Sensex Today: सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निफ्टी 23,700 के नीचे फिसला, जानें गिरावट की असली वजह

कच्चे तेल की तेजी, वैश्विक तनाव और FII बिकवाली से शेयर बाजार में लगातार पांचवें दिन गिरावट

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Sensex Today: शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारी गिरावट के साथ शुरुआत की। बाजार खुलते ही सेंसेक्स में 600 अंक से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 75,755 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी भी 23,700 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह करीब 9:55 बजे तक सेंसेक्स 811 अंक यानी 1.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,579 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 215 अंक यानी 0.90 प्रतिशत टूटकर 23,654 पर आ गया।

यह गिरावट लगातार पांचवें दिन जारी रही। पिछले चार कारोबारी दिनों में बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 481 लाख करोड़ रुपये से घटकर 477 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया। निवेशकों को करीब 4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। गुरुवार को ही बाजार में 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति डूब गई थी।

बाजार में गिरावट का मुख्य कारण क्या है

शेयर बाजार में इस भारी बिकवाली के पीछे कई वैश्विक और घरेलू वजहें सक्रिय हैं। सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमला किया, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आयात बिल बढ़ता है, मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है और कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ता है। यही वजह है कि निवेशक घबराकर शेयर बेच रहे हैं।

अमेरिका की नई टैरिफ नीति ने बढ़ाया डर

अमेरिका ने 60 से ज्यादा देशों से आने वाले आयात पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक का नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 24 जुलाई से प्रभावी हो गया। भारत को 10 प्रतिशत वाले निचले स्लैब में रखा गया है, जिसमें कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देश भी शामिल हैं। इस कदम से वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। निवेशक अब यह आशंका जता रहे हैं कि इससे निर्यात प्रभावित हो सकता है और कंपनियों की कमाई पर दबाव पड़ सकता है। बाजार में पहले से ही सावधानी का रुख था, इस नई घोषणा ने बिकवाली को और तेज कर दिया।

वैश्विक बाजारों में भी हाहाकार

अमेरिकी बाजारों में रात भर हुई भारी बिकवाली का असर एशियाई बाजारों पर साफ दिख रहा है। जापान का निक्केई इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज्यादा टूट रहा है। हांगकांग का हैंग सेंग भी करीब 3 प्रतिशत की गिरावट में है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स तो 5 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क गया है। जब वैश्विक बाजार इस तरह लाल निशान में हों, तो भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रह सकता। विदेशी संस्थागत निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में अमेरिकी बॉन्ड्स की ओर रुख कर रहे हैं।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर

अमेरिका में 10 साल के ट्रेजरी यील्ड 4.7 प्रतिशत के आसपास पहुंच गया है। ऊंची यील्ड पर विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड्स में लगा रहे हैं। इससे एफआईआई की बिकवाली लगातार जारी है। पिछले कुछ दिनों में विदेशी निवेशकों ने भारी मात्रा में शेयर बेचे हैं, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। घरेलू संस्थागत निवेशक कुछ हद तक सहारा दे रहे हैं, लेकिन विदेशी बिकवाली का असर ज्यादा हावी है।

सभी सेक्टर लाल निशान में

बाजार में गिरावट व्यापक है। लगभग सभी प्रमुख सेक्टर इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। रियल्टी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में है। मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक और ऑटो सेक्टर भी अच्छी-खासी गिरावट दिखा रहे हैं। प्राइवेट बैंक, एफएमसीजी और आईटी सेक्टर भी 0.60 प्रतिशत तक की गिरावट में हैं। कोई भी सेक्टर राहत देने वाला नजर नहीं आ रहा। भारी वजन वाले शेयरों में भी बिकवाली का रुख साफ दिख रहा है।

पिछले कुछ दिनों का रुझान

यह गिरावट अचानक नहीं आई है। गुरुवार को सेंसेक्स 363 अंक टूटकर 76,391 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 126 अंक की गिरावट के साथ 23,869 पर सिमट गया था। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स करीब 1,760 अंक यानी 2.3 प्रतिशत लुढ़क चुका है। निफ्टी में भी 465 अंक की गिरावट दर्ज की गई है। लगातार पांचवें दिन बाजार लाल निशान में खुला है, जिससे निवेशकों का मनोबल प्रभावित हो रहा है।

निवेशकों पर क्या असर पड़ रहा है

बाजार में लगातार गिरावट से छोटे और मझोले निवेशकों में घबराहट बढ़ गई है। जो निवेशक हाल के महीनों में ऊंचे स्तर पर आए थे, वे अब नुकसान में फंस गए हैं। मार्केट कैपिटलाइजेशन में 4 लाख करोड़ रुपये की कमी का मतलब है कि बड़ी संख्या में निवेशकों की संपत्ति घटी है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आगे चलकर महंगाई बढ़ा सकती हैं, जिससे रिजर्व बैंक की ब्याज दरों पर असर पड़ने की आशंका है। कंपनियों के कॉरपोरेट नतीजों पर भी दबाव पड़ सकता है।

Sensex Today: आगे बाजार का रुख क्या रह सकता है

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती और अमेरिकी-ईरान तनाव में कमी नहीं दिखती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। अगर अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है या तेल कीमतें कुछ हद तक स्थिर होती हैं, तो बाजार में कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल निवेशक सावधानी बरत रहे हैं और नई खरीदारी से परहेज कर रहे हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था (Sensex Today) की बुनियादी मजबूती अभी भी बनी हुई है, लेकिन अल्पकालिक दबाव वैश्विक घटनाक्रम से आ रहा है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे लंबी अवधि के नजरिए से सोचें और घबराहट में फैसले न लें। बाजार का रुख आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश प्रवाह और वैश्विक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।

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