SIP investment for children: जितनी जल्दी शुरू करें उतना बड़ा फंड बनेगा, कम पैसों में भी कमाल करती है कंपाउंडिंग की ताकत

SIP investment for children: जितनी जल्दी शुरू करें उतना बड़ा फंड बनेगा, कम पैसों में भी कमाल करती है कंपाउंडिंग की ताकत

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SIP investment for children: अगर आप अभी सोच रहे हैं कि “जब तनख्वाह थोड़ी और बढ़ेगी तब बच्चे के लिए निवेश शुरू करूंगा,” तो यह सोच आपके बच्चे के भविष्य को कमजोर कर सकती है। वित्त विशेषज्ञ एक बात बार-बार कहते हैं और वो यह है कि निवेश में सबसे कीमती चीज रकम नहीं, बल्कि समय है। SIP यानी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान में अगर जल्दी शुरुआत की जाए तो हर महीने महज पांच हजार रुपये भी 20 साल में एक बड़ी रकम में तब्दील हो सकते हैं। यह जादू कंपाउंडिंग का है और यह सबसे ज्यादा उन्हीं को फायदा देता है जो जल्दी शुरू करते हैं।

एक सामान्य परिवार की कहानी लें दो दोस्त हैं। एक ने अपने बच्चे के जन्म के साथ ही SIP शुरू की, दूसरे ने सोचा कि पांच साल बाद जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाएगा तब शुरू करेंगे। दोनों ने एक जितनी रकम लगाई। लेकिन जब बच्चे 20 साल के हुए तब पहले दोस्त के पास दूसरे से काफी ज्यादा पैसा था। यह कोई कहानी नहीं, यह कंपाउंडिंग का असली गणित है।

दरअसल, जब आप SIP में पैसा लगाते हैं, तो उस पर जो रिटर्न मिलता है वह अगले साल भी रिटर्न कमाता है। यह सिलसिला हर साल चलता रहता है। जितने ज्यादा साल यह चक्र चले, उतना बड़ा फंड बनता है। इसीलिए 20 साल की SIP, 15 साल की SIP से सिर्फ 5 साल ज्यादा नहीं होती, बल्कि फंड में अंतर कई गुना हो जाता है।

SIP investment for children: 5000 रुपये महीना, 20 साल और 12 फीसदी रिटर्न का हिसाब

इसे संख्याओं में समझना जरूरी है। मान लीजिए आप हर महीने 5000 रुपये की SIP शुरू करते हैं। सालाना रिटर्न 12 फीसदी मानें, जो इक्विटी म्यूचुअल फंड में लंबी अवधि में ऐतिहासिक रूप से संभव रहा है। 20 साल में आपने कुल 12 लाख रुपये लगाए होंगे। लेकिन कंपाउंडिंग के कारण यह रकम करीब 49 से 50 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकती है।

अब अगर यही SIP 15 साल की हो तो? तब कुल निवेश 9 लाख रुपये होगा और फंड करीब 25 लाख रुपये के आसपास बनता है। सिर्फ 5 साल की देरी ने फंड को लगभग आधा कर दिया। यही वजह है कि वित्त की दुनिया में एक बात बहुत मशहूर है कि “Don’t wait to invest, invest and then wait.”

माता-पिता की सबसे बड़ी गलती क्या है?

ज्यादातर माता-पिता निवेश को एक बड़े काम की तरह देखते हैं। उन्हें लगता है कि जब तक बड़ी रकम न हो, शुरुआत करने का मतलब नहीं। कुछ सोचते हैं कि पहले कर्ज चुकाएंगे, फिर घर बनाएंगे, फिर बच्चों के लिए सोचेंगे।

लेकिन यहां एक जरूरी बात है। बच्चे के लिए SIP कोई बड़ा वित्तीय फैसला नहीं है, यह छोटी सी आदत है। 1000 रुपये महीने से भी शुरुआत हो सकती है। जरूरी यह नहीं कि आप कितना लगा रहे हैं, जरूरी यह है कि आप लगा रहे हैं और नियमित लगा रहे हैं।

देर से बड़ी रकम लगाने की सोच एक मनोवैज्ञानिक जाल है। हम सोचते हैं कि बाद में दोगुना लगाकर भरपाई कर लेंगे। लेकिन यह गणित में काम नहीं करता। जो समय बीत गया, वो लौटता नहीं और उस दौरान कंपाउंडिंग का जो फायदा मिल सकता था, वो हमेशा के लिए चला जाता है।

SIP में निवेश करते वक्त किन बातों का ध्यान रखें?

पहली बात, SIP शुरू करने की उम्र जितनी कम हो उतना अच्छा। बच्चे के जन्म के साथ ही शुरू करें तो सबसे बेहतर। दूसरी बात, छोटी रकम से झिझकें नहीं। शुरुआत छोटी हो, लेकिन नियमित हो।

तीसरी और बेहद जरूरी बात, बीच में SIP मत रोकें। कई लोग त्योहार के मौसम में, शादी में या किसी खर्च की वजह से SIP रोक देते हैं। यह सबसे बड़ी गलती है। जब आप SIP रोकते हैं, तो सिर्फ एक महीने का पैसा नहीं रुकता, उस पैसे पर मिलने वाला अगले कई सालों का कंपाउंडेड रिटर्न भी रुक जाता है। चौथी बात, जैसे-जैसे आमदनी बढ़े, SIP की रकम भी बढ़ाते रहें। इसे SIP टॉप-अप कहते हैं और यह फंड को और तेजी से बढ़ाता है।

किस म्यूचुअल फंड में SIP करें?

यह सवाल हर माता-पिता के मन में होता है। लंबी अवधि के लिए बच्चों के फंड में इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड को ज्यादा उपयुक्त माना जाता है क्योंकि लंबे समय में ये बेहतर रिटर्न देते हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव जरूर आते हैं, लेकिन 15 से 20 साल की अवधि में यह जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।

कई म्यूचुअल फंड कंपनियां खासतौर पर बच्चों के लिए “चिल्ड्रन फंड” भी चलाती हैं जिनमें एक लॉक-इन पीरियड होता है। इससे माता-पिता बीच में पैसा निकालने के लालच से बचे रहते हैं। हालांकि, किसी भी फंड में निवेश से पहले किसी SEBI पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से बात जरूर करें। हर परिवार की जरूरत और जोखिम लेने की क्षमता अलग होती है।

SIP investment for children: क्या सिर्फ SIP ही काफी है?

SIP एक जरूरी हिस्सा है, पूरी योजना नहीं। बच्चे की उच्च शिक्षा, शादी या किसी जरूरी खर्च के लिए एक समग्र वित्तीय योजना बनानी चाहिए। इसमें बीमा, आपातकालीन फंड और SIP तीनों का संतुलन होना जरूरी है। SIP अकेले चमत्कार नहीं करती, लेकिन अगर इसे अनुशासन और धैर्य के साथ चलाया जाए तो यह सबसे भरोसेमंद रास्ता है अपने बच्चे के सपनों को पूरा करने का।

SIP investment for children: निष्कर्ष

पैसा कमाना मुश्किल है, लेकिन सही वक्त पर सही जगह लगाना उससे भी ज्यादा जरूरी है। अगर आपके घर में कोई छोटा बच्चा है और आपने अभी तक उसके नाम पर SIP शुरू नहीं की है, तो आज का दिन शुरू करने का सबसे सही दिन है। कल इंतजार करने से उस फंड का एक और महीना छोटा होता है।

समय एक बार बीत जाए तो वापस नहीं आता लेकिन अगर आपने समय को अपना साथी बना लिया, तो कंपाउंडिंग आपके लिए काम करती रहेगी, चुपचाप, हर महीने, हर साल।

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