JPSC ACF Result: JPSC की कार्यप्रणाली पर उठे बड़े सवाल, त्रुटिपूर्ण प्रश्नपत्रों के बावजूद सहायक वन संरक्षक परीक्षा का परिणाम जारी

JPSC ACF Result: त्रुटिपूर्ण प्रश्नपत्र के बावजूद रिजल्ट जारी, आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल

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JPSC ACF Result: प्रतियोगिता परीक्षाओं के आयोजन को लेकर अपनी अजीबोगरीब कार्यप्रणाली के लिए चर्चा में रहने वाले झारखंड लोक सेवा यानी जेपीएससी (JPSC) ने एक नया कारनामा कर दिखाया है। आयोग ने एक ऐसी परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है जिसके प्रश्नपत्रों में व्याकरण और शब्दों की ऐसी भयंकर अशुद्धियां थीं, जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल है।

तमाम विरोध प्रदर्शनों और विवादों को ताक पर रखते हुए आयोग ने इस महीने सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया और साथ ही अगले चरणों की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य के युवाओं और प्रतियोगी छात्रों के बीच भारी रोष पैदा कर दिया है।

JPSC ACF Result: प्रश्नपत्रों में ऐसी गलतियां जो प्राथमिक स्तर पर भी हैरान करें

बीती छह अप्रैल को आयोजित की गई सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा की पहली पाली के दौरान सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में शाब्दिक और भाषाई त्रुटियों की भरमार देखने को मिली थी। हालात ऐसे थे मानो प्रश्नपत्र बिना किसी जांच-परख के आंखें मूंदकर तैयार कर दिए गए हों।

चारों अनिवार्य खंडों के लगभग हर एक प्रश्न में गंभीर अशुद्धियां पाई गईं। स्थिति यह थी कि सामान्य हिंदी शब्दों की वर्तनी तक गलत लिखी गई थी। उदाहरण के लिए, परीक्षा के दौरान ‘पुस्तक’ जैसे बेहद आम शब्द को ‘पुस्तख’ छाप दिया गया था।

इसके अलावा ऐतिहासिक और सामाजिक नामों तथा शब्दों के साथ भी भारी खिलवाड़ हुआ। प्रश्नपत्र में ‘सिदो-कान्हू’ को ‘सिडो कान्हू’ लिखा गया, जबकि ‘गठन’ की जगह ‘गढन’ और ‘महत्वपूर्ण’ को ‘महत्वपूर्न’ के रूप में छापा गया। व्याकरण और वर्तनी की यह अशुद्धियां यहीं नहीं रुकीं; ‘धारणाओं’ को ‘धरनाओं’, ‘टिप्पणी’ को ‘रिप्पणी’, ‘समुदाय’ को ‘समुदाथ’, ‘बुद्धिमता’ को ‘नुद्धिमता’ और ‘निर्माण’ को ‘निर्मान’ लिख दिया गया। एक जगह तो हद तब हो गई जब ‘चर्चा कीजिए’ की जगह ‘चर्च कीजिए’ और ‘कठोर’ की बजाय ‘कगेर’ तथा ‘दैनिक’ को ‘दैनिस’ छाप दिया गया।

शारीरिक जांच की तिथियों में बदलाव और आगे का कार्यक्रम

इन तमाम गंभीर गलतियों के सामने आने के बावजूद जेपीएससी ने बिना किसी आधिकारिक स्पष्टीकरण के इस परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया। इसके बाद सफल अभ्यर्थियों के लिए शारीरिक जांच की तारीखें तय की गईं।

शुरुआत में यह शारीरिक परीक्षण 28 और 29 जुलाई को होना था, लेकिन बाद में अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए आयोग ने इसकी तारीखों में फेरबदल कर दिया। अब यह शारीरिक जांच प्रक्रिया 17 और 18 अगस्त को आयोजित की जानी है। आयोग की तरफ से अभी तक इस प्रक्रिया को स्थगित करने या रद्द करने को लेकर कोई आधिकारिक रोक नहीं लगाई गई है, जिससे अभ्यर्थियों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।

JPSC ACF Result: आजसू पार्टी का आक्रामक रुख, सीबीआई जांच की मांग

इस पूरे प्रकरण के बीच राजनीतिक दलों ने भी जेपीएससी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रांची स्थित हरमू रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव सह पूर्व विधायक डॉ. लंबोदर महतो और मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने सरकार के सामने तीखे सवाल खड़े किए।

आजसू नेताओं ने मांग की है कि राज्य में हाल ही में आयोजित हुई 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा यानी पीटी में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं, इसलिए इस पूरी परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।

पार्टी नेताओं का आरोप है कि जेपीएससी ऐसी ब्लैकलिस्टेड निजी एजेंसियों की सेवाएं ले रही है जिन पर अन्य राज्यों में भी पहले से ही कार्रवाई और प्रतिबंध की तलवार लटकती रही है। टीडीपीएल नाम की इस निजी एजेंसी के माध्यम से परीक्षा का संचालन कराना अपने आप में एक गंभीर चिंता का विषय है। नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि परीक्षा के संचालन में एजेंसी की संदिग्ध भूमिका, आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष का इस्तीफा और जेपीएससी कार्यालय में सीआईडी की छापेमारी जैसी घटनाएं इस पूरे मामले को और अधिक संदेहास्पद बनाती हैं।

JPSC ACF Result: बाहरी अभ्यर्थियों के चयन को लेकर खड़े हुए गंभीर सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आजसू नेताओं ने परीक्षा परिणामों में धांधली का अंदेशा जताते हुए चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे। उन्होंने कहा कि यह बात आम चर्चा का विषय बन चुकी है कि सामान्य वर्ग की 50 सीटों के लिए जिन 1100 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है, उनमें से लगभग 400 अकेले हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों से ताल्लुक रखते हैं।

उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि झारखंड के स्थानीय युवाओं के अधिकारों को दरकिनार कर जिस तरह से खेल खेला जा रहा है, उसका जवाब यहां की व्यवस्था को देना होगा। जेपीएससी कार्यालय के बाहर लगातार हो रहे छात्रों और अभ्यर्थियों के धरना-प्रदर्शन इस बात की स्पष्ट गवाही दे रहे हैं कि युवाओं का राज्य के इस शीर्ष भर्ती आयोग से पूरी तरह भरोसा उठता जा रहा है।

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