Odisha Flood: हीराकुड बांध से छोड़ा गया पानी कटक पहुंचा, महानदी का जलस्तर बढ़ा, 10 जिले हाई अलर्ट पर
हीराकुड से छोड़े गए पानी से महानदी का जलस्तर बढ़ा, राहत दल पूरी तरह अलर्ट
Odisha Flood: ओडिशा राज्य में बाढ़ और उफान का गंभीर खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। संबलपुर स्थित हीराकुड बांध के 22 स्पिलवे गेटों से छोड़े गए अतिरिक्त पानी का असर अब तटीय और निचले जिलों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। रविवार को यह पानी कटक के पास मुंडाली पहुंचकर महानदी के जलस्तर को बढ़ा चुका है। मुंडाली डिस्चार्ज प्वाइंट पर रविवार सुबह नौ बजे पानी का बहाव बढ़कर 5,73,000 क्यूसेक दर्ज किया गया, जो शनिवार को 4,74,000 क्यूसेक था। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य प्रशासन ने खोरधा, कटक, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर सहित तटीय क्षेत्र के 10 प्रमुख जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने उफनती नदियों और जलमग्न क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद राहत व बचाव अभियानों को युद्ध स्तर पर चलाने के निर्देश दिए हैं।
मुंडाली में जलस्तर की स्थिति और हाइड्रोलॉजिकल विशेषज्ञों का आकलन
महानदी के निचले तटीय क्षेत्रों में बढ़ते दबाव के बीच जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता दिलीप कुमार राउत ने स्थिति पर विस्तृत तकनीकी स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया है। उनके आकलन के अनुसार, हालांकि हीराकुड से पानी छोड़े जाने के कारण मुंडाली में जलस्तर बढ़ा है, लेकिन महानदी में चरम बाढ़ (Peak Flood) का सबसे खतरनाक चरण फिलहाल बीत चुका है। गुरुवार की रात मुंडाली से 8,88,000 क्यूसेक पानी का अधिकतम डिस्चार्ज पहले ही सुरक्षित रूप से बह चुका है। वर्तमान दौर में मुंडाली में अधिकतम जलस्तर लगभग सात लाख क्यूसेक तक जाने की संभावना है। यदि ऊपरी और निचले जलग्रहण क्षेत्रों में फिर से अत्यधिक भारी बारिश नहीं होती है, तो यह अतिरिक्त जलराशि बिना किसी बड़े बुनियादी ढांचे के नुकसान के बंगाल की खाड़ी में विसर्जित हो जाएगी।
उत्तरी ओडिशा की स्थिति और बहु-विभागीय राहत अभियान
उत्तरी ओडिशा के जिलों में सालांदी, जलका, बूढ़ाबलंग, वैतरणी और ब्राह्मणी जैसी प्रमुख नदियों के उफान के कारण 8 लाख से अधिक आबादी प्रभावित हुई है और सैकड़ों गाँव अभी भी जलमग्न हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री ने पुष्टि की है कि उत्तरी जिलों में नदियों का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है, जो एक सकारात्मक संकेत है। स्थिति पर सीधी निगरानी रखने के लिए राज्य सरकार ने दो उप-मुख्यमंत्रियों और कैबिनेट मंत्रियों को मैदान में उतारा है, जो प्रभावित जिलों में जाकर खाद्य सामग्री, पेयजल, दवाओं के वितरण और पुनर्वास कार्यों की कमान संभाल रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (ODRAF) और अग्निशमन सेवाओं की टीमों को मोटरबोट्स के साथ संवेदनशील इलाकों में तैनात रखा गया है।
Odisha Flood: मौसम विभाग का पूर्वानुमान और भावी चुनौतियाँ
मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के 21 जिलों—जिनमें बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज, क्योंझर, पुरी और गंजाम शामिल हैं—में तेज हवाओं और बिजली कड़कने के साथ भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। यदि इन जिलों में पुनः मूसलाधार बारिश होती है, तो पहले से उफान पर चल रही नदियों का संकट दोबारा गहरा सकता है। इसी जोखिम को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासनों को आश्रय स्थलों, स्कूलों और सामुदायिक भवनों में त्वरित राहत शिविर संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि जलजमाव वाले क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों और महामारी को फैलने से रोका जा सके।
निष्कर्ष
ओडिशा में इस समय महानदी और उसकी सहायक नदियों (Odisha Flood) का नियंत्रित जल-प्रबंधन ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हीराकुड से छोड़े गए पानी के कटक पहुँचने के बावजूद जल विशेषज्ञों के सकारात्मक पूर्वानुमानों ने राहत की सांस दी है। यदि आगामी 24 से 48 घंटों में मौसम प्रतिकूल नहीं होता है, तो राज्य धीरे-धीरे इस जल-आपदा के प्रभाव से बाहर निकल आएगा। फिलहाल, राज्य सरकार, राष्ट्रीय राहत दल और स्थानीय प्रशासन का पूरा ध्यान जन-धन की सुरक्षा और त्वरित पुनर्वास पर केंद्रित है।
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