CDSCO Advisory: पेनकिलर और एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल पर चेतावनी, किडनी को नुकसान का खतरा
CDSCO ने NSAIDs और एंटीबायोटिक के अनियंत्रित इस्तेमाल से CKD और AMR के खतरे पर आगाह किया
CDSCO Advisory: देश में सामान्य सिरदर्द, बदन दर्द, मौसमी बुखार या सामान्य सर्दी-जुकाम होने पर बिना डॉक्टरी परामर्श के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदकर खाने (सेल्फ-मेडिकेशन) की खतरनाक प्रवृत्ति पर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने कड़ा संज्ञान लिया है। भारत के सर्वोच्च औषधि नियामक ने दर्द निवारक दवाओं (NSAIDs) और एंटीबायोटिक दवाओं के मनमाने, अनियंत्रित और लंबे समय तक किए जाने वाले उपयोग को लेकर देशव्यापी सुरक्षा चेतावनी जारी की है।
सीडीएससीओ द्वारा जारी विस्तृत सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि गैर-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं का अत्यधिक और बिना निगरानी के सेवन गुर्दे (किडनी) की कार्यप्रणाली को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है। वहीं दूसरी ओर सामान्य वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक दवाओं का गैर-जरूरी इस्तेमाल देश में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के जानलेवा संकट को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। नियामक ने चिकित्सकों, फार्मासिस्टों और आम नागरिकों को सख्त हिदायत दी है कि इन दवाओं का सेवन केवल चिकित्सकीय आवश्यकता, सही खुराक और निर्धारित समयसीमा के भीतर ही किया जाना चाहिए।
CDSCO Advisory: तर्कसंगत दवा उपयोग को बढ़ावा देना
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन देश में औषधियों की गुणवत्ता, नैदानिक सुरक्षा और वितरण व्यवस्था की निगरानी करने वाला शीर्ष विनियामक प्राधिकरण है। औषधि महानियंत्रक (DCGI) के कार्यालय द्वारा यह निर्देश इसलिए जारी किए गए हैं क्योंकि देश भर के अस्पतालों और क्लीनिकों में ऐसे मामलों की संख्या में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है जहां मरीजों में दवाओं के दुष्प्रभावों के कारण अन्य गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं पैदा हो रही हैं।
नियामक ने इस बात को पुरजोर तरीके से रेखांकित किया है कि प्रत्येक मरीज का शरीर, उसकी आयु, पहले से मौजूद बीमारियां (को-मॉर्बिडिटीज) और पूर्व से चल रहीं अन्य दवाएं भिन्न होती हैं। ऐसी स्थिति में किसी एक व्यक्ति के पर्चे को देखकर दूसरे व्यक्ति द्वारा वही दवा खा लेना या पुराने पर्चे के आधार पर बार-बार पेनकिलर खरीदते रहना अत्यंत जानलेवा सिद्ध हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान में प्रत्येक लक्षण के पीछे कई अंतर्निहित कारण हो सकते हैं, इसलिए बिना सटीक निदान के दवाओं का अंधाधुंध सेवन तात्कालिक राहत तो दे सकता है, किंतु वह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को अपूरणीय क्षति पहुंचाता है।
पेनकिलर्स से किडनी को भारी खतरा: गैर-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं पर विशेष सतर्कता
दर्द और सूजन को कम करने के लिए बाजार में व्यापक रूप से उपलब्ध एनएसएआईडी (NSAIDs) दवाओं के संबंध में सीडीएससीओ ने सबसे गंभीर चेतावनी जारी की है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार ये दवाएं शरीर में दर्द पैदा करने वाले प्रोस्टाग्लैंडिंस रसायनों के निर्माण को रोकती हैं, किंतु साथ ही ये गुर्दे तक जाने वाले रक्त प्रवाह (रीनल ब्लड फ्लो) को भी संकुचित कर देती हैं।
नियामक ने स्पष्ट किया है कि जो लोग पहले से ही क्रोनिक किडनी रोग (CKD), उच्च रक्तचाप, मधुमेह अथवा हृदय संबंधी विकारों से पीड़ित हैं, उनके लिए बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर लेना ‘अक्यूट किडनी इंजरी’ (AKI) का कारण बन सकता है। इसके अतिरिक्त शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होने पर या अत्यधिक पसीना निकलने की स्थिति में यदि दर्द निवारक दवा ली जाए, तो यह गुर्दे पर अत्यधिक विषाक्त प्रभाव डालती है। बार-बार दर्द के लक्षण उभरने पर दर्द को दबाने के बजाय रोग के मूल कारण की जांच कराना अनिवार्य है।
वायरल बीमारियों में एंटीबायोटिक का दुरुपयोग: सुपरबग्स और एएमआर की गंभीर चुनौती
सीडीएससीओ ने सामान्य सर्दी, खांसी, गले में खराश, फ्लू या मौसमी वायरल बुखार में एंटीबायोटिक दवाओं के अनियंत्रित उपयोग पर कड़ा प्रहार किया है। जैव-चिकित्सीय रूप से एंटीबायोटिक दवाएं केवल जीवाणु (बैक्टीरिया) जनित संक्रमणों को नष्ट करने के लिए बनाई गई हैं; इनका विषाणु (वायरस) से होने वाले संक्रमणों पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
अनावश्यक रूप से एंटीबायोटिक लेने से शरीर में मौजूद मित्र बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाते हैं और हानिकारक बैक्टीरिया स्वयं को उस दवा के अनुकूल ढालकर ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ (AMR) विकसित कर लेते हैं। परिणामस्वरूप साधारण बैक्टीरिया भी ‘सुपरबग’ में बदल जाते हैं, जिन पर जीवनरक्षक एंटीबायोटिक दवाएं निष्प्रभावी हो जाती हैं। यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो भविष्य में सामान्य ऑपरेशन, प्रसव अथवा साधारण फोड़े-फुंसियों के संक्रमण का इलाज करना भी असंभव हो जाएगा। नियामक ने आगाह किया है कि एंटीबायोटिक का एक भी डोज डॉक्टर द्वारा तय किए गए पूरे कोर्स और समय के अनुसार ही पूरा किया जाना चाहिए।
चिकित्सकों के लिए कड़े निर्देश: सही खुराक और समयसीमा का निर्धारण अनिवार्य
नियामक की यह एडवाइजरी केवल मरीजों के लिए ही नहीं, बल्कि एलोपैथिक चिकित्सकों और स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए भी सख्त आचार संहिता निर्धारित करती है। डॉक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी मरीज को एनएसएआईडी या एंटीबायोटिक दवा लिखते समय क्लीनिकल आवश्यकता का गहन परीक्षण करें।
चिकित्सकों से कहा गया है कि वे मरीज की उम्र, वजन, गुर्दे व लीवर की कार्यप्रणाली तथा चल रही अन्य दवाओं की अंतःक्रिया (ड्रग इंटरैक्शन) का सूक्ष्म मूल्यांकन करने के पश्चात ही सटीक खुराक लिखें। अनावश्यक दवाओं के कॉकटेल या अत्यधिक शक्तिशाली तीसरी पीढ़ी की एंटीबायोटिक दवाओं को पहली पंक्ति के उपचार के रूप में लिखने से बचने की स्पष्ट सलाह दी गई है। इसके साथ ही मरीजों को यह स्पष्ट रूप से समझाना अनिवार्य किया गया है कि लक्षण समाप्त होने पर भी एंटीबायोटिक का कोर्स बीच में न छोड़ें और न ही बिना जांच के उसकी अवधि को आगे बढ़ाएं।
शेड्यूल एच और एच1 के नियम: फार्मासिस्टों और मेडिकल स्टोर्स पर होगी सख्त निगरानी
औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमावली के तहत देश में अधिकांश एंटीबायोटिक दवाओं को शेड्यूल एच (Schedule H) और अत्यंत शक्तिशाली एंटीबायोटिक्स को शेड्यूल एच1 (Schedule H1) की श्रेणी में रखा गया है। इसी प्रकार अधिकांश असरदार एनएसएआईडी दवाएं भी शेड्यूल एच के अंतर्गत आती हैं। कानूनन इन श्रेणियों की कोई भी दवा किसी योग्य पंजीकृत चिकित्सक (RMP) के वैध पर्चे के बिना बेचना पूर्णतः गैर-कानूनी है।
सीडीएससीओ ने देशभर के दवा वितरकों, थोक विक्रेताओं और खुदरा मेडिकल स्टोर संचालकों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि वे ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) के रूप में इन दवाओं की सीधी बिक्री कतई न करें। शेड्यूल एच1 के तहत बेची जाने वाली दवाओं के संबंध में निर्धारित प्रारूप में मरीज का नाम, चिकित्सक का विवरण, दवा की मात्रा और बिक्री की तारीख का अलग रजिस्टर मेंटेन करना विधिक रूप से अनिवार्य है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी करने वाले दवा प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे और उनके खिलाफ विधिक अभियोजन चलाया जाएगा।
राज्यों के औषधि नियंत्रकों को जागरूकता और प्रवर्तन के आदेश
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य औषधि नियंत्रकों (State Drug Controllers) को पत्र प्रेषित कर निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में इस एडवाइजरी का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराएं। इसके लिए जिला स्तर पर औषधि निरीक्षकों की टीमें गठित कर मेडिकल स्टोर्स का औचक निरीक्षण किया जाएगा।
इसके साथ ही राज्य सरकारों को निर्देशित किया गया है कि वे मेडिकल एसोसिएशनों, फार्मेसी काउंसिल, उपभोक्ता संगठनों और मीडिया के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाएं। लोगों को यह समझाना अत्यंत आवश्यक है कि हर गोली के पीछे एक रासायनिक क्रिया और उसका संभावित जोखिम होता है। राज्य स्तर पर चलाए जाने वाले इस प्रवर्तन अभियान से फर्जी डॉक्टरों (झोलाछाप) द्वारा दी जाने वाली अनाधिकृत दवाओं पर भी नकेल कसी जा सकेगी।
CDSCO Advisory: निष्कर्ष
सीडीएससीओ द्वारा दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर जारी यह नई एडवाइजरी जनस्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में उठाया गया एक अत्यंत सामयिक और युगांतरकारी कदम है। दर्द से तात्कालिक मुक्ति की चाह में बिना सोचे-समझे खाई जाने वाली गोलियां किस प्रकार भविष्य में डायलिसिस या लाइलाज संक्रमण की विभीषिका बन सकती हैं, इसे अब हर नागरिक को गंभीरता से समझना होगा। दवाओं का सम्मान उनके विवेकपूर्ण और अनुशासित उपयोग में ही निहित है। समाज, चिकित्सकों और दवा विक्रेताओं का यह साझा नैतिक कर्तव्य है कि वे आत्म-चिकित्सा की घातक आदत को त्यागकर केवल वैज्ञानिक परामर्श और चिकित्सकीय निगरानी में ही दवाओं का सेवन सुनिश्चित करें।
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