NIT वारंगल की ओजोन तकनीक बाजार तक पहुंचेगी, संक्रमण नियंत्रण के लिए हुआ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौता

NIT Warangal Ozone Technology: NIT वारंगल की ओजोन तकनीक बाजार तक पहुंचेगी, संक्रमण नियंत्रण के लिए हुआ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौता

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NIT Warangal Ozone Technology: ओजोन कीटाणुशोधन तकनीक को व्यावसायिक उत्पादन तक पहुंचाने की पहल की गई है। अस्पतालों और दूसरे संस्थानों में कीटाणुशोधन के लिए विकसित स्वदेशी ओजोन तकनीक को बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने की दिशा में नया कदम उठाया गया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, वारंगल ने 5 नवंबर को MOHSoft Tech प्राइवेट लिमिटेड के साथ तकनीक हस्तांतरण समझौता किया। इसका उद्देश्य संस्थान के भौतिकी विभाग में तैयार शोध को व्यावसायिक उत्पादन और उपयोग तक पहुंचाना है।

समझौते के तहत कंपनी को इस तकनीक के निर्माण, विस्तार और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विपणन का अधिकार मिलेगा। संस्थान और कंपनी आगे भी अनुसंधान तथा विकास में सहयोग करेंगे। दोनों पक्ष स्वचालित और व्यावसायिक रूप से उपयोगी प्रणालियां विकसित करना चाहते हैं, ताकि प्रयोगशाला में तैयार समाधान को अलग अलग क्षेत्रों की जरूरत के अनुरूप ढाला जा सके।

ओजोन कीटाणुशोधन तकनीक में क्या है खास

संस्थान के अनुसार यह प्रणाली ओजोन के ऑक्सीकरण गुणों का उपयोग करती है। तय परिचालन परिस्थितियों में वायरस, बैक्टीरिया और दूसरे रोगजनकों को 99.9 प्रतिशत तक निष्क्रिय करने का दावा किया गया है। इस आंकड़े को हर जगह और हर परिस्थिति में समान परिणाम की गारंटी नहीं मानना चाहिए। वास्तविक प्रदर्शन उपयोग की प्रक्रिया, उपकरण और निर्धारित शर्तों पर निर्भर होगा।

ओजोन इस्तेमाल के बाद ऑक्सीजन में टूट सकती है। संस्थान ने इसे पारंपरिक रासायनिक कीटाणुनाशकों से जुड़े अवशेषों की चिंता घटाने वाला पहलू बताया है। हालांकि किसी पदार्थ का बाद में टूट जाना उसके इस्तेमाल के दौरान स्वतः सुरक्षित होने के बराबर नहीं है। ओजोन के संपर्क से स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं, इसलिए ऐसी प्रणालियों का उपयोग प्रशिक्षित कर्मियों और तय सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही किया जाना चाहिए।

किन क्षेत्रों में उपयोग की योजना

रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य सुविधाओं के अलावा सार्वजनिक संस्थानों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, सार्वजनिक परिवहन और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए भी प्रणाली विकसित करने की योजना है। इन स्थानों की जरूरतें एक जैसी नहीं होतीं। किसी अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण की प्रक्रिया और परिवहन वाहन की सफाई के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए तकनीक को हर जगह सीधे लागू करने के बजाय संबंधित मानकों और सत्यापन की जरूरत होगी।

NIT वारंगल के निदेशक प्रोफेसर बिद्याधर सुबुधि ने सहयोग को शोध के व्यावहारिक उपयोग की दिशा में कदम बताया। तकनीक विकसित करने वाले भौतिकी विभाग के प्रोफेसर डी हर्नाथ और प्रोफेसर आर राकेश ने ओजोन के गुणों पर आधारित प्रभावी समाधान तैयार करने की बात कही। कंपनी की ओर से सीईओ सुभा चगंती और सह संस्थापक श्याम ममिडी इस साझेदारी से जुड़े हैं।

उत्पादन कब शुरू होने की उम्मीद

कंपनी के अनुसार औद्योगिक ओजोन कीटाणुशोधन प्रणालियों के पहले बैच का व्यावसायिक उत्पादन अगले वर्ष की शुरुआत में होने की उम्मीद है। इसके बाद पायलट उपयोग की योजना है। यह संभावित कार्यक्रम है, वर्तमान में व्यापक तैनाती पूरी हो जाने की घोषणा नहीं। मरीजों के लिए भी इसे किसी बीमारी का इलाज या व्यक्तिगत चिकित्सा उपकरण मानना गलत होगा। समझौते का केंद्र संस्थागत कीटाणुशोधन और शोध को उत्पादन से जोड़ना है।

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