LPG PNG Tax Structure: आपके रसोई बजट पर टैक्स का कितना बोझ? जानिए एलपीजी सिलेंडर से लेकर पीएनजी पाइपलाइन पर टैक्स के गणित का पूरा सच
LPG PNG Tax Structure: घरेलू गैस पर 5% तो कमर्शियल पर लगता है 18% GST
LPG PNG Tax Structure: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक उथल-पुथल और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन पर पड़े इस नकारात्मक असर की वजह से भारतीय बाजार में भी घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के दामों में हाल ही में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस महंगाई के बीच देश के व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी सीटीआई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर आम जनता के रसोई बजट को राहत देने के लिए एलपीजी और पीएनजी को पूरी तरह टैक्स फ्री करने की मांग उठाई है।
व्यापारियों का तर्क है कि यदि इन बुनियादी ईंधनों से टैक्स हटा दिया जाए, तो गैस की कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी। इस मांग के सामने आने के बाद आम उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर वर्तमान में हमारे घरों तक पहुंचने वाली गैस पर सरकार कितना टैक्स वसूलती है।
LPG PNG Tax Structure: लाल सिलेंडर पर कितना देना पड़ता है टैक्स, जानिए घरेलू और कमर्शियल एलपीजी पर जीएसटी के अलग नियम
करोड़ों भारतीय घरों की रसोई का मुख्य हिस्सा बन चुके लाल एलपीजी सिलेंडर पर लगने वाले टैक्स को समझने के लिए हमें मौजूदा माल एवं सेवा कर यानी जीएसटी व्यवस्था को देखना होगा। सरकार ने आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए घरेलू एलपीजी सिलेंडर को जीएसटी के सबसे निचले पायदान पर रखा है। वर्तमान नियमों के तहत घरेलू इस्तेमाल वाले गैस सिलेंडर पर केवल 5 फीसदी जीएसटी लगाया जाता है। यह 5 फीसदी टैक्स दो बराबर हिस्सों में विभाजित होता है, जिसमें ढाई फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार के पास केंद्रीय जीएसटी (CGST) के रूप में जाता है और शेष ढाई फीसदी हिस्सा संबंधित राज्य सरकार को राज्य जीएसटी (SGST) के रूप में मिलता है।
दूसरी ओर, व्यापारिक गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल यानी व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों पर टैक्स की दरें बिल्कुल अलग हैं। होटल, रेस्टोरेंट, हलवाई की दुकानों या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग किए जाने वाले भारी सिलेंडरों पर सरकार की तरफ से 18 फीसदी की दर से भारी-भरकम जीएसटी वसूला जाता है। यही कारण है कि घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में एक बहुत बड़ा अंतर हमेशा बना रहता है।
सिर्फ टैक्स नहीं, इन छिपे हुए खर्चों से भी तय होती है सिलेंडर की अंतिम कीमत
जब एक एलपीजी सिलेंडर गैस एजेंसी के गोदाम से निकलकर आपके घर की रसोई तक पहुंचता है, तो उसके लिए आप जो अंतिम कीमत चुकाते हैं, उसमें केवल गैस की मूल लागत और 5 फीसदी जीएसटी ही शामिल नहीं होता। इसके अलावा भी कुछ ऐसे अनिवार्य खर्च होते हैं जो उपभोक्ता की जेब पर असर डालते हैं।
सिलेंडर की कुल कीमत में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर का तय कमीशन और स्थानीय स्तर पर होने वाला माल ढुलाई का खर्च यानी लोकल ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट भी जोड़ा जाता है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा समय-समय पर डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन में बदलाव किया जाता है। सीटीआई के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि केंद्र सरकार इस 5 फीसदी जीएसटी को पूरी तरह से हटा देती है, तो उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर सीधे तौर पर 40 से 50 रुपये की राहत मिल सकती है। हालांकि, बाजार के जानकारों का यह भी मानना है कि अन्य गैर-जरूरी या लग्जरी वस्तुओं पर लगने वाले 18 से 28 फीसदी टैक्स के मुकाबले घरेलू गैस पर लिया जाने वाला 5 फीसदी का टैक्स काफी कम है।
शहरों में पीएनजी पर कैसे बदल जाता है टैक्स का खेल: राज्यों के हाथ में है असली कमान
अब बात करते हैं बड़े शहरों और कस्बों में तेजी से लोकप्रिय हो रही पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी की। घरों में सीधे पाइपलाइन के जरिए पहुंचने वाली इस गैस का टैक्स ढांचा एलपीजी के मुकाबले काफी पेचीदा और अलग है। इसका मुख्य कारण यह है कि प्राकृतिक गैस को अभी तक देश की एकीकृत जीएसटी व्यवस्था के दायरे से बाहर रखा गया है।
चूंकि पीएनजी पर जीएसटी लागू नहीं होता, इसलिए इस पर टैक्स लगाने और राजस्व वसूलने का पूरा अधिकार संबंधित राज्य सरकारों के पास सुरक्षित है। राज्य सरकारें अपने वित्तीय नियमों के अनुसार पीएनजी पर वैल्यू ऐडेड टैक्स यानी वैट वसूलती हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा और गुजरात जैसे अलग-अलग राज्यों में वैट की दरें एक समान नहीं हैं। राज्यों में यह टैक्स दर 5 फीसदी से लेकर 15 फीसदी या उससे भी अधिक हो सकती है। राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले इसी अलग-अलग टैक्स के कारण एक ही कंपनी की पीएनजी गैस के दाम अलग-अलग शहरों में काफी भिन्न नजर आते हैं।
LPG PNG Tax Structure: आगे क्या बदलाव होने की है उम्मीद
सीटीआई की तरफ से प्रधानमंत्री को लिखी गई चिट्ठी के बाद सोशल मीडिया से लेकर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों तक टैक्स माफी को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आम मध्यमवर्गीय परिवारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय महंगाई के इस दौर में अगर टैक्स में थोड़ी भी कटौती होती है, तो इससे महीने के बजट को संभालने में बड़ी मदद मिलेगी।
आने वाले समय में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के स्तर पर इस बात को लेकर लगातार मंथन चल रहा है कि प्राकृतिक गैस को भी जीएसटी के दायरे में शामिल किया जाए। यदि भविष्य में जीएसटी काउंसिल और केंद्र सरकार नेचुरल गैस को जीएसटी के तहत लाने का ऐतिहासिक फैसला करती हैं, तो पूरे देश में पीएनजी पर लगने वाला वैट खत्म हो जाएगा और उसकी जगह एक निश्चित टैक्स स्लैब ले लेगा। ऐसा होने से न केवल पूरे देश में पीएनजी की कीमतें एक समान हो जाएंगी, बल्कि उपभोक्ताओं को राज्यों के भारी टैक्स के बोझ से भी बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल उपभोक्ताओं की नजरें सरकार के अगले कदमों और तेल कंपनियों की पाक्षिक समीक्षा पर टिकी हैं।
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