Delhi Police NSA Powers: दिल्ली पुलिस के एनएसए अधिकारों पर सियासी घमासान, जानिए क्या है वायरल नोटिफिकेशन का पूरा सच और पुलिस की सफाई

Delhi Police NSA Powers: दिल्ली पुलिस के NSA अधिकारों पर सियासी बवाल, जानिए क्या है नोटिफिकेशन की सच्चाई

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Delhi Police NSA Powers: देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच एक प्रशासनिक आदेश ने राजनीतिक गलियारों में अचानक से हलचल तेज कर दी है। मामला राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए (NSA) से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर सोशल मीडिया से लेकर विपक्षी दलों के खेमों तक तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

कहा जा रहा है कि दिल्ली सरकार और उप-राज्यपाल के स्तर से पुलिस कमिश्नर को विशेष अधिकार सौंपे गए हैं, जिसके बाद से राजनीतिक दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। खासकर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस आदेश को लेकर सीधा हमला बोला है और इसे युवाओं की आवाज दबाने का एक जरिया बताया है। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले की असलियत क्या है और दिल्ली पुलिस ने इस पर क्या आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की है।

क्या है पूरा मामला और आदेश की मुख्य बातें?

गृह विभाग के पुलिस-II प्रभाग की तरफ से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था, जिसके मुताबिक दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट-1980 की धारा 3(2) के तहत हिरासत में लेने वाला यानी डिटेनिंग अथॉरिटी नियुक्त किया गया है। यह प्रशासनिक अधिकार 19 जुलाई से शुरू होकर आगामी तीन महीने यानी 18 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगा।

गृह विभाग में उप-सचिव रमेश कुमार के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में एनएसए की धारा 3(3) और धारा 2(e) का हवाला दिया गया है। हालांकि, इस नोटिफिकेशन के सामने आते ही सियासी गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ गई कि क्या राजधानी के भीतर यह कड़ा कानून लागू कर दिया गया है।

कांग्रेस का तीखा हमला, रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उठाए सवाल

इस आदेश के सार्वजनिक होने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर तीखे जुबानी हमले किए। पार्टी के राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गजट नोटिफिकेशन को साझा करते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए।

उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि जो युवा सड़कों पर अपने उज्ज्वल भविष्य और अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे हैं, उन्हें सरकार द्वारा कथित तौर पर देशद्रोही ठहराया जा रहा है। सांसद ने आरोप लगाया कि बिना किसी तत्काल मुकदमे या सुनवाई के लोगों को लंबे समय तक सलाखों के पीछे रखने की यह ताकत तानाशाही का प्रतीक है। उनके मुताबिक, अगर देश का पढ़ने-लिखने वाला युवा तबका व्यवस्था के सामने असुरक्षित महसूस कर रहा है, तो यह मौजूदा प्रशासन की विफलता को दर्शाता है।

दिल्ली पुलिस की सफाई: इसे छात्र आंदोलन से न जोड़ें

विपक्ष के मुखर विरोध और सोशल मीडिया पर फैल रही तमाम अटकलों के बीच दिल्ली पुलिस ने त्वरित रुख अपनाते हुए स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया है। पुलिस महकमे की तरफ से आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए यह साफ किया गया कि एनएसए से जुड़े इन अधिकारों का नवीनीकरण एक नियमित तिमाही प्रशासनिक प्रक्रिया है।

पुलिस का कहना है कि इस आदेश का वर्तमान में चल रहे सीजेपी (CJP) के छात्र विरोध-प्रदर्शनों से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। यह कानूनी प्रक्रिया इन प्रदर्शनों के शुरू होने से पहले ही तय हो चुकी थी। अधिकारियों ने आम नागरिकों और मीडिया से यह अपील की है कि वे किसी भी तरह की भ्रामक या अधूरी जानकारियों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक बयानों पर ही ध्यान दें।

क्या पूरी दिल्ली में लागू हो गया है एनएसए?

अधिकारियों की तरफ से दी गई तकनीकी जानकारियों के मुताबिक, इस हालिया नोटिफिकेशन का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पूरी राष्ट्रीय राजधानी में अचानक से कोई नया या कठोर कानून थोप दिया गया है। न ही इसके जरिए शहर भर में किसी तरह की नई पाबंदियां लगाई गई हैं।

वास्तव में, यह आदेश केवल पुलिस कमिश्नर को एक वैधानिक शक्ति प्रदान करता है जिसके तहत वे कानून और व्यवस्था की विशेष परिस्थितियों में, सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, एहतियाती हिरासत (प्रिवेंटिव डिटेंशन) से जुड़े प्रावधानों का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया है जो समय-समय पर प्रशासनिक जरूरतों के तहत अमल में लाई जाती है।

Delhi Police NSA Powers: क्या है नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA)?

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह समझना भी जरूरी हो जाता है कि आखिर यह कानून है क्या और यह किस तरह काम करता है। एनएसए एक ऐसा कानूनी प्रावधान है जो सरकार को यह शक्ति देता है कि वह देश की सुरक्षा, कानून व्यवस्था बनाए रखने, या फिर समाज के लिए जरूरी आपूर्ति और सेवाओं को सुचारू रखने के विरुद्ध काम करने वाले संदिग्ध व्यक्तियों को एहतियात के तौर पर हिरासत में ले सके।

इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को तुरंत नियमित आपराधिक मुकदमे की प्रक्रिया से गुजारे बिना एक तय समय सीमा तक हिरासत में रखा जा सकता है, हालांकि इसके लिए भी कानून के भीतर सुरक्षा उपायों और समीक्षा समितियों के नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।

Delhi Police NSA Powers: आने वाले दिनों में क्या रहेंगे हालात?

फिलहाल, इस प्रशासनिक आदेश और राजनीतिक बयानबाजी के बीच जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा का कड़ा पहरा बना हुआ है। विपक्षी दल जहां इसे लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, वहीं प्रशासन का साफ कहना है कि कानून व्यवस्था को सुचारू रखना और नियमित प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करना उनकी प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत किस करवट बैठती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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