बीजेपी ने Smriti Irani को सौंपी हरियाणा की कमान, टीवी स्क्रीन से सियासत तक का शानदार सफर
बीजेपी ने Smriti Irani को सौंपी हरियाणा की कमान, टीवी स्क्रीन से सियासत तक का शानदार सफर
Smriti Irani: भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को नई मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को हरियाणा का नया प्रभारी नियुक्त किया है। पार्टी ने देश के अट्ठाईस राज्यों और नौ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अपनी नई प्रभारी और सह-प्रभारी सूची जारी की, जिसमें हरियाणा की जिम्मेदारी स्मृति ईरानी को सौंपी गई है। उनके साथ डॉ. भोला सिंह को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। स्मृति ईरानी की यह नियुक्ति इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उनका राजनीतिक सफर टेलीविजन इंडस्ट्री से शुरू होकर देश की सबसे मुखर और प्रभावशाली नेताओं में शुमार होने तक पहुंचा है। मॉडलिंग और अभिनय की दुनिया से निकलकर भाजपा में अपनी अलग पहचान बनाने वाली स्मृति ईरानी अब हरियाणा में संगठन को नई दिशा देने की जिम्मेदारी संभालेंगी। उनकी इस नियुक्ति से हरियाणा भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में नई ऊर्जा आने की उम्मीद जताई जा रही है।
मॉडलिंग और टीवी इंडस्ट्री से शुरू हुआ सफर
स्मृति ईरानी का जन्म दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय मल्होत्रा परिवार में हुआ था और उन्होंने अपनी पहचान बनाने के लिए एक लंबा तथा संघर्षपूर्ण रास्ता तय किया है। राजनीति में कदम रखने से पहले वे एक सफल मॉडल और लोकप्रिय टीवी अभिनेत्री के तौर पर व्यापक पहचान बना चुकी थीं। दूरदर्शन और स्टार प्लस के मशहूर धारावाहिकों के जरिए उन्होंने घर-घर में अपनी जगह बनाई, जिसके बाद वे भारतीय राजनीति का एक सशक्त चेहरा बनकर सामने आईं। उनका यह सफर इस बात का उदाहरण है कि मनोरंजन जगत से भी कोई व्यक्ति दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत के दम पर राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है।
‘सास भी कभी बहू थी’ से मिली असली पहचान
स्मृति ईरानी को सबसे बड़ी पहचान वर्ष 2000 से 2008 के बीच प्रसारित हुए धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी विरानी की भूमिका से मिली। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने एक बार खुद बताया था कि शुरुआत में इस शो के लिए उन्हें फिट न मानते हुए रिजेक्ट कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने एक सहायक भूमिका निभाई थी। हालांकि आगे चलकर यही भूमिका उनके लिए बेहद लोकप्रियता लेकर आई और उन्होंने टेलीविजन इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर ली। इस भूमिका के जरिए मिली प्रसिद्धि ने आगे चलकर उनके राजनीतिक करियर के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार किया।
भाजपा से जुड़ाव और शुरुआती राजनीतिक संघर्ष
स्मृति ईरानी ने साल 2003 में औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके अगले ही साल, यानी 2004 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें दिल्ली की हाई-प्रोफाइल चांदनी चौक सीट से मैदान में उतारा, जहां उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल से हुआ। इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इस असफलता ने उनके राजनीतिक हौसले को कमजोर नहीं किया। साल 2010 में उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय सचिव और महिला विंग की अध्यक्ष बनाया गया, जबकि 2011 में वे गुजरात से राज्यसभा सदस्य बनीं। इसके बाद 2017 में उन्हें एक बार फिर राज्यसभा भेजा गया।
अमेठी से राहुल गांधी को हराकर बनीं राष्ट्रीय चेहरा
2014 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी ने उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि उस चुनाव में उन्हें हार मिली, लेकिन अमेठी में उनकी लगातार सक्रियता और चुनावी मुकाबले ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रमुख चेहरे के तौर पर स्थापित कर दिया। इसी साल नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया, और बाद में उन्हें कपड़ा मंत्रालय समेत कई अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। साल 2017 में उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। साल 2019 में उन्होंने अमेठी से लोकसभा चुनाव जीतकर राहुल गांधी को पराजित किया, जो उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।
मंत्रिमंडल में अहम जिम्मेदारियां और 2024 की हार
2019 में लोकसभा पहुंचने के बाद मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में स्मृति ईरानी को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय जैसी अहम जिम्मेदारियां मिलीं। इससे पहले राज्यसभा में बिताए अपने सात वर्षों के अनुभव का जिक्र उन्होंने संसद में भी किया था। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में वे अमेठी सीट से हार गईं, जिसके बाद वे केंद्रीय मंत्रिपरिषद का हिस्सा नहीं रहीं। मौजूदा समय में उन्हें पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में से एक के तौर पर देखा जाता है, जिनकी पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका बनी हुई है।
आक्रामक वक्तृत्व और संगठनात्मक सक्रियता रही खासियत
स्मृति ईरानी की राजनीति की पहचान हमेशा उनके आक्रामक चुनावी भाषणों और टेलीविजन बहसों में विपक्ष के खिलाफ मुखर तर्क रखने की क्षमता से जुड़ी रही है। मंत्रिमंडल में रहते हुए उन्होंने महिला एवं बाल विकास, कपड़ा, शिक्षा और सूचना-प्रसारण जैसे क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता से काम किया। संसद में उनके वक्तव्यों में महिला आर्थिक सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं जैसे विषय हमेशा प्रमुखता से शामिल रहे हैं। अमेठी की राजनीति उनके करियर का सबसे चर्चित अध्याय रही, जहां 2019 की जीत के बाद 2024 की हार ने उनके संसदीय सफर में एक बड़ा मोड़ ला दिया।
हरियाणा में नई जिम्मेदारी से जुड़ी उम्मीदें
2024 में अमेठी से मिली हार के बावजूद स्मृति ईरानी का राजनीतिक कद कम नहीं हुआ और वे आज भी भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के जाने-पहचाने चेहरों में शामिल हैं। ऐसे में उन्हें हरियाणा जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य का प्रभारी बनाया जाना पार्टी की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। डॉ. भोला सिंह के साथ मिलकर वे हरियाणा में संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने का काम करेंगी। पार्टी को उम्मीद है कि उनके अनुभव और आक्रामक राजनीतिक शैली का लाभ हरियाणा इकाई को मिलेगा।
स्मृति ईरानी को हरियाणा भाजपा का प्रभारी बनाया जाना उनके लंबे और विविधतापूर्ण राजनीतिक सफर की एक और अहम कड़ी है। टीवी स्क्रीन से राजनीति के मैदान तक और फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल से संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तक, उनका यह सफर संघर्ष और दृढ़ता की मिसाल पेश करता है। हरियाणा में उनकी नई भूमिका को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है, और आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे राज्य में संगठन को किस दिशा में आगे ले जाती हैं। उनकी नियुक्ति भाजपा की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए पार्टी हर राज्य में अनुभवी और प्रभावशाली नेतृत्व सुनिश्चित करना चाहती है।
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