Diwali 2026: पटाखों के बिना दिवाली मनाने की अपील, रोशनी के साथ सेहत और जीवों की सुरक्षा पर जोर
Diwali 2026: पटाखों के बिना दिवाली मनाने की अपील, रोशनी के साथ सेहत और जीवों की सुरक्षा पर जोर
Diwali 2026: पटाखामुक्त दिवाली की अपील में उत्सव के साथ सेहत और जीवों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है। दिवाली की तैयारियों के बीच सामाजिक और आध्यात्मिक जागरूकता से जुड़ी संस्था गो स्पिरिचुअल ने लोगों से पटाखों के बिना त्योहार मनाने की अपील की है। संस्था के संस्थापक और फिल्मकार सोनू त्यागी ने 5 नवंबर को जारी संदेश में कहा कि उत्सव की खुशी दूसरों की तकलीफ की वजह नहीं बननी चाहिए। अभियान में रोशनी, आपसी मेलजोल, दान और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को उत्सव का केंद्र बनाने पर जोर दिया गया है।
संस्था का कहना है कि कुछ क्षणों की आतिशबाजी से निकलने वाला धुआं और अचानक होने वाले धमाके बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों तथा पशु पक्षियों के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं। उसने पटाखों को धार्मिक आस्था की अनिवार्य शर्त मानने के बजाय पारंपरिक दीये, प्रार्थना और परिवार के साथ समय बिताने जैसे विकल्प अपनाने को कहा है। यह एक सामाजिक अपील है, किसी नए सरकारी प्रतिबंध की घोषणा नहीं।
पटाखामुक्त दिवाली: धुएं और शोर से बचाव
अभियान में वायु और ध्वनि प्रदूषण दोनों का मुद्दा उठाया गया है। पटाखों से निकलने वाले सूक्ष्म कण सांस की मौजूदा परेशानी बढ़ा सकते हैं। संस्था ने विशेष रूप से अस्थमा के मरीजों और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे लोगों का ध्यान रखने को कहा है। आग और आंखों की चोट का जोखिम भी संदेश में शामिल है। किसी व्यक्ति को सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
तेज आवाज का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं रहता। संस्था ने बताया कि अचानक धमाकों से पालतू और आवारा पशु घबरा सकते हैं। डर में भागते समय उनके रास्ता भटकने या चोटिल होने की आशंका रहती है। इसलिए उत्सव की योजना बनाते समय आसपास मौजूद जीवों की सुरक्षा को भी जगह देने की बात कही गई है।
घर पर कैसे बदल सकता है उत्सव का तरीका
परिवार रोशनी की सजावट, रंगोली और साथ मिलकर भोजन तैयार करने को उत्सव का मुख्य हिस्सा बना सकते हैं। बच्चों को दीपक सजाने या जरूरतमंद लोगों के लिए छोटी मदद जुटाने जैसी गतिविधियों में शामिल करना भी एक विकल्प है। इससे त्योहार की तैयारी सामूहिक अनुभव बन सकती है और खुशी को केवल महंगी या शोर वाली चीजों से जोड़ने की जरूरत नहीं रहती।
दीये जलाते समय सामान्य अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। लौ को पर्दों, कागज और ढीले कपड़ों से दूर रखें तथा छोटे बच्चों को अकेले जलते दीपकों के पास न छोड़ें। विद्युत सजावट में खराब तारों और जरूरत से ज्यादा लोड से बचें। पटाखामुक्त उत्सव का अर्थ सुरक्षा की बाकी सावधानियां छोड़ देना नहीं है।
गो स्पिरिचुअल के संदेश का मूल विचार यह है कि दिवाली की चमक करुणा और जिम्मेदारी के साथ बढ़ सकती है। संस्था ने नागरिकों से अपने घर के साथ पड़ोस, पर्यावरण और जीवों के हित को ध्यान में रखकर उत्सव मनाने का आग्रह किया है।
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