Jammu Railway Water Quality: यात्रियों को मिलेगा शुद्ध पेयजल, टैंकों की सफाई और जांच तेज
जम्मू मंडल के स्टेशनों पर टैंकों की सफाई, क्लोरीनीकरण और वैज्ञानिक जांच का अभियान
Jammu Railway Water Quality: भारतीय रेल से प्रतिदिन यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल ने एक व्यापक व सघन जल स्वच्छता अभियान प्रारंभ किया है। लंबी दूरी की रेल यात्राओं के दौरान रेलवे स्टेशनों और परिसर में उपलब्ध पेयजल पर यात्रियों की निर्भरता अत्यधिक रहती है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए मंडल प्रशासन ने स्टेशनों, कोचिंग डिपो, पंप हाउसों और रेलवे आवासीय कॉलोनियों में स्थापित सभी भूमिगत व ओवरहेड जल भंडारण टैंकों की सफाई, कीटाणुशोधन और वैज्ञानिक गुणवत्ता परीक्षण का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया है।
रेलवे द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में मंडल के औपचारिक गठन के समय से ही पेयजल की गुणवत्ता पर निरंतर बहुस्तरीय निगरानी रखी जा रही है। विशेष अभियान के तहत अब तक की गई विभिन्न रासायनिक, जैविक और क्लोरीनीकरण जांचों में पानी के सभी एकत्र नमूने निर्धारित स्वास्थ्य मानकों पर पूरी तरह संतोषजनक पाए गए हैं।
Jammu Railway Water Quality: जल स्रोत से लेकर अंतिम नल तक स्वच्छता का बहुस्तरीय ढांचा
उत्तर रेलवे जम्मू मंडल द्वारा संचालित इस स्वच्छता महाभियान का मुख्य ध्येय केवल पानी की सामान्य जांच करना नहीं, बल्कि उस समूची आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को जीवाणुमुक्त और सुरक्षित बनाना है जिसके माध्यम से जल अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचता है।
रेलवे इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें रेलवे स्टेशनों पर स्थापित विशाल भंडारण टैंकों की यांत्रिक व रासायनिक सफाई कर रही हैं। इसके साथ ही ट्रेनों के डिब्बों में पानी भरने वाले कोचिंग डिपो, मुख्य वाटर पंप हाउस और रेल कर्मियों के आवासों तक जाने वाली पाइपलाइनों की गहन समीक्षा की जा रही है। स्रोत से लेकर स्टोरेज और वितरण बिंदुओं तक हर स्तर पर गाद (Silt) हटाने और ब्लीचिंग प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया है ताकि किसी भी चरण में जलजनित संक्रमण की रंचमात्र भी आशंका न रहे।
सैकड़ों वैज्ञानिक परीक्षणों में शुद्धता प्रमाणित: 527 क्लोरीनीकरण और 46 जैविक जांचें संपन्न
जम्मू मंडल के गठन के बाद से ही जल सुरक्षा को एक संस्थागत व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया है। मंडल के स्वास्थ्य निरीक्षकों द्वारा नियमित अंतराल पर पानी के नमूने एकत्र कर प्रयोगशालाओं में भेजे जा रहे हैं।
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 527 क्लोरीनीकरण (Chlorination) परीक्षण, 46 गहन सूक्ष्मजैविक (Microbiological) परीक्षण और 46 एक्वा वायल व रासायनिक (Chemical) परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किए जा चुके हैं। इन सभी परीक्षणों की विधिक व तकनीकी रिपोर्ट संतोषजनक पाई गई है। यह परिणाम इस बात का ठोस प्रमाण हैं कि रेलवे द्वारा आपूर्ति किए जा रहे पानी में अवशिष्ट क्लोरीन की मात्रा रोगाणुओं को समाप्त करने के लिए पूरी तरह संतुलित है और उसमें कोई हानिकारक बैक्टीरिया या भारी धातुएं मौजूद नहीं हैं।
टैंकों की अभेद्य सीलिंग और खुले जलस्रोतों पर लोहे की जालीदार सुरक्षा
पेयजल की शुद्धता को दीर्घकाल तक अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सुरक्षित भंडारण व्यवस्था अत्यंत आवश्यक होती है। यदि ओवरहेड या भूमिगत टैंक खुले अथवा क्षतिग्रस्त हों, तो उनमें धूल, पक्षियों के अवशेष और बाह्य प्रदूषक तत्व प्रवेश कर सकते हैं।
इस जोखिम को समाप्त करने के लिए जम्मू मंडल ने सभी जल भंडारण टैंकों के ढक्कनों को सुरक्षित रूप से सील करने और लॉक लगाने की व्यवस्था अनिवार्य की है। इसके अतिरिक्त, रेलवे क्षेत्र में स्थित खुले जल स्रोतों और प्राकृतिक जल संचयन संरचनाओं को मजबूत लोहे की जाली (Wire Netting) से पूरी तरह ढका जा रहा है। इस सुरक्षा घेरे से बाहरी अवांछित तत्वों, कीटों और मलबे का पानी के मुख्य स्रोत तक पहुंचना पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।
रेलवे बोर्ड के दिशानिर्देश: ट्रीटमेंट प्लांट और वाटर बूथों का कायाकल्प
रेलवे बोर्ड द्वारा देशव्यापी स्तर पर जारी व्यापक दिशानिर्देशों के क्रम में जम्मू मंडल जल शोधन प्रणाली के बुनियादी ढांचे को भी सुदृढ़ कर रहा है। बोर्ड के निर्देशों के अनुसार केवल अंतिम आउटलेट की जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि जल शोधन संयंत्रों (Water Treatment Plants), बालू व कार्बन फिल्ट्रेशन यूनिट्स और रेलवे प्लेटफॉर्मों पर लगे वाटर बूथों की नियमित सर्विसिंग अनिवार्य है।
अभियान के तहत जीर्ण-शीर्ण पाइपलाइनों, रिसाव वाले जोड़ों, पुराने नलों और चोक हो चुके फिल्टरों को चिन्हित कर तत्काल बदला जा रहा है। जिन स्थानों पर पानी के दबाव या प्रवाह में बाधा पाई गई है, वहां नई पाइपलाइनें बिछाकर जलापूर्ति को निर्बाध बनाया जा रहा है ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।
कटड़ा, जम्मू तवी और अन्य स्टेशनों पर आरओ वेंडिंग व्यवस्था का विस्तार
जम्मू संभाग में धार्मिक पर्यटन का भारी दबाव रहता है। श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा, जम्मू तवी, शहीद कैप्टन तुषार महाजन (उधमपुर) और कठुआ जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर प्रतिदिन देश के कोने-कोने से हजारों तीर्थयात्री और पर्यटक पहुंचते हैं।
यात्रियों को किफायती दरों पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने और सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से मई 2026 में इन प्रमुख स्टेशनों पर आधुनिक रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) आधारित स्वचालित वाटर वेंडिंग मशीनें स्थापित की गई थीं। यात्री इन मशीनों से अपनी व्यक्तिगत बोतलों में नाममात्र के शुल्क पर ठंडा व शुद्ध आरओ जल भर सकते हैं। वर्तमान में चल रहा जल शोधन अभियान इस आरओ प्रणाली के साथ मिलकर स्टेशनों पर दोहरी जल सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है।
Jammu Railway Water Quality: निरंतर निगरानी से सुनिश्चित होगा यात्रियों का सुरक्षित सफर
उत्तर रेलवे जम्मू मंडल का यह सघन जल गुणवत्ता अभियान भारतीय रेल की उपभोक्ता-केंद्रित कार्यप्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण है। सामूहिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में स्वच्छ पेयजल केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के अधिकार से जुड़ा बुनियादी पहलू है। टैंकों की वैज्ञानिक सफाई, पाइपलाइनों के नवीनीकरण, खुले स्रोतों की मजबूत घेराबंदी और निरंतर प्रयोगशाला परीक्षणों ने यह सुनिश्चित किया है कि यात्रा के दौरान प्रत्येक बूंद अमृत समान शुद्ध रहे। प्रशासन का यह संकल्प है कि परीक्षणों की यह पारदर्शी व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी ताकि रेल यात्रियों को हर मौसम में सुरक्षित और स्वच्छ जल सहजता से उपलब्ध होता रहे।
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