Surendra Koli: निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की खुदकुशी, मंदिर के सामने चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला शव
Surendra Koli: निठारी कांड में बरी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में फांसी लगाई, पारिवारिक क्लेश बनी वजह, पढ़ें पूरी खबर।
Surendra Koli: देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में गिने जाने वाले निठारी कांड से जुड़ा एक नाम एक बार फिर सुर्खियों में है, मगर इस बार वजह कोई नई गिरफ्तारी नहीं बल्कि खुद उस आरोपी की मौत है। सुरेंद्र कोली, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड के सभी मामलों में बरी कर दिया था, हरिद्वार में संदिग्ध हालात में फंदे से लटका मिला। घटना हरिद्वार के उत्तरी क्षेत्र भूपतवाला इलाके की है, जहां वह लालमाता मंदिर के सामने अपनी चाय की दुकान के भीतर फांसी पर लटका पाया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि उसने यह दुकान महज तीन दिन पहले ही शुरू की थी। शुरुआती जांच में पुलिस पारिवारिक क्लेश को आत्महत्या की वजह मान रही है, हालांकि मौत के असली कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच अभी जारी है। इस घटना ने एक बार फिर निठारी कांड की पुरानी कहानी को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
Surendra Koli: भूपतवाला इलाके में मंदिर के सामने मिली दुकान में हुई घटना
पुलिस के मुताबिक, आज सुबह हरिद्वार शहर कोतवाली क्षेत्र की सप्त ऋषि पुलिस चौकी को सूचना मिली कि सप्त सरोवर रोड स्थित लालमाता मंदिर के सामने चाय की दुकान में एक व्यक्ति फंदे से लटका मिला है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू कर दी। जांच में पता चला कि मृतक कोई और नहीं बल्कि सुरेंद्र कोली था, जो निठारी हत्याकांड में वर्षों तक आरोपी रहा था। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने के साथ-साथ पुलिस ने आसपास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की है, ताकि घटना से जुड़ी हर जानकारी जुटाई जा सके।
तीन दिन पहले ही खोली थी चाय की दुकान, पहले करता था सुरक्षा गार्ड की नौकरी
जानकारी के अनुसार सुरेंद्र कोली मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र स्थित मंगरुखाल गांव का रहने वाला था और पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रहकर अपना गुजर-बसर कर रहा था। हरिद्वार पुलिस अधिकारी कुंदन सिंह राणा के अनुसार, चाय का खोखा किराए पर लेने से पहले वह एक सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करता था। महज तीन दिन पहले ही उसने यह चाय की दुकान शुरू की थी, ताकि रोजी-रोटी का कोई स्थायी जरिया बन सके। हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और नई शुरुआत के चंद दिनों बाद ही उसने अपनी जिंदगी खत्म कर ली।
पारिवारिक क्लेश को माना जा रहा आत्महत्या का प्रमुख कारण
पुलिस की प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की सबसे संभावित वजह पारिवारिक क्लेश को बताया जा रहा है। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि यह अभी शुरुआती अनुमान है और वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी। घटनास्थल से किसी तरह का सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिसकी वजह से मामला और भी उलझा हुआ नजर आ रहा है। पुलिस अधिकारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि अल्मोड़ा स्थित उसके परिवार को घटना की सूचना दे दी गई है और मौत के कारणों की जांच जारी है।
2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था बरी करने का फैसला
सुरेंद्र कोली का नाम निठारी कांड से जुड़ने के बाद वर्षों तक कानूनी लड़ाई चलती रही। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुरुआत में उसे फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन साल 2015 में अदालत ने उसकी सजा में राहत देते हुए उम्रकैद में तब्दील कर दिया। इसके बाद लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उसे निठारी कांड के सभी मामलों में पूरी तरह निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया। इस फैसले के बाद वह वर्षों की कैद से बाहर आया और नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश में जुट गया था।
दिसंबर 2006 में सामने आया था नोएडा का चर्चित निठारी कांड
निठारी कांड की जड़ें साल 2006 में जाकर मिलती हैं, जब नोएडा के सेक्टर-31 स्थित कुख्यात डी-5 कोठी से कई बच्चों के अवशेष बरामद हुए थे। इस सनसनीखेज घटना ने सिर्फ दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। पुलिस ने इस कोठी के मालिक मनेंद्र सिंह पंढेर और वहां नौकर के तौर पर काम करने वाले सुरेंद्र कोली, दोनों को गिरफ्तार किया था। सुरेंद्र कोली पर हत्या, दुष्कर्म और अमानवीय कृत्यों से जुड़े कुल 16 गंभीर मामले दर्ज हुए थे, जिनमें अदालत ने शुरुआत में उसे मौत की सजा तक सुना दी थी। बाद में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों में उसे निर्दोष मानते हुए रिहा कर दिया। गौरतलब है कि इस मामले के मुख्य आरोपी माने जाने वाले पंढेर को भी पहले ही सभी मामलों से बरी किया जा चुका था।
नई शुरुआत के बीच अचानक हुई मौत ने खड़े किए कई सवाल
सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली सामान्य जीवन जीने की कोशिश में जुटा था। सुरक्षा गार्ड की नौकरी छोड़कर चाय की दुकान शुरू करना उसकी इसी कोशिश का हिस्सा माना जा रहा था। मगर नई शुरुआत के महज तीन दिन के भीतर ही उसकी मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या पारिवारिक तनाव इतना गहरा था कि उसने यह कदम उठाया, या इसके पीछे कोई और वजह भी थी, इसका जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा। स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है, क्योंकि निठारी कांड से जुड़ा नाम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
Surendra Koli: आगे की जांच पर टिकी हैं निगाहें
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए हर पहलू की पड़ताल कर रही है। परिवार के बयान, आसपास के लोगों की जानकारी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही यह साफ हो पाएगा कि आखिर सुरेंद्र कोली को यह आखिरी कदम उठाने पर किन हालातों ने मजबूर किया। चूंकि यह मामला देश के सबसे विवादित आपराधिक केसों में से एक आरोपी से जुड़ा है, इसलिए पुलिस भी जांच को पूरी सतर्कता के साथ आगे बढ़ा रही है।
निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में हुई मौत ने एक बार फिर इस पुराने और सनसनीखेज मामले को चर्चा में ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद नई शुरुआत की उम्मीद में चाय की दुकान खोलने वाले कोली की महज तीन दिन बाद ही फंदे से लटकी हालत में मिली लाश ने कई सवाल छोड़ दिए हैं। पारिवारिक क्लेश को शुरुआती वजह माना जा रहा है, लेकिन सुसाइड नोट न मिलने से मामला अधूरा नजर आता है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर इस मौत के पीछे की असली सच्चाई क्या है।
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