Breastfeeding Benefits For Baby: नवजात शिशु के लिए क्यों जरूरी है केवल मां का दूध, जानें स्तनपान से जुड़े जरूरी नियम और मिथक

 Breastfeeding Benefits For Baby: नवजात के लिए केवल मां का दूध क्यों जरूरी है? जानें स्तनपान के फायदे, सही नियम और इससे जुड़े आम मिथकों की सच्चाई।

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 Breastfeeding Benefits For Baby: नवजात शिशु के जन्म के बाद उसकी बेहतर सेहत और पोषण को लेकर हर माता-पिता के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं, जिनमें सबसे अहम मुद्दा स्तनपान का होता है। हर साल अगस्त महीने के शुरुआती सप्ताह में ‘वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक’ मनाया जाता है जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में स्तनपान के प्रति जागरूकता फैलाना और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। आज भी हमारे समाज में नई माताओं को दादी-नानी के जमाने की पुरानी बातों और अनसुलझे मिथकों के आधार पर सलाह दी जाती है, जो कई बार बच्चे और मां दोनों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शिशु के जन्म के बाद शुरुआती छह महीने तक केवल मां का दूध ही उसका संपूर्ण आहार होता है। इस अवधि के दौरान बच्चे को पानी या किसी अन्य बाहरी चीज की एक बूंद भी देने की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि मां का दूध ही उसकी सभी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी होता है।

शिशु के साथ मां का भावनात्मक जुड़ाव और उसकी शारीरिक सेहत का ख्याल रखना इस पूरी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कामकाजी महिलाओं के लिए भी अब तकनीक और आधुनिक तरीकों के जरिए स्तनपान से जुड़ी कई सहूलियतें उपलब्ध कराई जा रही हैं ताकि वे अपने काम के साथ-साथ बच्चे की सेहत का भी पूरा ध्यान रख सकें। इस विशेष सप्ताह के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया जाता है कि स्तनपान केवल बच्चे का पेट भरने का जरिया नहीं है, बल्कि यह उसके भविष्य के मजबूत स्वास्थ्य की नींव भी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि स्तनपान से जुड़े वे कौन-से जरूरी नियम हैं जिनका पालन हर नई मां को अपनी और अपने बच्चे की भलाई के लिए जरूर करना चाहिए।

 Breastfeeding Benefits For Baby: नवजात शिशु के लिए पहला पीला गाढ़ा दूध क्यों है अमृत समान

शिशु के जन्म के तुरंत बाद यानी पहले घंटे के भीतर ही मां का दूध मिलना उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम होता है। प्रसव के बाद आने वाला पहला गाढ़ा पीला दूध जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है, किसी वरदान से कम नहीं माना जाता है। इस पहले दूध को शिशु का प्राकृतिक टीका भी कहा जाता है क्योंकि यह एंटीबॉडी और आवश्यक पोषक तत्वों से पूरी तरह भरपूर होता है। कई पुरानी मान्यताओं के चलते लोग इस पहले दूध को बेकार समझकर फेंक देते हैं, जो कि वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह गलत और बच्चे की सेहत के लिए नुकसानदायक है।

यह गाढ़ा दूध बच्चे के नाजुक पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और उसे शुरुआती संक्रमणों से लड़ने की जबरदस्त ताकत प्रदान करता है। इसलिए परंपरा या अंधविश्वासों के चक्कर में पड़कर इस अनमोल आहार को बच्चे से दूर नहीं करना चाहिए। डॉक्टर भी इस बात पर जोर देते हैं कि जन्म के साथ ही बच्चे को मां का पहला दूध जरूर मिलना चाहिए ताकि उसका शारीरिक विकास सही दिशा में आगे बढ़ सके। यह प्रारंभिक पोषण बच्चे के जीवन भर के स्वास्थ्य की मजबूत नींव साबित होता है।

शुरुआती छह महीनों तक सिर्फ मां का दूध ही है पर्याप्त

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे के जन्म से लेकर शुरुआती छह महीने तक उसे केवल और केवल मां का दूध ही पिलाना चाहिए। इस समयावधि में बच्चे को पानी, शहद, घुट्टी, ग्लूकोज या किसी भी प्रकार के डिब्बाबंद दूध का सेवन कराने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। कई बार परिवार के बुजुर्ग पानी पिलाने की सलाह देते हैं, लेकिन मां के दूध में ही पानी की पर्याप्त मात्रा होती है जो बच्चे की प्यास और भूख दोनों को शांत करती है। छह महीने तक का यह अनन्य स्तनपान बच्चे के बौद्धिक और शारीरिक विकास को तीव्र गति प्रदान करता है।

यदि इस दौरान बच्चे को बाहरी चीजें दी जाती हैं, तो उसके पेट में संक्रमण होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि उसका पाचन तंत्र अभी बहुत कमजोर होता है। केवल मां का दूध पीने से शिशु को सभी जरूरी विटामिन्स, मिनरल्स और ऊर्जा मिलती है जो उसकी इम्युनिटी को सुदृढ़ करती है। इसलिए माताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे कम से कम छह महीने तक अपने बच्चे को बाहरी खानपान से पूरी तरह दूर रखें। यह अनुशासन बच्चे को भविष्य में होने वाली कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखता है।

दो साल या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने के लाभ

जब बच्चा छह महीने का हो जाता है, तब उसके पोषण के लिए ऊपरी आहार यानी ठोस चीजें शुरू की जा सकती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि स्तनपान बंद कर देना चाहिए। डॉक्टरों का सुझाव है कि बच्चे के छह महीने पूरे होने के बाद भी ठोस आहार के साथ-साथ दो साल या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखा जाना चाहिए। यह आदत बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में लगातार सकारात्मक सहयोग देती है। मां के दूध से मिलने वाले पोषक तत्व बच्चे के विकास के शुरुआती दौर में बहुत बड़ा संबल बनते हैं।

इसके अलावा स्तनपान कराने से न केवल बच्चे को बल्कि मां के स्वास्थ्य को भी अनगिनत फायदे मिलते हैं। नियमित रूप से स्तनपान कराने वाली महिलाओं में ओवरी कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, टाइप-2 डायबिटीज और पोस्टपार्टम डिप्रेशन का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। कामकाजी महिलाएं भी अपने दूध को साफर्तित बर्तनों में सुरक्षित रूप से स्टोर करके रख सकती हैं ताकि उनके पीछे से भी बच्चे को सही समय पर पोषण मिल सके। बस इसके लिए साफ-सफाई, उचित तापमान और सही समय के प्रबंधन का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।

 Breastfeeding Benefits For Baby: स्तनपान के सफर में मानसिक सपोर्ट और सामाजिक जागरूकता की जरूरत

एक नई मां के लिए स्तनपान का यह पूरा सफर कई बार शारीरिक और मानसिक थकान भरा हो सकता है, ऐसे में परिवार का सहयोग सबसे ज्यादा मायने रखता है। यदि किसी महिला को स्तनपान से जुड़ी कोई भी तकनीकी या शारीरिक समस्या आती है, तो उसे झिझकने के बजाय डॉक्टर, आशा कार्यकर्ताओं या आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से मदद लेनी चाहिए। समाज में व्याप्त भ्रामक बातों को दरकिनार करके वैज्ञानिक और चिकित्सकीय सलाह पर भरोसा करना ही बुद्धिमानी है। सही मार्गदर्शन मिलने से मां का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह बिना किसी तनाव के अपने बच्चे की परवरिश कर पाती है।

सरकार और स्वास्थ्य संगठनों द्वारा भी समय-समय पर अभियान चलाकर महिलाओं को स्तनपान के प्रति जागरूक किया जाता है ताकि मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। सार्वजनिक स्थानों पर स्तनपान को लेकर सामाजिक सोच में बदलाव आ रहा है, जो एक सकारात्मक संकेत है। एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए यह बेहद जरूरी है कि हर मां को सुरक्षित और तनावमुक्त वातावरण मिले ताकि वह अपने नवजात को बेहतरीन परवरिश दे सके। जागरूकता की यह रोशनी हर घर तक पहुंचनी चाहिए ताकि कोई भी बच्चा उचित पोषण से वंचित न रहे।

वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक के माध्यम से यह संदेश घर-घर तक पहुंचाया जाता है कि स्तनपान किसी भी शिशु के जीवन का सबसे पहला और सबसे मजबूत अधिकार है। शुरुआती छह महीनों तक केवल मां का दूध और उसके बाद दो साल तक इसे जारी रखना बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी बनता है। पुरानी रूढ़िवादी सोच को पीछे छोड़कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने से ही मां और बच्चे का स्वास्थ्य बेहतर रह सकता है। समाज के हर वर्ग को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि माताओं को स्तनपान के लिए अनुकूल और सहायक वातावरण मिले, जिससे एक स्वस्थ और सशक्त आने वाली पीढ़ी का निर्माण हो सके।

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