China Import News: चीन से ग्लाइसिन और CPVC आयात पर भारत की सख्ती, DGTR की जांच शुरू

चीन से ग्लाइसिन पर एंटी-डंपिंग और CPVC पर एंटी-सर्कमवेंशन जांच शुरू हुई

0

China Import News: घरेलू विनिर्माण उद्योग को विदेशी उत्पादों के अनुचित मूल्य निर्धारण और व्यापारिक विसंगतियों से संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने चीन से होने वाले रणनीतिक रसायनों के आयात पर अपनी निगरानी को और कड़ा कर दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने चीन से आयातित ‘ग्लाइसिन’ (Glycine) पर एक नई एंटी-डंपिंग जांच औपचारिक रूप से शुरू की है। इसके साथ ही चीन और दक्षिण कोरिया से जुड़े ‘सीपीवीसी रेजिन’ (Chlorinated Polyvinyl Chloride) के मामले में पहले से लागू शुल्क को तीसरे देशों के माध्यम से दरकिनार करने के आरोपों की पड़ताल के लिए एक उच्चस्तरीय एंटी-सर्कमवेंशन जांच (Anti-circumvention Investigation) भी शुरू की गई है।

दोनों मामलों की विधिक और तकनीकी प्रकृति यद्यपि भिन्न है, किंतु इनका मूल उद्देश्य घरेलू उत्पादकों के हितों की रक्षा करना और भारतीय बाजार में सस्ते व विकृत आयातों के कारण पैदा होने वाले नुकसान को नियंत्रित करना है। महानिदेशालय ने घरेलू निर्माताओं द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों और प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर यह विधिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। आगामी महीनों में जांच एजेंसी आयातित सामग्री की लागत, बिक्री मूल्य और घरेलू उद्योग पर उसके प्रतिकूल प्रभावों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर अपनी अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को प्रेषित करेगी।

China Import News: ग्लाइसिन क्या है और चीन से आयात पर क्यों शुरू हुई एंटी-डंपिंग जांच

ग्लाइसिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण गैर-आवश्यक अमीनो एसिड है, जिसका व्यापक उपयोग खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्युटिकल और विभिन्न रासायनिक उद्योगों में किया जाता है। खाद्य उद्योग में इसका उपयोग मुख्य रूप से स्वाद बढ़ाने वाले घटक (फ्लेवर एन्हांसर) और मिठास के संतुलन के लिए होता है। वहीं औषधि निर्माण क्षेत्र में ग्लाइसिन का उपयोग अंतःशिरा (IV) इंजेक्शन, एंटासिड और कई जीवनरक्षक दवाओं के संश्लेषण में एक आवश्यक मध्यवर्ती उत्पाद के रूप में किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसका उपयोग पशु आहार और कॉस्मेटिक्स उत्पादों में भी प्रमुखता से होता है।

भारत में इस जांच की शुरुआत घरेलू निर्माता ‘एविड ऑर्गेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड’ (Avid Organics Private Limited) द्वारा प्रस्तुत औपचारिक आवेदन के आधार पर की गई है। आवेदक कंपनी ने आरोप लगाया है कि चीन के निर्यातक अपनी घरेलू उत्पादन लागत से काफी कम कीमत पर भारतीय बाजार में ग्लाइसिन का निर्यात कर रहे हैं। इस कृत्रिम मूल्य अवमूल्यन (डंपिंग) के कारण भारतीय कंपनियों को अपनी स्थापित विनिर्माण क्षमता का पूर्ण उपयोग करने में कठिनाई आ रही है और उन्हें वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।

डीजीटीआर इस मामले में वर्ष 2022 से 2025 के मध्य के आयात आंकड़ों, उत्पादन लागत और घरेलू बाजार में इसके विक्रय मूल्य का परीक्षण कर रहा है। जांच का उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि क्या चीनी उत्पादकों द्वारा वास्तव में डंपिंग की गई है और क्या इस आयात तथा घरेलू उद्योग को पहुंचे आर्थिक नुकसान के बीच कोई सीधा संबंध मौजूद है।

एंटी-डंपिंग शुल्क और डब्ल्यूटीओ के विधिक प्रावधान

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डंपिंग उस स्थिति को कहा जाता है जब कोई निर्यातक देश किसी उत्पाद को अपने घरेलू बाजार में बेची जाने वाली सामान्य कीमत की तुलना में काफी कम कीमत पर किसी अन्य देश में निर्यात करता है। ऐसा अक्सर प्रतिस्पर्धी देशों के घरेलू विनिर्माण तंत्र को पंगु बनाने अथवा बाजार हिस्सेदारी पर एकाधिकार स्थापित करने की नीयत से किया जाता है।

विश्व व्यापार संगठन (WTO) के बहुपक्षीय नियमों के तहत किसी भी सदस्य देश को अपने घरेलू उद्योग को इस प्रकार के अनुचित व्यापारिक तौर-तरीकों से बचाने के लिए ‘एंटी-डंपिंग ड्यूटी’ (Anti-Dumping Duty) लगाने का विधिक अधिकार प्राप्त है। भारत में सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 और तदुपरांत बनाए गए नियमों के तहत डीजीटीआर एक निष्पक्ष अर्ध-न्यायिक जांच प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है।

जांच प्रक्रिया के दौरान विदेशी निर्यातकों, भारतीय आयातकों और घरेलू विनिर्माताओं सभी को अपना पक्ष और लेखा दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया जाता है। यदि डीजीटीआर अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट में डंपिंग और उससे होने वाले नुकसान की पुष्टि करता है, तो वह वित्त मंत्रालय को निश्चित सीमा शुल्क अधिरोपित करने की सिफारिश करता है। इसके उपरांत राजस्व विभाग अंतिम अधिसूचना जारी कर शुल्क लागू करता है।

सीपीवीसी रेजिन का मामला: तीसरे देशों के जरिए नियम तोड़ने की आशंका पर जांच

ग्लाइसिन के सीधे डंपिंग मामले से इतर, सीपीवीसी रेजिन का प्रकरण व्यापार उपायों को तकनीकी रूप से चकमा देने यानी एंटी-सर्कमवेंशन से जुड़ा हुआ है। सीपीवीसी (क्लोरीनेटेड पॉलीविनाइल क्लोराइड) एक उन्नत थर्मोप्लास्टिक सामग्री है, जिसका उपयोग गर्म और ठंडे पानी के प्लंबिंग पाइप, अग्नि सुरक्षा प्रणाली (फायर स्प्रिंकलर सिस्टम), औद्योगिक अपशिष्ट निष्कासन और रासायनिक पाइपिंग अनुप्रयोगों में व्यापक रूप से किया जाता है।

भारत सरकार ने चीन और दक्षिण कोरिया से आयातित सीपीवीसी रेजिन पर मूल रूप से वर्ष 2019 में एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया था, जिसे हाल ही में अगस्त 2024 में सनसेट रिव्यू के माध्यम से आगे बढ़ाया गया था। हालांकि घरेलू उत्पादकों—डीसीडब्ल्यू लिमिटेड (DCW Limited), एपिग्रल लिमिटेड (Epigral Limited) और लुब्रिज़ोल एडवांस्ड मैटेरियल्स इंडिया (Lubrizol Advanced Materials India)—ने डीजीटीआर के समक्ष साक्ष्यों के साथ आवेदन दायर किया।

कंपनियों ने आरोप लगाया कि चीन और दक्षिण कोरिया के उत्पादक सीधे भारत में निर्यात करने के बजाय मलेशिया, जापान और थाईलैंड के कुछ चुनिंदा निर्यातकों के माध्यम से माल भेज रहे हैं। इस मार्ग परिवर्तन का उद्देश्य भारत में प्रभावी एंटी-डंपिंग शुल्क के भुगतान से बचना है। डीजीटीआर ने 16 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना में इस मामले में प्रथम दृष्टया साक्ष्य पाते हुए मलेशिया की सासिर क्लोरीन पॉलिमर्स, जापान की ईबीसी कॉरपोरेशन और थाईलैंड की सेकीसुई स्पेशियल्टी केमिकल्स से होने वाले आयातों की विशिष्ट जांच शुरू करने का आदेश दिया है।

मलेशिया, जापान और थाईलैंड के व्यापारिक पैटर्न पर नजर

एंटी-सर्कमवेंशन जांच में सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘ट्रेड पैटर्न में असामान्य बदलाव’ (Change in Pattern of Trade) का मूल्यांकन करना होता है। घरेलू उद्योग ने शिकायत में दर्शाया है कि जैसे ही चीन और दक्षिण कोरिया पर दंडात्मक शुल्क प्रभावी हुआ, वैसे ही मलेशिया, जापान और थाईलैंड से भारत आने वाले सीपीवीसी रेजिन के आयात में अप्रत्याशित और तीव्र वृद्धि दर्ज की गई।

जांच एजेंसी अब इस बात की पड़ताल करेगी कि क्या इन देशों से भारत भेजे जा रहे माल में स्थानीय स्तर पर कोई ठोस तकनीकी मूल्य संवर्धन (Value Addition) किया गया है, या फिर यह केवल लेबल बदलने, री-पैकेजिंग करने अथवा केवल कागजी प्रक्रिया के माध्यम से चीन निर्मित माल को दूसरे देश का बताकर भेजने का एक कृत्रिम माध्यम भर है। यदि यह सिद्ध हो जाता है कि व्यापार के इस मार्ग में कोई आर्थिक औचित्य नहीं था और केवल शुल्क से बचने के लिए इसे अपनाया गया था, तो मौजूदा एंटी-डंपिंग शुल्क का विस्तार इन तीसरे देशों से आने वाले संबंधित उत्पादों पर भी कर दिया जाएगा।

रिकॉर्ड व्यापार घाटे के बीच भारत की व्यापार उपचार नीति

यह विधिक और प्रशासनिक कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार संतुलन गहरे असंतुलन के दौर से गुजर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत ने चीन को लगभग 19.47 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात किया (जिसमें 36.66 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि देखी गई), जबकि चीन से भारत का कुल आयात लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 131.63 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।

इसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के मध्य भारत का वार्षिक व्यापार घाटा 112.6 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया, जो पूर्व वित्त वर्ष में 99.2 अरब डॉलर था। यद्यपि विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार केवल समग्र व्यापार घाटा किसी विशिष्ट उत्पाद पर शुल्क लगाने का कानूनी आधार नहीं हो सकता, किंतु यह वृहद आर्थिक संदर्भ यह अवश्य स्पष्ट करता है कि भारत अब संवेदनशील औद्योगिक सामग्रियों, रसायनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा इंटरमीडिएट्स के घरेलू विनिर्माण को विदेशी डंपिंग से बचाने के लिए अपने व्यापार उपचार तंत्र का सक्रिय उपयोग कर रहा है।

भारतीय विनिर्माताओं और उपयोगकर्ता उद्योगों पर संभावित प्रभाव

डीजीटीआर द्वारा शुरू की गई इन दोनों जांचों का प्रभाव आपूर्ति श्रृंखला के दोनों सिरों पर देखने को मिल सकता है। एक ओर जहां घरेलू रासायनिक उत्पादकों और प्लास्टिक निर्माताओं को एक समान अवसर (Level Playing Field) मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर तैयार उत्पाद बनाने वाले डाउनस्ट्रीम उद्योगों—जैसे पाइप निर्माता, औषधि कंपनियां और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां—की नजरें कच्चे माल की भविष्य की लागत पर टिकी हैं।

यदि जांच के उपरांत ग्लाइसिन और सीपीवीसी पर अतिरिक्त सीमा शुल्क या एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई जाती है, तो अल्पकाल में आयातित कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है। हालांकि दीर्घकाल में यह घरेलू उत्पादकों को क्षमता विस्तार, शोध और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। डीजीटीआर ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय लेते समय घरेलू उद्योग के हितों के साथ-साथ अंतिम उपभोक्ताओं और व्यापक जनहित के संतुलन का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।

China Import News: निष्कर्ष

चीन से आने वाले ग्लाइसिन पर एंटी-डंपिंग और सीपीवीसी रेजिन पर एंटी-सर्कमवेंशन जांच की शुरुआत यह दर्शाती है कि भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों की चौखट के भीतर रहकर अपने घरेलू औद्योगिक आधार को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। जांच की यह प्रक्रिया जहां विदेशी सप्लायर्स के अनुचित मूल्य निर्धारण और तीसरे देशों के जरिए अपनाई जाने वाली व्यापारिक हेराफेरी पर कड़ा प्रहार करेगी, वहीं भारतीय विनिर्माताओं को अपनी गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी क्षमता में सुधार करने का अवसर भी प्रदान करेगी। आने वाले महीनों में डीजीटीआर की प्रारंभिक टिप्पणियों और साक्ष्य परीक्षणों के उपरांत ही यह तय होगा कि वित्त मंत्रालय इन आयातों पर अतिरिक्त शुल्क अधिरोपण की दिशा में क्या विधिक कदम उठाता है।

Read More Here

Face Bleach Tips: चेहरे पर ब्लीच लगाने का सही तरीका क्या है? 99 प्रतिशत लोग करते हैं यह बड़ी गलती

NTPC Recruitment 2026: असिस्टेंट ऑफिसर के पदों पर निकली भर्ती, मिलेगी एक लाख से अधिक सैलरी

Healthy Recipes For Kids: बच्चों को रोज ब्रेड-जैम खिलाना छोड़ें, 10-15 मिनट में बनाएं ये 5 टेस्टी और हेल्दी चिल्ला

Rani Mukerji Mother Death: रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का निधन, 75 साल की उम्र में यशराज फिल्म्स ने की पुष्टि

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.