Health Tips: कम उम्र में बुजुर्गों की तरह क्यों दर्द करने लगी है कमर? मोटापे के अलावा ये हैं 5 सबसे बड़े कारण, जानें बचाव के उपाय

Health Tips: कम उम्र में क्यों बुजुर्गों की तरह दर्द करने लगी है कमर?

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Health Tips: पहले के समय में कमर दर्द और पीठ दर्द (Back Pain) की समस्या को केवल बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था। उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ की हड्डी का कमजोर होना एक आम बात थी। लेकिन आज के समय में भारत की युवा आबादी तेजी से इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ रही है। 20 से 30 साल के युवा भी अब डॉक्टरों के पास बुजुर्गों की तरह कमर और पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।

युवाओं में बढ़ते कमर दर्द के पीछे मोटापा तो एक वजह है ही, लेकिन इसके अलावा हमारी बदलती जीवनशैली और काम करने के तरीके इसके सबसे बड़े जिम्मेदार हैं। आज के समय में ज्यादातर कंपनियां अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) यानी घर से काम करने की सुविधा दे रही हैं। घर पर काम करने के दौरान सही तरीके से न बैठने और लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम की वजह से युवाओं की रीढ़ की हड्डी पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

Health Tips: रीढ़ की हड्डी पर बढ़ रहा है दबाव

शारीरिक गतिविधियों में कमी, एक्सरसाइज न करना और बढ़ता हुआ मोटापा पीठ की मांसपेशियों में गंभीर अकड़न का मुख्य कारण बन रहा है। जब शरीर का वजन बढ़ता है और मांसपेशियां निष्क्रिय रहती हैं, तो रीढ़ की हड्डी पर सामान्य से कहीं अधिक दबाव पड़ता है। यह अतिरिक्त दबाव न केवल शारीरिक दर्द को बढ़ाता है, बल्कि युवाओं में मानसिक तनाव और स्ट्रेस की संभावना को भी काफी हद तक बढ़ा देता है। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो यह दर्द धीरे-धीरे व्यक्ति की पूरी दिनचर्या को प्रभावित करने लगता है और उठने-बैठने में भी दिक्कत पैदा कर देता है।

युवा पीढ़ी में कमर दर्द के 5 सबसे बड़े कारण

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने युवाओं में कमर दर्द और पीठ दर्द बढ़ने के पांच मुख्य कारणों को चिन्हित किया है, जो इस प्रकार हैं:

1. गलत पोश्चर में बैठना या खड़े होना (Bad Posture)

आज के दौर में काम करने की संस्कृति पूरी तरह बदल चुकी है। युवा घंटों तक लैपटॉप या कंप्यूटर के सामने बैठे रहते हैं। काम करते समय या मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते समय गलत तरीके से बैठने या खड़े होने से रीढ़ की हड्डी पर लगातार और असमान जोर पड़ता है। लगातार आगे की ओर झुककर काम करने या मोबाइल को नीचे झुककर देखते रहने से गर्दन और पीठ के निचले हिस्से (Lower Back) की मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जो बाद में गंभीर दर्द का रूप ले लेता है।

2. सुस्त और गतिहीन जीवनशैली (Sedentary Lifestyle)

आजकल के युवाओं का ज्यादातर समय ऑफिस की कुर्सी पर बैठकर या फिर बिस्तर पर लेटे-लेटे बीतता है। शारीरिक गतिविधियों (Physical Activities) में आई इस भारी कमी के कारण रीढ़ की हड्डी को सहारा देने वाली और उसे मजबूत रखने वाली मांसपेशियां धीरे-धीरे बेहद कमजोर हो जाती हैं। मांसपेशियों के कमजोर होने की वजह से पीठ में अकड़न और असहजता की समस्या लगातार बढ़ने लगती है।

3. अत्यधिक स्क्रीन टाइम और ‘टेक नेक’ की समस्या

स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट आज के युवाओं की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। गैजेट्स पर जरूरत से ज्यादा समय बिताने के कारण रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक आकार प्रभावित होता है। स्क्रीन को लगातार एक ही एंगल से देखने के कारण गर्दन में दर्द होने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘टेक नेक’ (Tech Neck) कहा जाता है। यही दर्द धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ता हुआ पीठ के निचले हिस्से और कमर तक पहुंच जाता है।

4. बढ़ता मोटापा और कसरत की कमी

शरीर का जरूरत से ज्यादा वजन होना सीधे तौर पर हमारी रीढ़ की हड्डी और जोड़ों पर दबाव को दोगुना कर देता है। मोटापे के कारण पेट और पीठ के आसपास की मांसपेशियां बहुत कमजोर हो जाती हैं। इसके कारण रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। जो युवा नियमित रूप से कसरत या व्यायाम नहीं करते हैं, उनके शरीर में वसा (फैट) जमा होने लगती है और मांसपेशियों का लचीलापन खत्म हो जाता है, जिससे दर्द बहुत तेजी से बढ़ता है।

5. मानसिक तनाव और खराब मानसिक स्वास्थ्य

मानसिक तनाव और कमर दर्द का बहुत गहरा संबंध है। जब कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा तनाव या स्ट्रेस में होता है, तो उसका सीधा असर शरीर की मांसपेशियों पर पड़ता है। तनाव के कारण गर्दन, कंधों और पीठ की मांसपेशियों में अपने आप खिंचाव और अकड़न पैदा होने लगती है। इसके साथ ही, तनाव के कारण व्यक्ति की नींद पूरी नहीं हो पाती है। पर्याप्त और अच्छी नींद न मिलने की वजह से मांसपेशियों की थकान दूर नहीं होती और दर्द का अहसास और ज्यादा बढ़ जाता है।

Health Tips: पीठ और कमर दर्द से बचने के आसान और अचूक उपाय

यदि आप भी कम उम्र में इस दर्द से परेशान हैं या इससे बचना चाहते हैं, तो डॉ. अनिल रहेजा की सलाह पर अपनी जीवनशैली में ये आसान बदलाव कर सकते हैं:

  • सही पोश्चर अपनाएं: बैठते या खड़े होते समय हमेशा अपनी पीठ को सीधा रखें। झुककर बैठने की आदत को तुरंत बदलें।
  • काम के बीच में लें ब्रेक: ऑफिस या घर पर काम करते समय लगातार घंटों तक न बैठें। हर 30 से 40 मिनट में अपनी सीट से उठें और एक छोटा सा ब्रेक लेकर थोड़ा टहलें।
  • नियमित व्यायाम और योग: अपने दैनिक जीवन में कसरत, स्ट्रेचिंग और योग को जरूर शामिल करें। इससे पेट और पीठ की मांसपेशियां मजबूत और लचीली बनती हैं।
  • स्क्रीन टाइम को करें सीमित: मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल केवल जरूरत के समय ही करें। बिना वजह घंटों तक सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करने से बचें।
  • आरामदायक कुर्सी का करें चुनाव: काम करते समय हमेशा ऐसी कुर्सी का इस्तेमाल करें जो आपकी पीठ और रीढ़ की हड्डी को सही सपोर्ट (Sahara) देती हो।
  • वजन को रखें नियंत्रित: संतुलित खानपान और सक्रिय जीवनशैली की मदद से अपने शरीर के वजन को नियंत्रित रखें ताकि रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
  • सही गद्दे का इस्तेमाल: सोते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपका गद्दार बहुत ज्यादा संभलने वाला या बहुत ज्यादा कड़ा न हो। रीढ़ की हड्डी को सीधा और सहारा देने वाले गद्दे पर ही सोएं।
  • भारी सामान उठाते समय रखें ध्यान: जमीन से किसी भी भारी चीज को उठाते समय अचानक झटका न दें और गलत तरीके से झुककर वजन उठाने से बचें।

Health Tips: कब डॉक्टर से संपर्क करना है बेहद जरूरी?

कमर दर्द को कभी भी मामूली समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जानकारों के मुताबिक, यदि आपकी पीठ या कमर का दर्द कई दिनों तक लगातार बना रहता है, या फिर पेनकिलर खाने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है, तो आपको बिना देर किए तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर या ऑर्थोपेडिक सर्जन से संपर्क करना चाहिए।

अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे और सकारात्मक बदलाव करके आप रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाले हानिकारक दबाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि नियमित रूप से की जाने वाली हल्की स्ट्रेचिंग और एक्सरसाइज रीढ़ की हड्डी की अकड़न को पूरी तरह समाप्त करने और आपको दोबारा चुस्त-दुरुस्त बनाने में सबसे ज्यादा मददगार साबित होती है।

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