Jharkhand Recruitment Reform Yatra: नेमरा से देवेंद्र नाथ महतो ने उठाई JPSC-JSSC में पारदर्शिता और पेपर लीक पर रोक की मांग

नेमरा से देवेंद्र नाथ महतो ने शुरू की यात्रा, JPSC-JSSC में पारदर्शिता की उठाई मांग

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Jharkhand Recruitment Reform Yatra:  झारखंड में राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक विवादों और नियुक्ति प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र आंदोलन ने अब एक नए और व्यापक जन-जागरण अभियान का रूप ले लिया है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में सोमवार को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ का औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह यात्रा राज्य के सभी 24 जिलों से होकर गुजरेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संपूर्ण परीक्षा प्रणाली में बुनियादी ढांचागत सुधार, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार-मुक्त पारदर्शी चयन प्रक्रिया की बहाली सुनिश्चित कराना है।
नेमरा गांव झारखंड की राजनीति और जन-आंदोलनों के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भावनात्मक स्थान रखता है, क्योंकि यह झारखंड आंदोलन के अगुआ और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की जन्मस्थली है। यात्रा का आगाज नेमरा स्थित लुकैयाटांड़ से दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने, साल के पवित्र पौधे का रोपण करने और सामूहिक राष्ट्रगान के साथ वैदिक व पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार किया गया।

Jharkhand Recruitment Reform Yatra: नेमरा से यात्रा की शुरुआत का प्रतीकात्मक संदेश और स्थानीय गतिरोध

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने यात्रा के आरंभिक स्थल के रूप में नेमरा को चुने जाने के पीछे का ऐतिहासिक संदर्भ स्पष्ट करते हुए कहा कि अलग झारखंड राज्य का गठन जिस जल, जंगल, जमीन और स्थानीय युवाओं के अधिकारों व स्वाभिमान की रक्षा के लिए हुआ था, आज उसी राज्य में युवा अपनी नौकरियों और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के लिए दर-दर भटकने को विवश हैं।
हालांकि, यात्रा की शुरुआत के दौरान लुकैयाटांड़ में उस समय कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई जब स्थानीय ग्रामीणों के एक गुट ने पारंपरिक हथियारों के साथ एकत्र होकर इस कार्यक्रम का विरोध करने का प्रयास किया। मौके पर तैनात पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की सूझबूझ व मध्यस्थता के बाद स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित किया गया। प्रशासन की अनुमति और सुरक्षा घेरे के बीच छात्र प्रतिनिधियों ने शांतिपूर्ण तरीके से सभा आयोजित की और दिशोम गुरु की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर यात्रा के पहले चरण का औपचारिक शंखनाद किया।

अभियान के मुख्य मुद्दे: पेपर लीक पर पूर्ण रोक, तय परीक्षा कैलेंडर और भ्रष्टाचार-मुक्त नियुक्तियां

झारखंड में पिछले कई वर्षों से आयोजित होने वाली जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में पेपर लीक, ओएमआर शीट में छेड़छाड़, परीक्षा केंद्रों में धांधली और परिणामों में अनियमितताओं के आरोपों के कारण दर्जनों परीक्षाएं रद्द हो चुकी हैं अथवा अदालती मुकदमों में फंसी हुई हैं। इस अनिश्चितता के कारण राज्य के लाखों होनहार अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा के माध्यम से छात्रों ने सरकार और आयोगों के समक्ष स्पष्ट मांगें रखी हैं:
  • प्रश्नपत्रों की छपाई से लेकर परीक्षा केंद्रों तक वितरण की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और फुलप्रूफ तकनीक से लैस किया जाए।
  • संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर JPSC और JSSC का एक निश्चित वार्षिक परीक्षा कैलेंडर (Exam Calendar) घोषित हो और उसका समयबद्ध पालन किया जाए।
  • परीक्षा के उपरांत पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अभ्यर्थियों की कार्बन कॉपी ओएमआर शीट, मास्टर प्रश्नपत्र और आधिकारिक आंसर की अनिवार्य रूप से सार्वजनिक की जाए।
  • किसी भी प्रकार की पैरवी, भ्रष्टाचार अथवा पेपर लीक में संलिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों व गिरोहों पर गैर-जमानती धाराओं के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो।

’24 जिले, 24 संकल्प, एक आवाज’: पूरे राज्य में छात्र संवाद की विस्तृत रूपरेखा

देवेंद्र नाथ महतो ने इस अभियान को ’24 जिले, 24 संकल्प, एक आवाज’ का नाम दिया है। तय कार्यक्रम के अनुसार यह यात्रा रामगढ़ जिले से प्रारंभ होकर हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहेबगंज, पाकुड़, जामताड़ा, धनबाद, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लातेहार, पलामू और गढ़वा होते हुए अंत में राजधानी रांची में एक विशाल छात्र महासम्मेलन के साथ संपन्न होगी।
प्रत्येक जिले के प्रमुख चौक-चौराहों, पुस्तकालयों और कोचिंग केंद्रों पर छात्र चौपालों का आयोजन किया जाएगा। यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों के स्थानीय अभ्यर्थियों से उनकी समस्याओं और परीक्षा संचालन संबंधी सुझावों को संकलित किया जाएगा। इन सभी सुझावों और शिकायतों का एक विस्तृत ‘छात्र मांग पत्र’ (Charter of Demands) तैयार कर राज्यपाल और मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा ताकि नीतिगत स्तर पर स्थायी सुधार लागू किए जा सकें।

युवाओं का मानसिक तनाव, संसाधनों की बर्बादी और स्थायी समाधान की दरकार

झारखंड के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों से आने वाले हजारों युवा वर्षों तक रांची और अन्य शहरों के छोटे-छोटे कमरों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। गरीब परिवारों द्वारा अपनी गाढ़ी कमाई और जमीन गिरवी रखकर बच्चों की कोचिंग की फीस भरी जाती है। किंतु जब परीक्षा के दिन पेपर लीक हो जाता है या परीक्षा रद्द होने का नोटिस आता है, तो युवाओं का मनोबल टूट जाता है और वे गहरे अवसाद में चले जाते हैं।
छात्र नेताओं का कहना है कि सिर्फ जांच समितियों का गठन कर देना या परीक्षा को अनिश्चितकाल के लिए टाल देना किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। जब तक संपूर्ण प्रशासनिक ढांचे की जवाबदेही तय नहीं होगी और आधुनिक डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली नहीं अपनाई जाएगी, तब तक व्यवस्था में पारदर्शिता लाना संभव नहीं है। युवाओं की मांग है कि राज्य के विकास और प्रशासनिक दक्षता के लिए योग्य व मेहनती उम्मीदवारों का समय पर चयन होना अनिवार्य है।

Jharkhand Recruitment Reform Yatra: सियासी बयानबाजी और भविष्य के छात्र आंदोलन की संभावित दिशा

इस यात्रा के शुरू होते ही राज्य के सियासी गलियारों में भी बयानबाजी तेज हो गई है। सत्ता पक्ष के प्रतिनिधियों का कहना है कि राज्य सरकार भर्ती प्रक्रियाओं को दुरुस्त करने के लिए पहले ही कड़े कानून और नियम बना चुकी है तथा कुछ लोग राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते छात्रों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने इस यात्रा को युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की वाजिब लड़ाई बताते हुए अपना नैतिक समर्थन दिया है।
देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया है कि यह यात्रा किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध में नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य और उनके सम्मान की रक्षा के लिए निकाली जा रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 24 जिलों में युवाओं का इस यात्रा को कितना जनसमर्थन मिलता है और राज्य सरकार इन मांगों पर क्या ठोस नीतिगत कदम उठाती है।

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