Indian Mango Export: भारतीय आमों का विदेशों में जलवा, एयर इंडिया ने 3 महीनों में एक्सपोर्ट किए 1,000 टन से ज्यादा आम, इन 2 किस्मों की रही भारी डिमांड
Indian Mango Export: एयर इंडिया ने 3 महीनों में एक्सपोर्ट किया 1000 टन आम
Indian Mango Export: पूरी दुनिया में फलों के राजा ‘आम’ के उत्पादन में भारत का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन अब भारतीय आम सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी मिठास का जादू बिखेर रहे हैं। देश की प्रमुख एयरलाइंस ‘एयर इंडिया’ ने हाल ही में भारतीय आमों के निर्यात (Export) को लेकर बेहद दिलचस्प और उत्साहजनक आंकड़े साझा किए हैं। एयर इंडिया ने मार्च से मई 2026 के बीच महज तीन महीनों के भीतर 1,000 टन से भी अधिक भारतीय आमों को दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाया है। यह निर्यात मुख्य रूप से महाराष्ट्र और गुजरात के बागानों से यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिम एशिया जैसे बड़े बाजारों में किया गया। एयरलाइन ने इन नाजुक फलों की ताजगी बनाए रखने के लिए खास ‘कोल्ड स्टोरेज’ और ‘कोल्ड-चेन’ क्षमता विकसित की है, जिससे विदेशी बाजारों में भारतीय आमों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है।
Indian Mango Export: अल्फोंसो और केसर- विदेशी बाजारों में इन 2 किस्मों की बादशाहत
यूं तो भारत में आम की हजारों किस्में पाई जाती हैं, लेकिन सात समंदर पार कुछ खास किस्मों की मांग सबसे ज्यादा रहती है। एयर इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल शिपमेंट के दौरान ‘अल्फोंसो’ और ‘केसर’ जैसी प्रीमियम किस्मों ने रिकॉर्ड तोड़ मांग दर्ज की है।
ये दोनों किस्में अपनी खास खुशबू, मिठास और बेहतरीन बनावट के लिए जानी जाती हैं। महाराष्ट्र का ‘अल्फोंसो’ और गुजरात का ‘केसर’ आम खासतौर पर लंदन, फ्रैंकफर्ट और न्यूयॉर्क जैसे शहरों के लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं।
Indian Mango Export: मुंबई बना एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा ‘हब’
पश्चिमी भारत में आम के बड़े उत्पादक क्षेत्रों (महाराष्ट्र और गुजरात) के करीब होने की वजह से मुंबई एयरपोर्ट विदेशों में आम भेजने का मुख्य केंद्र बन गया है। आंकड़ों की मानें तो सीजन के व्यस्त हफ्तों के दौरान एयर इंडिया ने अकेले मुंबई से लंदन हीथ्रो तक प्रति सप्ताह 180 टन तक आमों का निर्यात किया।
इसके अलावा, फ्रैंकफर्ट के लिए हर हफ्ते लगभग 40 टन आम भेजे गए। वहीं दुबई, नेवार्क और न्यूयॉर्क के जेएफके हवाई अड्डों के लिए प्रति सप्ताह लगभग 30 टन आमों का परिवहन किया गया। यह दिखाता है कि दुनिया के बड़े देशों में भारतीय आमों का इंतजार कितनी बेसब्री से किया जाता है।
आमों को ताजा रखने के लिए ‘हाई-टेक’ इंतजाम
आम एक ऐसा फल है जो जल्दी खराब हो सकता है, इसलिए इसे लंबी दूरी तक भेजने के लिए तापमान का सही होना बहुत जरूरी है। एयर इंडिया ने इस चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु समेत विदेशों में लंदन, फ्रैंकफर्ट और न्यूयॉर्क जैसे 14 महत्वपूर्ण हवाई अड्डों पर अत्याधुनिक ‘कोल्ड स्टोरेज’ और ‘एक्टिव कंटेनर’ की सुविधा तैयार की है।
शिपमेंट के दौरान तापमान को स्थिर रखने के लिए ‘कूल डॉली’ और ‘थर्मल ब्लैंकेट’ जैसे एडवांस उपकरणों का उपयोग किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि पेड़ से टूटने के बाद आम जिस क्वालिटी में था, विदेशी ग्राहकों की थाली तक भी वह उसी ताजगी के साथ पहुंचे।
भारतीय प्रवासियों के बीच गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल
एयर इंडिया के कार्गो प्रमुख रमेश मामिडाला ने बताया कि केवल तीन महीनों में 1,000 टन से अधिक आमों का ट्रांसपोर्ट करना यह दर्शाता है कि हमारी कोल्ड-चेन प्रक्रिया कितनी मजबूत है। उन्होंने कहा कि विदेशी उपभोक्ताओं, खासकर वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के बीच भारतीय आमों की मांग लगातार बनी रहती है।
यूरोप और अमेरिका जैसे बाजारों में भारतीय आबादी काफी ज्यादा है, जहां गर्मियों के महीनों में आम एक अनिवार्य फल बन जाता है। यही वजह है कि एयर इंडिया ने मार्च से मई के बीच कुल 3,300 टन समुद्री फल और अन्य सामानों के साथ-साथ रिकॉर्ड मात्रा में आमों का परिवहन किया।
Indian Mango Export: मसालों के कारोबार में थोड़ी सुस्ती, लेकिन आम ने मचाया तहलका
हाल ही में आई कुछ रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई थी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े मानकों की वजह से भारतीय मसालों के एक्सपोर्ट में थोड़ी सुस्ती देखी गई है, लेकिन आम के मामले में स्थिति बिल्कुल उलट है। भारतीय आमों की गुणवत्ता और स्वाद ने वैश्विक स्तर पर अपनी साख और मजबूत की है।
भारत की इस कामयाबी से न केवल विमानन क्षेत्र को लाभ हो रहा है, बल्कि महाराष्ट्र और गुजरात के हजारों किसानों को भी अपनी फसल का अंतरराष्ट्रीय दाम मिल रहा है। एयर इंडिया का यह सफल ऑपरेशन आने वाले सालों में अन्य भारतीय फलों के निर्यात के लिए भी नए रास्ते खोल सकता है।
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