Health Tips: वीकेंड में नींद पूरी कर लेंगे… अगर आप भी सोचते हैं ऐसा, तो हो जाएं सावधान!

Health Tips: वीकेंड में नींद पूरी कर लेंगे... अगर आप भी सोचते हैं ऐसा, तो हो जाएं सावधान!

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Health Tips: सोमवार से लेकर शुक्रवार तक देर रात तक जागना, सुबह जल्दी उठना और फिर शनिवार-रविवार को जमकर सोना आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह रूटीन आम हो चुका है। काम के दबाव और लेट-नाइट तक स्क्रीन देखने की आदत के कारण बहुत से लोग हफ्ते भर की कम नींद की भरपाई वीकेंड में कुछ घंटे ज्यादा सोकर करने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करने से शरीर का सारा संतुलन ठीक हो जाता है और थकान छूमंतर हो जाती है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि क्या वाकई सिर्फ दो दिन ज्यादा सोकर पूरे हफ्ते के नुकसान की भरपाई की जा सकती है? हेल्थ एक्सपर्ट्स और हालिया रिसर्च इस धारणा को गलत साबित करती हैं।

Health Tips: कम नींद बनाती है शरीर में खतरनाक ‘स्लीप डेट’

जब किसी व्यक्ति को लगातार अपनी जरूरत के हिसाब से पूरी नींद नहीं मिलती है, तो शरीर में नींद की कमी धीरे-धीरे जमा होती जाती है। इसे चिकित्सा की भाषा में ‘स्लीप डेट’ यानी नींद का कर्ज कहा जाता है। वीकेंड में सामान्य से ज्यादा देर तक सोने पर आपको कुछ समय के लिए तरोताजा महसूस हो सकता है, लेकिन यह इस गंभीर समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं है। एक हालिया रिव्यू में यह बात सामने आई है कि वीकेंड की लंबी नींद से सुस्ती या मूड में थोड़ा सुधार तो हो जाता है, लेकिन यह पूरे हफ्ते की खराब स्लीप साइकिल के नुकसान को पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकती है।

बहुत देर तक सोना भी सेहत के लिए सही नहीं

वीकेंड में जरूरत से ज्यादा देर तक सोने से हमारे शरीर की प्राकृतिक बायोलॉजिकल क्लॉक गड़बड़ा जाती है। इससे सोने और जागने का नियमित समय पूरी तरह प्रभावित होता है, जिससे शरीर को एक नया झटका लगता है। यही वजह है कि सिर्फ शनिवार और रविवार को लंबी नींद लेने के बजाय हर दिन सोने का समय एक जैसा रखना ज्यादा जरूरी माना जाता है। हालांकि, नींद को लेकर हाल ही में हुए एक बड़े अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं, जिसमें चौहत्तर हजार के करीब लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। इस अध्ययन में यह देखा गया कि वीकेंड में नींद पूरी करने का सीधा संबंध किसी बड़ी बीमारी या मौत के जोखिम से नहीं जुड़ा है।

किस उम्र के लोगों को कितनी नींद है जरूरी?

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि नींद की जरूरत हर इंसान की उम्र के हिसाब से अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिए, तेरह से अट्ठारह साल के किशोरों को मानसिक और शारीरिक विकास के लिए हर दिन कम से कम आठ से दस घंटे की गहरी नींद लेनी चाहिए। पर्याप्त नींद मिलने से एकाग्रता बढ़ती है, चीजें बेहतर तरीके से याद रहती हैं और दिनभर शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है। अगर यही उम्र के किशोर अपनी नींद के साथ लगातार खिलवाड़ करते हैं, तो आगे चलकर उनकी इम्युनिटी और कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।

Health Tips: स्लीप रूटीन को सुधारने का सही तरीका क्या है?

यदि आप अपनी सेहत को दुरुस्त रखना चाहते हैं, तो सबसे जरूरी यह है कि पूरे सप्ताह सोने और उठने का समय लगभग एक जैसा ही रखा जाए। वीकेंड के दिनों में थोड़ी बहुत राहत या अतिरिक्त नींद ली जा सकती है, लेकिन इसे कभी भी अपनी खराब दिनचर्या की आदत नहीं बनाना चाहिए। शरीर को नियमित रूप से सही आराम मिलना ही अच्छी सेहत की असली चाबी है। आने वाले दिनों में अपनी लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करके आप कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। मामले की आगे की जानकारी अभी आनी बाकी है।

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