Gold Price: सोने की कीमतों में सुस्ती के बाद क्या फिर लौटेगी तेजी? जानिए बाजार के जानकारों की क्या है राय
Gold Price: सोने के भाव में सुस्ती के बीच समझें पिछले 20 सालों का ऐतिहासिक सफर और जानें क्या आने वाले समय में 2 लाख पार जाएगा गोल्ड।
Gold Price: पीले धातु यानी सोने के भाव में इन दिनों नजर आ रही नरमी ने देश भर के निवेशकों की नींद उड़ा रखी है। बाजार पर नजर रखने वाले आम लोगों से लेकर बड़े निवेशकों के जेहन में एक ही सवाल बार-बार घूम रहा है कि क्या सोने की चमक अब फीकी पड़ने लगी है।
तेजी से ऊपर भागती कीमतों के बीच अचानक आई इस सुस्ती ने बाजार की रफ्तार पर जैसे ब्रेक लगा दिए हैं। लोगों के मन में यह आशंका घर कर रही है कि क्या वह पुरानी रफ्तार अब कभी वापस नहीं लौटेगी और क्या सोने के अच्छे दिन अब लद चुके हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि सर्राफा बाजार के उतार-चढ़ाव को केवल सतही तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके ऐतिहासिक रुझानों पर भी नजर डालनी जरूरी है।
Gold Price: पिछले दो दशकों में सोने की चाल का ऐतिहासिक सफर
यदि हम पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो यह साफ हो जाता है कि इस कीमती धातु ने लंबी अवधि में हमेशा अपने निवेशकों को निराश नहीं किया है। साल 2001 का दौर ऐसा था जब 10 ग्राम सोने के लिए महज 4500 रुपये चुकाने पड़ते थे। इसके ठीक एक दशक बाद यानी 2011 में यही सोना बढ़कर 29000 रुपये के स्तर पर पहुंच गया था।
समय का पहिया आगे बढ़ा और साल 2021 आते-आते 10 ग्राम सोने का भाव 48000 रुपये तक जा पहुंचा। इसके बाद के पांच वर्षों में तो इस धातु ने रिकॉर्ड तोड़ छलांग लगाई और कीमतें एक लाख रुपये के आंकड़े को पार कर गईं। हाल ही के दिनों में सोना अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई छूते हुए 1,69,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक चला गया था, जबकि मौजूदा समय में यह सुस्ती के बाद भी 1,40,000 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।
क्या है सोने की तेजी के पीछे की बुनियादी हकीकत?
जमीनी स्तर पर देखा जाए तो सोना एक दुर्लभ धातु है जिसकी मांग हमेशा बनी रहती है और इसकी यही दुर्लभता इसके दाम बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। इसे दुनिया भर में सबसे सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है। इतिहास गवाह है कि जब-जब दुनिया के सामने युद्ध, आपदा, महामारी या बड़े पैमाने पर आर्थिक मंदी जैसे संकट आए हैं, तब-तब सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग आसमान छूने लगी है।
पिछले पांच वर्षों के दौरान कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी, रूस-यूक्रेन संघर्ष, ईरान और इजराइल के बीच तनाव, और तमाम देशों के आपसी ट्रेड वॉर के कारण दुनिया भर में जो अनिश्चितता का माहौल बना, उसी का नतीजा था कि सोने के दाम अपने पिछले रिकॉर्ड स्तर से लगभग दोगुने हो गए।
किन चार बड़े ग्लोबल फैक्टर पर टिकी है सोने की चाल?
मौजूदा समय में सोने की कीमत में गिरावट के बाद भी 10 ग्राम के लिए 1,40,000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले दिनों में यह फिर से रॉकेट की रफ्तार पकड़ेगा? इस सवाल का सीधा जवाब अंतरराष्ट्रीय स्तर की चार प्रमुख आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
सबसे पहला अहम कारक ब्याज दरें हैं, क्योंकि सोने और ब्याज दरों का रिश्ता हमेशा से विपरीत दिशा में चलता है। जब तक दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखते हैं, तब तक सोने की कीमतों पर दबाव बना रहता है और भाव नीचे आते हैं, लेकिन जैसे ही दरों में कटौती शुरू होती है, सोने के दाम फिर से तेजी से ऊपर भागने लगते हैं।
दूसरा बड़ा पहलू अमेरिकी डॉलर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की खरीद-फरोख्त अमेरिकी डॉलर के आधार पर होती है, इसलिए यदि डॉलर इंडेक्स कमजोर होता है तो सीधे तौर पर सोने के बाजार में तेजी देखने को मिलती है।
तीसरा महत्वपूर्ण कारण केंद्रीय बैंकों द्वारा की जाने वाली खरीदारी है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई समेत दुनिया के कई अन्य केंद्रीय बैंकों ने अपने स्वर्ण भंडार को मजबूत करने के लिए भारी मात्रा में सोने की खरीदारी की है, जिससे इस धातु की चमक और बाजार में इसकी कीमत को बल मिला है।
चौथा और अंतिम कारक वैश्विक मांग और भू-राजनीतिक तनाव है। यदि दुनिया के किसी भी कोने में आर्थिक मंदी का खतरा मंडराता है या युद्ध जैसे हालात पैदा होते हैं, तो निवेशक सबसे पहले सुरक्षित ठिकाने के रूप में सोने का रुख करते हैं, जिससे इसकी कीमतें स्वतः बढ़ने लगती हैं।
Gold Price: आम निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में निवेश हमेशा से एक समझदारी भरा और सुरक्षित विकल्प माना जाता रहा है। अपने कुल निवेश पोर्टफोलियो का लगभग 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा सोने में सुरक्षित रखना हमेशा से वित्तीय मजबूती की निशानी रहा है।
चूंकि अभी बाजार में सोने के भाव कुछ कमजोर चल रहे हैं, इसलिए इसे नए निवेशकों के लिए खरीदारी का एक मुफीद और सुनहरा मौका माना जा रहा है। जो लोग लंबी अवधि के नजरिए से बाजार में उतरना चाहते हैं, उनके लिए यह समय बेहद अनुकूल साबित हो सकता है। जानकारों की सलाह यही होती है कि अल्पकालिक निवेश के दौरान होने वाले उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय लंबी अवधि का दृष्टिकोण रखना चाहिए, क्योंकि लंबे समय में सोना हमेशा निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न देता आया है।
Gold Price: क्या दो लाख के आंकड़े को पार कर जाएगा सोना?
फिलहाल 10 ग्राम सोना 1,40,000 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है, लेकिन निवेशकों के मन में यह सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या आने वाले वक्त में यह दो लाख रुपये के जादुई आंकड़े को भी पार कर सकता है। इस संबंध में बाजार के संकेत यही इशारा करते हैं कि यदि वैश्विक परिस्थितियां ऐसी ही बनी रहीं और लंबी अवधि के लिहाज से इसमें निवेश जारी रहा, तो भविष्य में सोने की कीमतें दो लाख के पार भी जा सकती हैं, इस संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
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