Share Market Today: लगातार दूसरे दिन गिरा बाजार, सेंसेक्स 189 अंक टूटा और निफ्टी 24,150 से नीचे, जानें रुपये और गिरावट की वजह
भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल के दबाव से बाजार में बिकवाली, रुपया 95.74 पर
Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में कमजोरी का रुख देखने को मिला। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, मध्य पूर्व में अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के चलते घरेलू संस्थागत व खुदरा निवेशकों ने सतर्कता का रुख अपनाया। इसके परिणामस्वरूप बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 दोनों ही प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुलकर दबाव में कारोबार करते नजर आए।
शुरुआती घंटी बजते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स लगभग 189 अंक लुढ़ककर 77,180 के स्तर के आसपास खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 भी 82 अंकों की गिरावट के साथ 24,136 के स्तर पर आ गया, जिससे यह 24,200 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। व्यापक बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी मिलाजुला रुख देखा गया।
Share Market Today: बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल का दबाव
दलाल स्ट्रीट पर बने इस नकारात्मक और सतर्क माहौल के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारक जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों की नई घोषणाओं को माना जा रहा है। अमेरिका द्वारा ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत सख्त आर्थिक कदमों की शुरुआत और तेहरान के कड़े रुख से वैश्विक निवेशकों के बीच जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite) कमजोर हुई है।
दूसरा महत्वपूर्ण कारण कच्चे तेल की कीमतें हैं। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 से 90 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें देश के चालू खाता घाटे (CAD) और घरेलू मुद्रास्फीति को प्रभावित करती हैं, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय इक्विटी से पूंजी निकालकर सुरक्षित संपत्तियों में लगाने को प्राथमिकता देते हैं। इसके अतिरिक्त एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी वॉल स्ट्रीट पर तकनीकी शेयरों में आई सुस्ती ने भी घरेलू बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
सेक्टोरल स्थिति और टॉप गेनर्स व लूजर्स का हाल
शुरुआती कारोबार में अलग-अलग सेक्टर्स में मिलाजुला रुख देखने को मिला। निफ्टी फार्मा, हेल्थकेयर और एफएमसीजी सेक्टर्स में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई, जिसमें सिप्ला, एचडीएफसी लाइफ, मैक्स हेल्थकेयर और अपोलो हॉस्पिटल्स के शेयर दबाव में कारोबार करते दिखे। दूसरी तरफ ऑटो और रियल्टी इंडेक्स में भी मुनाफावसूली का असर नजर आया।
इसके विपरीत आईटी और मेटल शेयरों ने बाजार को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की। टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और हिंडाल्को के शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखी गई। बैंकिंग इंडेक्स में मिलाजुला रुख रहा, जहां चुनिंदा निजी बैंकों में स्थिरता दिखी, वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) में हल्की गिरावट दर्ज की गई।
मुद्रा बाजार का अपडेट: डॉलर के मुकाबले रुपया 95.74 के स्तर पर स्थिर
विदेशी मुद्रा बाजार में भी सतर्कता का माहौल बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मजबूती और तेल आयातकों की निरंतर डॉलर मांग के बीच भारतीय रुपया 95.74 प्रति डॉलर के स्तर के आसपास सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।
मुद्रा विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नियमित अंतरालों पर किए जा रहे हस्तक्षेप के कारण रुपये में कोई बड़ी एकतरफा गिरावट देखने को नहीं मिल रही है। आने वाले कारोबारी सत्रों में रुपया 95.50 से 96.00 प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार कर सकता है। हालांकि यदि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कोई तेज उछाल आता है, तो इससे घरेलू मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
निफ्टी और सेंसेक्स के लिए प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी 50 के लिए 24,100 से 24,150 का दायरा एक महत्वपूर्ण तात्कालिक सपोर्ट (Immediate Support) के रूप में कार्य करेगा। यदि निफ्टी इस स्तर को तोड़कर नीचे आता है, तो 24,000 का स्तर अगला मजबूत बेस साबित होगा। वहीं ऊपरी स्तरों पर 24,300 और 24,350 का क्षेत्र कड़े रेजिस्टेंस (Resistance) के रूप में देखा जा रहा है।
सेंसेक्स के लिए 77,000 का स्तर एक मजबूत तकनीकी सहारा बना हुआ है। जब तक सूचकांक इन स्तरों के ऊपर बने रहते हैं, तब तक बाजार में किसी बड़ी घबराहट की आशंका नहीं है। हालांकि दैनिक ट्रेडर्स को सख्त स्टॉप-लॉस के साथ ही ट्रेडिंग पोजीशन लेने की सलाह दी गई है।
Share Market Today: निवेशकों के लिए बाजार विशेषज्ञों की रणनीति और अंतिम निष्कर्ष
बाजार के इस अनिश्चित और अस्थिर दौर में वित्तीय विश्लेषक खुदरा निवेशकों को किसी भी प्रकार के पैनिक सेलिंग से बचने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बुनियादी आधार, कम कर्ज और स्थिर नकदी प्रवाह (Cash Flow) वाली लार्जकैप कंपनियों में गिरावट के समय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना लंबी अवधि के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
म्यूचुअल फंड के जरिए नियमित एसआईपी (SIP) जारी रखने वाले निवेशकों के लिए ऐसे सुस्त और सुधारात्मक चरण यूनिट्स की औसत लागत को कम करने का बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अत्यधिक वैल्यूएशन वाले शेयरों से दूरी बनाए रखें और आने वाले हफ्तों में वैश्विक घटनाक्रमों तथा आर्थिक आंकड़ों के रुख को देखकर ही अपने पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव करें।
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