तेज धूप में आंखों का रखें ख्याल: सनग्लासेस सिर्फ स्टाइल नहीं सेहत के लिए भी जरूरी, खरीदने से पहले जान लें ये 8 बातें

Eye Care in Summer: सनग्लासेस खरीदते समय रखें इन 8 बातों का ख्याल, वरना आंखों को होगा भारी नुकसान!

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Eye Care in Summer: भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप ने दस्तक दे दी है। ऐसे में जब हम घर से बाहर निकलते हैं, तो त्वचा को बचाने के लिए सनस्क्रीन और शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए पानी का तो ध्यान रखते हैं, लेकिन अक्सर अपनी आंखों को नजरअंदाज कर देते हैं। सूरज से निकलने वाली हानिकारक अल्ट्रावायलेट यानी यूवी किरणें न केवल त्वचा को झुलसाती हैं, बल्कि हमारी आंखों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मियों में सनग्लासेस पहनना महज एक फैशन स्टेटमेंट नहीं है, बल्कि यह आंखों की सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य जरूरत है। सही गुणवत्ता वाले चश्मे न पहनना भविष्य में मोतियाबिंद और रेटिना से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

Eye Care in Summer, यूवी किरणें: आंखों की दुश्मन और होने वाले नुकसान

सूरज की रोशनी में मौजूद अल्ट्रावायलेट किरणें आंखों के लिए बहुत घातक होती हैं। जब हमारी आंखें सीधे तेज धूप के संपर्क में आती हैं, तो यूवी किरणें आंखों के बाहरी हिस्से यानी कॉर्निया और अंदरूनी हिस्से यानी रेटिना को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती हैं। इससे तुरंत होने वाली समस्याओं में आंखों में तेज जलन, लालिमा और पानी आने जैसी शिकायतें शामिल हैं।

यदि लंबे समय तक आंखों को सुरक्षा न दी जाए, तो इसके परिणाम काफी गंभीर हो सकते हैं। तेज धूप में बिना चश्मे के रहने से आंखों में सूखापन यानी ड्राईनेस बढ़ जाती है और नजर में धुंधलापन आने लगता है। लॉन्ग टर्म में यह मोतियाबिंद (Cataract) के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। इसके अलावा, रेटिना डैमेज होने का रिस्क भी रहता है, जिससे आंखों की रोशनी स्थायी रूप से कमजोर हो सकती है। इसलिए, डॉक्टर सलाह देते हैं कि धूप चाहे तेज हो या हल्की, बाहर निकलते समय आंखों पर सुरक्षा कवच जरूर होना चाहिए।

सस्ते और लोकल सनग्लासेस से बचें: फायदे से ज्यादा नुकसान

Eye Care in Summer
Eye Care in Summer

अक्सर लोग फुटपाथ या लोकल मार्केट से सस्ते सनग्लासेस खरीद लेते हैं, जो आंखों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ते चश्मों में यूवी प्रोटेक्शन की कोटिंग नहीं होती है। ये चश्मे केवल रोशनी को कम करते हैं, जिससे हमारी आंखों की पुतली (Pupil) फैल जाती है। पुतली फैलने के कारण और भी अधिक हानिकारक यूवी किरणें सीधे आंखों के अंदर प्रवेश कर जाती हैं। इस तरह, लोकल चश्मा पहनने से आंखों को सुरक्षा मिलने के बजाय नुकसान अधिक होता है। हमेशा ऐसे चश्मे चुनें जो प्रामाणिक हों और जिन पर यूवी सुरक्षा का स्पष्ट उल्लेख हो।

सनग्लासेस खरीदते समय इन 8 बातों का रखें विशेष ध्यान

जब भी आप अपने लिए नए सनग्लासेस खरीदने जाएं, तो केवल उसके लुक और ब्रांड पर न जाएं। आंखों की पूरी सुरक्षा के लिए इन आठ तकनीकी पहलुओं की जांच जरूर करें:

  1. यूवी 400 प्रोटेक्शन: सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके सनग्लासेस में ‘UV400’ या ‘100% UV Protection’ का लेबल लगा हो। यह लेबल बताता है कि चश्मा यूवी-ए और यूवी-बी दोनों तरह की किरणों को ब्लॉक करने में सक्षम है।
  2. पोलराइज्ड लेंस: यदि आप ड्राइविंग करते हैं या पानी के पास समय बिताते हैं, तो पोलराइज्ड लेंस वाले चश्मे बेहतर होते हैं। ये लेंस धूप की चमक और चकाचौंध (Glare) को कम करते हैं, जिससे विजन साफ रहता है।
  3. लेंस का रंग: बेहतर दृश्यता के लिए ग्रे, ब्राउन या हरे रंग के लेंस सबसे अच्छे माने जाते हैं। ग्रे रंग रोशनी की तीव्रता को कम करता है, जबकि ब्राउन लेंस कॉन्ट्रास्ट को बेहतर बनाता है।
  4. फ्रेम का आकार: आंखों की पूरी सुरक्षा के लिए बड़े फ्रेम या ‘रैपअराउंड’ स्टाइल के चश्मे चुनें। ये चश्मे किनारे से आने वाली धूप और धूल को भी आंखों तक पहुंचने से रोकते हैं।
  5. लेंस की क्वालिटी: लेंस अच्छी क्वालिटी के पॉलीकार्बोनेट या ग्लास के होने चाहिए। ध्यान रहे कि लेंस में कोई खरोंच या धुंधलापन न हो, अन्यथा इससे सिरदर्द की समस्या हो सकती है।
  6. फिटिंग और आराम: चश्मा न तो बहुत ढीला होना चाहिए और न ही बहुत टाइट। नाक और कानों पर चश्मे का दबाव महसूस नहीं होना चाहिए, ताकि आप उसे लंबे समय तक पहन सकें।
  7. उपयोग के अनुसार चुनाव: यदि आप स्पोर्ट्स गतिविधियों में शामिल हैं, तो इम्पैक्ट-रेसिस्टेंट यानी मजबूत लेंस चुनें जो आसानी से न टूटें।
  8. प्रामाणिक विक्रेता: हमेशा भरोसेमंद ऑप्टिकल स्टोर या अधिकृत ब्रांडेड शोरूम से ही चश्मा खरीदें ताकि आपको यूवी कोटिंग की गारंटी मिल सके।

सुबह-शाम और बादलों में भी बना रहता है खतरा

एक आम धारणा है कि जब बादल छाए हों या सुबह-शाम का वक्त हो, तो चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन विशेषज्ञों का मानना अलग है। यूवी किरणें बादलों के पार भी जा सकती हैं और वे हल्की धूप में भी जमीन तक पहुंचती हैं। सुबह और शाम के समय सूरज की स्थिति ऐसी होती है कि किरणें सीधे आंखों के स्तर पर पड़ती हैं, जो काफी हानिकारक हो सकती हैं। इसलिए, दिन के किसी भी समय घर से बाहर निकलते समय सनग्लासेस का उपयोग करना एक स्वस्थ आदत है।

Eye Care in Summer: कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों के लिए जरूरी सलाह

जो लोग कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, उन्हें अक्सर लगता है कि उन्हें सनग्लासेस की जरूरत नहीं है। डॉ. श्रेया गुप्ता स्पष्ट करती हैं कि अधिकांश कॉन्टैक्ट लेंस यूवी किरणों से सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं। साथ ही, कॉन्टैक्ट लेंस केवल आंखों के बीच के हिस्से को कवर करते हैं, जबकि यूवी किरणें पूरी आंख और आसपास की नाजुक त्वचा को प्रभावित करती हैं। इसके अलावा, गर्मियों की गर्म हवा कॉन्टैक्ट लेंस को सुखा सकती है, जिससे आंखों में जलन और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में कॉन्टैक्ट लेंस के ऊपर सनग्लासेस पहनना दोहरी सुरक्षा प्रदान करता है।

Eye Care in Summer: आंखों की थकान और ड्राईनेस से बचाव

गर्मियों में चलने वाली गर्म हवाएं आंखों की नमी को सोख लेती हैं, जिससे ‘ड्राई आई’ की समस्या आम हो जाती है। सनग्लासेस एक फिजिकल बैरियर की तरह काम करते हैं, जो सीधे हवा और धूल के झोंकों को आंखों तक पहुंचने से रोकते हैं। इससे आंखों में नमी बनी रहती है और थकान कम होती है। यदि आप डिजिटल स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताते हैं और फिर बाहर निकलते हैं, तो आंखों पर तनाव और भी बढ़ जाता है। ऐसे में अच्छी क्वालिटी के सनग्लासेस आंखों को रिलैक्स करने में मदद करते हैं।

इस गर्मी में अपनी आंखों को केवल धूप का चश्मा पहनाकर आप कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। याद रखें, आंखें अनमोल हैं और इनकी सुरक्षा आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। अगली बार जब भी आप चश्मा खरीदें, तो स्टाइल के साथ-साथ ‘UV400’ लेबल जरूर चेक करें। सुरक्षित रहें और अपनी आंखों को चमकदार बनाए रखें।

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