्थिति को और जटिल बना रहा है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम के और पहलू सामने आने की उम्मीद है, जो पश्चिम बंगाल की सियासत की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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