National Highway deaths: कोविड के बाद पहली बार नेशनल हाईवे पर मौतों में गिरावट, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब में बड़ा सुधार
राष्ट्रीय राजमार्गों पर मौतें 4.1% घटीं, यूपी, एमपी और पंजाब ने दर्ज किया सबसे बड़ा सुधार
National Highway deaths: भारत में कोविड-19 महामारी के बाद पहली बार राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर होने वाली दुर्घटना जनित मौतों के आंकड़ों में राहत देने वाली गिरावट दर्ज की गई है। लोकसभा में प्रस्तुत किए गए आधिकारिक केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के डेटा के अनुसार, वर्ष 2024 में नेशनल हाईवे पर हुई 64,772 मौतों की तुलना में वर्ष 2025 में यह आंकड़ा घटकर 62,122 रह गया है [cite: सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक्सप्रेसवे सहित राष्ट्रीय राजमार्गों पर मौतों की संख्या दो हजार चौबीस में चौंसठ हजार सात सौ बहत्तर से घटकर दो हजार पच्चीस में बासठ हजार एक सौ बाईस रह गई।]। यह 4.1 प्रतिशत की सीधी गिरावट को दर्शाता है। हालाँकि, देश में कुल सड़क दुर्घटनाओं के चलते होने वाली कुल मौतों का आंकड़ा बढ़ा है, लेकिन देश के संपूर्ण सड़क नेटवर्क का एक छोटा सा हिस्सा होने के बावजूद अत्यधिक ट्रैफिक का दबाव सहने वाले नेशनल हाईवे पर यह सुधार भारत के सड़क सुरक्षा अभियान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब में सबसे बड़ा सुधारात्मक बदलाव
राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लाने के मामले में देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सराहनीय प्रदर्शन किया है, जिनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब शीर्ष पर रहे हैं [cite: बीस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एनएच पर मौतों में कमी आई… एनएच पर मौतों में सबसे बड़ी गिरावट उत्तर प्रदेश में देखी गई।]। आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024 में हाईवे पर हुई 9,560 मौतों का आंकड़ा 2025 में गिरकर 7,573 पर आ गया, जो राज्य में चलाए गए आक्रामक लेन-डिसिप्लिन और ऑटोमेटेड ट्रैफिक एनफोर्समेंट का नतीजा है। इसी प्रकार मध्य प्रदेश में मौतों की संख्या 4,644 से घटकर 3,610 तथा पंजाब में 1,562 से घटकर 1,022 दर्ज की गई [cite: मध्य प्रदेश में भी उल्लेखनीय कमी आई जहां आंकड़ा चार हजार छह सौ चौवालीस से घटकर तीन हजार छह सौ दस हो गया। पंजाब में भी सुधार दर्ज किया गया और मौतें एक हजार पांच सौ बासठ से घटकर एक हजार बाईस रह गईं।]। विशेषज्ञों के अनुसार इन राज्यों में ब्लैक स्पॉट्स (Black Spots) के सुधार, स्पीड कैमरों के इस्तेमाल, एनएचएआई (NHAI) की गश्ती टीमों की वृद्धि और त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सेवा व्यवस्था ने जान-माल के नुकसान को रोकने में सीधी भूमिका निभाई है।
कुछ राज्यों में चिंताजनक स्थिति और कुल सड़क हादसों का विरोधाभास
एक तरफ जहाँ उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने बड़ा सुधार दिखाया है, वहीं तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे 15 राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर मौतों का ग्राफ ऊपर बढ़ा है। इसके अलावा, नेशनल हाईवे पर मौतों में 4.1 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद देश में राज्य राजमार्गों (State Highways) और जिला/शहरी सड़कों पर कुल हादसों में हुई मौतों में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। यह विरोधाभास यह स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार और एनएचएआई का ध्यान जहाँ राष्ट्रीय राजमार्गों को सुरक्षित बनाने पर केंद्रित रहा है, वहीं राज्यों की अपनी आंतरिक सड़कों पर सुरक्षा नियम-कायदों के क्रियान्वयन में अभी भी बड़ी ढिलाई बनी हुई है।
National Highway deaths: ई-डीएआर पोर्टल, तकनीकी प्रवर्तन और भावी नीतियां
महामारी के समय लगे लॉकडाउन के दौरान हाईवे हादसों में अस्थायी गिरावट आई थी, लेकिन उसके बाद सामान्य हुए वर्षों में यह पहला मौका है जब महामारी-पूर्व और महामारी-उत्तर वृद्धि दर को तोड़ते हुए आंकड़े नीचे आए हैं। सरकार द्वारा ई-डीएआर (e-DAR – e-Detailed Accident Report) पोर्टल के माध्यम से जुटाए जा रहे रियल-टाइम डेटा, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, ई-चालान और हाईवे इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) ने प्रवर्तन एजेंसियों को बेहद सक्षम बनाया है। फिर भी, ओवरस्पीडिंग, दोपहिया वाहन चालकों का हेलमेट न पहनना, शराब पीकर गाड़ी चलाना और थकान जैसी मानवीय भूलें अब भी हर साल साठ हजार से अधिक हाईवे मौतों का कारण बन रही हैं।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय राजमार्गों पर मौतों में 4.1 प्रतिशत की कमी इस बात (National Highway deaths) का प्रमाण है कि सही बुनियादी ढांचा, सख्त प्रवर्तन और आधुनिक तकनीक के संयोजन से भारत की सड़कों पर कीमती जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। हालाँकि, राज्य सरकारों को अपने प्रांतीय और ग्रामीण सड़क नेटवर्क पर भी यही तत्परता दिखानी होगी। जब तक राष्ट्रीय राजमार्गों की तर्ज पर राज्य स्तरीय सड़कों पर भी ब्लैक स्पॉट्स का निवारण और गति नियंत्रण लागू नहीं किया जाता, तब तक संपूर्ण भारत को सड़क हादसों के इस भयावह दंश से पूरी तरह मुक्त कर पाना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।
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