Bone Health Warning: शरीर में विटामिन डी की कमी से बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का खतरा, पहचानें इसके मुख्य लक्षण

Bone Health Warning: विटामिन डी की कमी, जानिए शरीर के शुरुआती संकेत

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Bone Health Warning: देश भर में बदलती जीवनशैली और लगातार बंद कमरों में काम करने की संस्कृति के बीच डॉक्टरों ने विटामिन डी की भारी कमी को लेकर एक बड़ा हेल्थ अलर्ट जारी किया है, जिसके अनुसार भारत की एक बहुत बड़ी आबादी इस समय इस जरूरी पोषक तत्व की कमी से जूझ रही है। शरीर में इस विटामिन का स्तर गिरने से न केवल हड्डियां कमजोर हो रही हैं, बल्कि यह लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।

Bone Health Warning: शरीर में सनशाइन विटामिन की कमी होने पर कौन से शुरुआती संकेत दिखते हैं

आज के दौर में हम अपनी सेहत को लेकर भले ही कितने सजग होने का दावा करें, लेकिन रोजमर्रा के खान-पान में जरूरी विटामिंस की अनदेखी हमें भारी पड़ रही है। मेडिकल रिपोर्टों के अनुसार, देश के बड़े महानगरों में रहने वाले कामकाजी लोगों में विटामिन डी की कमी एक आम समस्या बन चुकी है। इस विटामिन को चिकित्सा विज्ञान में सनशाइन विटामिन भी कहा जाता है क्योंकि हमारा शरीर सूरज की रोशनी के संपर्क में आने पर इसका निर्माण प्राकृतिक रूप से खुद करता है। जब शरीर में इसकी मात्रा कम होने लगती है, तो हमारी बॉडी कई तरह के धीमे और शुरुआती संकेत देना शुरू कर देती है जिन्हें लोग अक्सर सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

इस कमी का सबसे पहला और मुख्य असर हमारे एनर्जी लेवल यानी शरीर की ऊर्जा पर पड़ता है। अगर आप रात में सात से आठ घंटे की पूरी और अच्छी नींद ले रहे हैं, फिर भी सुबह उठते ही आपको सुस्ती, कमजोरी और पूरे दिन थकान महसूस होती है, तो यह इस बात का साफ इशारा है कि आपके खून में विटामिन डी का स्तर सामान्य से काफी नीचे चला गया है। यह पोषक तत्व कोशिकाओं के भीतर ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। इसलिए इसकी कमी होने पर व्यक्ति शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर खुद को पूरी तरह टूटा हुआ महसूस करने लगता है।

कैल्शियम को सोखने में क्यों जरूरी है यह विटामिन

हड्डियों की मजबूती के नाम पर ज्यादातर लोग सिर्फ कैल्शियम से भरपूर चीजें खाने पर ध्यान देते हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि अगर आपके शरीर में विटामिन डी मौजूद नहीं है, तो आपकी आंतें भोजन में से कैल्शियम को कभी सोख ही नहीं पाएंगी। जब शरीर में इस सनशाइन विटामिन की भारी कमी होती है, तो रक्त में कैल्शियम का स्तर बनाए रखने के लिए हमारा सिस्टम हड्डियों में जमा कैल्शियम को खींचना शुरू कर देता है। इसके परिणामस्वरूप पीठ के निचले हिस्से, घुटनों और पैरों की हड्डियों में लगातार मीठा-मीठा दर्द रहने लगता है। समय रहते अगर ध्यान न दिया जाए, तो हड्डियां इतनी खोखली और कमजोर हो जाती हैं कि मामूली सी चोट लगने पर भी फ्रैक्चर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

ओरल हेल्थ और दांतों पर इसका प्रभाव

हड्डियों के अलावा हमारे दांतों और मसूड़ों की सेहत भी पूरी तरह से विटामिन डी पर ही निर्भर करती है। अगर आपके मसूड़ों में बार-बार सूजन आ रही है, ब्रश करते समय खून निकल रहा है या दांतों में अचानक ठंडे-गर्म की झनझनाहट होने लगी है, तो इसकी एक बड़ी वजह विटामिन डी का कम होना हो सकती है। डेंटिस्ट्स के मुताबिक, मसूड़ों की बीमारियों और दांतों में बार-बार होने वाली कैविटी का सीधा संबंध शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और इस विटामिन की कमी से होता है। इसलिए डेंटिस्ट के पास चक्कर लगाने के साथ-साथ एक बार अपने खून की जांच करवाना भी बेहद समझदारी का फैसला माना जाता है।

बार-बार सर्दी-जुकाम होना और घाव का देरी से भरना कैसे देता है बीमारी का संकेत

विटामिन डी हमारे शरीर के भीतर एक सुरक्षा कवच यानी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है। यह हमारे शरीर की उन कोशिकाओं को सक्रिय करता है जो बाहर से हमला करने वाले हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस से लोहा लेती हैं। जिन लोगों के शरीर में इस विटामिन की कमी होती है, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद सुस्त पड़ जाती है। ऐसे लोग मौसम बदलते ही बहुत जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। अगर आपको भी साल में कई बार सर्दी, खांसी, जुकाम या फ्लू की शिकायत होती है और एक बार बीमार पड़ने के बाद ठीक होने में बहुत लंबा समय लगता है, तो इसका सीधा मतलब है कि आपके शरीर की अंदरूनी सेना कमजोर हो चुकी है और उसे विटामिन डी की तुरंत जरूरत है।

त्वचा के घाव भरने की धीमी रफ्तार

इस कमी का एक और बेहद हैरान करने वाला लक्षण है चोट या घाव का जल्दी साफ न होना। अगर आपके शरीर पर कोई मामूली कट लग गया है, या कोई ऑपरेशन हुआ है और उस घाव को पूरी तरह सूखने में हफ्तों का समय लग रहा है, तो यह शरीर के भीतर चल रही गड़बड़ी का बड़ा सबूत है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि विटामिन डी हमारे शरीर में नई त्वचा और मांस के निर्माण के लिए जरूरी कंपाउंड्स को बनाने में मदद करता है। इसकी कमी होने पर घाव भरने की प्राकृतिक गति बेहद धीमी हो जाती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।

Bone Health Warning: गिरते बाल और खराब मूड को ठीक करने के लिए अब आगे क्या करना होगा

महिलाओं में आजकल बाल झड़ने और एलोपेसिया यानी सिर के पैचेस में से बाल गायब होने की समस्या बहुत तेजी से देखी जा रही है। बहुत सी महिलाएं इसके लिए महंगे शैंपू, तेल और हेयर क्लिनिक के ट्रीटमेंट पर हजारों रुपये खर्च कर देती हैं, लेकिन फिर भी उन्हें कोई फायदा नहीं होता। स्किन स्पेशलिस्ट्स का कहना है कि बालों की जड़ों यानी फॉलिकल्स को उगने और मजबूत बने रहने के लिए विटामिन डी की सख्त जरूरत होती है। जब शरीर के भीतर ही इसकी कमी होगी, तो कोई भी बाहरी तेल या शैंपू बालों को गिरने से नहीं रोक पाएगा। इसलिए बालों के किसी भी महंगे इलाज पर पैसा लगाने से पहले एक बार डॉक्टर से मिलकर अपनी विटामिन डी की जांच जरूर करवा लेनी चाहिए।

शारीरिक लक्षणों के साथ-साथ यह विटामिन हमारे मानसिक स्वास्थ्य और मूड को भी गहराई से प्रभावित करता है। मस्तिष्क के भीतर मूड को अच्छा रखने वाले हार्मोन यानी सेरोटोनिन को बनाने में इस विटामिन की बड़ी भूमिका होती है। यही वजह है कि सर्दियों के दिनों में या जब लोग लंबे समय तक धूप से दूर रहते हैं, तो वे अकारण ही उदास, चिड़चिड़े और डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं।

इस गंभीर समस्या से बचने के लिए अब लोगों को अपनी दैनिक आदतों में सुधार करना होगा। रोज सुबह की हल्की और गुनगुनी धूप में कम से कम पंद्रह से बीस मिनट बिताना इसका सबसे आसान और मुफ्त उपाय है। इसके अलावा अपने खान-पान में अंडे की जर्दी, मशरूम, फैटी फिश और विटामिन डी से भरपूर दूध या अनाज को शामिल करना चाहिए। अगर जांच रिपोर्ट में विटामिन डी का स्तर बहुत ज्यादा कम आता है, तो बिना देरी किए किसी योग्य डॉक्टर की सलाह पर इसके सप्लीमेंट्स या कैप्सूल का कोर्स शुरू करना चाहिए। थोड़ी सी जागरूकता और सही समय पर लिया गया फैसला आपको जीवनभर की हड्डियों और जोड़ों के दर्द से पूरी तरह सुरक्षित रख सकता है।

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