Multani Mitti History: मुल्तानी मिट्टी का सफर, मुल्तान से राजस्थान तक पहुंची रानियों की पसंद

Multani Mitti History: मुल्तानी मिट्टी का नाम पाकिस्तान के मुल्तान से जुड़ा है। जानें यह भारत कैसे आई, राजस्थान में व्यापार और रानियां इसे उबटन की तरह क्यों लगाती थीं।

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Multani Mitti History: मुल्तानी मिट्टी कई घरों में चेहरे की सफाई और ठंडक के लिए रखी जाती है। इसकी हल्की सोंधी गंध और पेस्ट बन जाने का गुण आम है, पर नाम और स्रोत कम लोग जानते हैं। यह मिट्टी भारत की मूल उपज नहीं मानी जाती। नाम पाकिस्तान के मुल्तान शहर से जुड़ा है, जहां से इसे निकाला और बेचा जाता था। विभाजन के बाद मुल्तान सीमा पार चला गया, लेकिन व्यापार राजस्थान के रास्ते भारत में बना रहा। पुराने समय में रानी-महारानियां इसे उबटन की तरह लगवाती थीं। आज भी जोधपुर, बीकानेर और आसपास के जिलों से यह बाजार तक पहुंचती है। साथ ही नकली मिट्टी भी बिकने लगी है।

Multani Mitti History: मुल्तान से नाम और भारत आने का रास्ता

मुल्तानी मिट्टी उसी क्षेत्र की मिट्टी मानी जाती है जहां मुल्तान शहर बसा है। वहां से निकालकर देशभर में बिक्री होती थी, इसलिए नाम मुल्तान से जुड़ गया। बाद में यह शहर पाकिस्तान में रहा, पर मांग भारत में कम नहीं हुई। मिट्टी राजस्थान तक पहुंचती है और वहीं से पूरे देश के बाजारों में जाती है। व्यापार का यह सिलसिला सालों से चल रहा है। स्रोत बदला, नाम वही रहा।

राजस्थान और दूसरे राज्यों में व्यापार

राजस्थान के जोधपुर, बीकानेर, नागौर, बाड़मेर और जैसलमेर में मुल्तानी मिट्टी का कारोबार सबसे ज्यादा बताया जाता है। यहीं से थोक आपूर्ति देश के दूसरे हिस्सों तक जाती है। गुजरात के कच्छ, मध्य प्रदेश के मुरैना और शिवपुरी तथा आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में भी इसका व्यापार होता है। स्थानीय व्यापारी इसे साफ कर पैक करते हैं। घरों और दुकानों तक यही श्रृंखला पहुंचाती है।

रानियां इसे सौंदर्य का साधन क्यों मानती थीं

शाही घरानों में मुल्तानी मिट्टी को त्वचा निखारने और ठंडक देने वाला उबटन माना जाता था। शरीर पर रगड़कर लगाने की प्रथा का जिक्र पुरानी बातों में मिलता है। गुलाब जल मिलाकर लगाना आम बताया जाता है। दावा यह था कि यह चेहरा साफ रखती है और गर्मी में राहत देती है। आज भी कई लोग इसे उसी पारंपरिक तरीके से फेस पैक की तरह लगाते हैं। उपयोग का आधार अनुभव और रीति रहा, आधुनिक प्रयोगशाला परीक्षण इस लेख की सामग्री में शामिल नहीं है।

मिट्टी में कौन से तत्व बताए जाते हैं

मुल्तानी मिट्टी में कैल्शियम, सिलिका, आयरन और मैग्नीशियम की उपस्थिति बताई जाती है। इसमें काओलिन भी होता है, जिससे त्वचा पर ठंडक का अहसास जुड़ा माना जाता है। हाइड्रेटेड एल्युमिनियम सिलिकेट को त्वचा के लिए उपयोगी बताया जाता है। इन्हीं खनिजों के कारण इसे उबटन और फेस पैक में जगह मिली। वैज्ञानिक दावों की विस्तृत पुष्टि अलग शोध का विषय है। घरेलू उपयोग में यही संरचना दोहराई जाती है।

Multani Mitti History: असली और नकली मिट्टी में फर्क कैसे करें

बाजार में नकली मुल्तानी मिट्टी भी बिक रही है। असली मिट्टी आमतौर पर हल्के क्रीम, बेज या प्राकृतिक मिट्टी जैसे रंग की होती है। पानी मिलाने पर आसानी से पेस्ट बन जाती है और उसमें मिट्टी जैसी स्वाभाविक गंध रहती है। रंग बहुत चमकीला हो या गंध कृत्रिम लगे तो सतर्क रहना चाहिए। चेहरे पर लगाने से पहले छोटी मात्रा में जांच लेना सुरक्षित माना जाता है। खरीदते समय स्रोत और पैकिंग पर ध्यान देना जरूरी है।

मुल्तानी मिट्टी का नाम मुल्तान से जुड़ा रहा और व्यापार राजस्थान होते हुए भारत के बाजार तक फैला। रानियां इसे उबटन मानती थीं, आज आम घरों में फेस पैक की तरह चलती है। खनिज संरचना ठंडक और सफाई से जोड़ी जाती है। नकली माल बढ़ने से पहचान सीखना जरूरी हो गया है। रंग, गंध और पेस्ट बनने का गुण अब भी सरल जांच हैं। इतिहास सीमाओं के पार का है, उपयोग स्थानीय और रोजमर्रा का बन चुका है। सही मिट्टी चुनकर पारंपरिक नुस्खा जारी रखा जा सकता है।

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