राम जन्मभूमि परिसर में जलेंगे एक लाख से अधिक दीये, पांच जोन में बांटी गई जिम्मेदारी

राम मंदिर परिसर में 1 लाख दीये जलाने की तैयारी, 1000 स्वयंसेवक तैनात

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Ayodhya Deepotsav 2026: प्रभु श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में ऐतिहासिक दीपोत्सव को लेकर तैयारियां अब अपने चरम पर पहुंच गई हैं। इस बार भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में दीपों का ऐसा आलौकिक और विहंगम दृश्य देखने को मिलेगा, जो देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। दीपोत्सव के पावन अवसर पर समूचे राम जन्मभूमि परिसर को एक लाख से अधिक पारंपरिक मिट्टी के दीयों से जगमग करने की ऐतिहासिक योजना बनाई गई है। इस विशाल आयोजन को निर्बाध और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। पूरे परिसर को सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से पांच अलग-अलग जोन में विभाजित किया गया है, जहां लगभग एक हजार प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को दीप बिछाने और उन्हें प्रज्वलित करने का दायित्व सौंपा गया है। आगामी सात नवंबर को आयोजित होने वाले इस मुख्य दीपोत्सव के लिए मंदिर के गर्भगृह प्रांगण से लेकर कुबेर टीला और दर्शन मार्गों तक नयनाभिराम सजावट की जा रही है।

Ayodhya Deepotsav 2026: दीपोत्सव के दसवें वर्ष राम जन्मभूमि परिसर में दिखेगा भव्य नजारा

रामनगरी अयोध्या में राज्य सरकार और जनसहयोग से शुरू हुआ दीपोत्सव का यह उत्सव इस वर्ष अपने दसवें गौरवशाली वर्ष में प्रवेश कर रहा है। वर्ष 2017 से निरंतर नई ऊंचाइयों को छूने वाले इस दीपोत्सव में हर बार की तरह इस बार भी सरयू तट के घाटों के साथ-साथ श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर को आयोजन के सबसे प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित किया जा रहा है। मंदिर निर्माण के बाद यह पहला अवसर है जब परिसर के भीतर इतने बड़े स्तर पर दीये जलाने का संकल्प लिया गया है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस आयोजन को समयबद्ध और त्रुटिहीन ढंग से पूरा करने के लिए एक उच्चस्तरीय समन्वय बैठक की। यात्री सुविधा केंद्र (PFC) में आयोजित इस बैठक में ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्र, सचिव जगदीश आफले और जगन्नाथ गुलवे सहित प्रबंधन और तकनीकी टीम से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में दीपों की आपूर्ति, तेल-बत्ती का वितरण, अग्नि सुरक्षा प्रबंध और स्वयंसेवकों की शिफ्ट-वार जिम्मेदारियों पर बिंदुवार चर्चा कर कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया।

पांच जोन में बांटा गया संपूर्ण राम जन्मभूमि परिसर

दीप प्रज्ज्वलन के दौरान किसी भी प्रकार की अफरा-तफरी अथवा अव्यवस्था से बचने के लिए संपूर्ण मंदिर परिसर को पांच रणनीतिक क्षेत्रों में बांटा गया है। प्रत्येक क्षेत्र की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र प्रभारी और उनकी उप-टीमें नियुक्त की गई हैं। पहले जोन के तहत नवनिर्मित श्रीरामलला मंदिर का मुख्य प्रांगण, चारों ओर बना परकोटा, ग्रीन हाउस और यज्ञशाला का पवित्र क्षेत्र शामिल किया गया है। इस अति-महत्वपूर्ण क्षेत्र में अर्चक प्रमुख आचार्य केशव के मार्गदर्शन में 30 हजार से अधिक दीये प्रज्वलित किए जाएंगे।

दूसरे जोन में पौराणिक महत्व वाले कुबेर टीला, नव-निर्मित सप्तमंडपम, शेषावतार मंदिर, हुतात्मा स्मारक और ऐतिहासिक पंचवटी क्षेत्र को रखा गया है। इस विस्तृत जोन में चंदन क्षितिज और उनकी समर्पित टीम दीप प्रज्ज्वलन का मोर्चा संभालेगी। यहां भी लगभग 30 हजार से अधिक दीप जलाए जाने की तैयारी है। इस प्रकार मंदिर परिसर के इन दो प्रारंभिक और मुख्य आध्यात्मिक क्षेत्रों में ही 60 हजार से अधिक दीपों की दिव्य ज्योति प्रज्वलित होकर संपूर्ण आकाश को आलोकित करेगी।

दर्शन मार्ग से सीता रसोई तक जगमगाएंगे हजारों दीप

तीसरे जोन के अंतर्गत श्रद्धालुओं का वापसी दर्शन मार्ग, भव्य यात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी), पीएफसी प्लाजा और नल टीला का क्षेत्र सम्मिलित है। इस जोन में वरिष्ठ कार्यकर्ता पीपी मिश्र के कुशल नेतृत्व में 14 हजार से अधिक दीये रोशन किए जाएंगे। वहीं चौथे जोन का दायित्व भारतीय सेना के सेवानिवृत्त कैप्टन जेपी द्विवेदी और उनकी अनुशासित टीम को सौंपा गया है। इस हिस्से में यात्री सेवा केंद्र, अंगद टीला, सीता रसोई परिसर और भव्य रामानंदाचार्य प्रवेश द्वार सहित अन्य संपर्क स्थलों पर 13 हजार से अधिक दीप सजाए जाएंगे।

पांचवें जोन के रूप में नवनिर्मित सुगम श्रीराम जन्मभूमि पथ, मुख्य दर्शन गलियारा, नक्काशीदार सिंह द्वार और चरण पादुका क्षेत्र को निर्धारित किया गया है। यहां नरेंद्र सिंह और उनके सहयोगियों द्वारा लगभग 13 हजार दीये कतारबद्ध तरीके से जलाए जाएंगे। इन पांचों जोन में दीपों की इस प्रकार सजावट की जा रही है कि जन्मभूमि पथ पर कदम रखते ही श्रद्धालु स्वयं को त्रेतायुगीन अयोध्या के भक्तिमय वातावरण में महसूस करेंगे और मंदिर से बाहर निकलने तक उन्हें उत्सव का निरंतर आभास होता रहेगा।

एक हजार स्वयंसेवक और सुरक्षा बल संभालेंगे दीप प्रज्ज्वलन की व्यवस्था

एक लाख से अधिक दीयों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सजाना, उनमें तेल-बत्ती डालना और हवा के झोंकों से बचाते हुए एक साथ प्रज्वलित करना एक बड़ी संगठनात्मक और लॉजिस्टिकल चुनौती है। इसी को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने करीब एक हजार प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को जिम्मेदारी बांटी है। इन कार्यकर्ताओं को विभिन्न समूहों में विभाजित कर पहचान पत्र जारी किए गए हैं और उन्हें उनके आवंटित क्षेत्र के नक्शे सौंपे गए हैं।

इस पूरे महा-आयोजन के दौरान भीड़ नियंत्रण, कतार प्रबंधन और सुरक्षा घेरा बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस, प्रांतीय सशस्त्र बल (PAC) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान संयुक्त रूप से मुस्तैद रहेंगे। ट्रस्ट के समाचार प्रबंधक सुभाष चंद्र सिंह ने आश्वस्त किया है कि दीपोत्सव से जुड़ी सभी बुनियादी तैयारियां तय समय सीमा से पहले ही पूरी कर ली जाएंगी और सुरक्षा मानकों का अक्षरशः पालन किया जाएगा।

Ayodhya Deepotsav 2026: वैश्विक पटल पर रामनगरी की आध्यात्मिक आभा का प्रसार

अयोध्या का दीपोत्सव अब मात्र एक प्रांतीय या राष्ट्रीय पर्व नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक मंच पर भारतीय सनातन संस्कृति, शांति और सौहार्द की पहचान बन चुका है। प्रभु श्रीराम के अपने भव्य महल में विराजमान होने के बाद इस दसवें दीपोत्सव का महत्व करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों के लिए भावनात्मक रूप से अत्यंत गहरा है।

आगामी सात नवंबर की शाम जब गोधूलि वेला में राम जन्मभूमि परिसर के पांचों जोन एक साथ एक लाख दीपकों की स्वर्णिम रोशनी से जगमगा उठेंगे, तो वह दृश्य इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में दर्ज हो जाएगा। रामलला का गर्भगृह, गगनचुंबी शिखर, कुबेर टीले पर स्थित प्राचीन जटायु प्रतिमा और दर्शन पथ का कोना-कोना इस पावन ज्योति से आलोकित होकर भक्तों को एक अद्भुत अलौकिक अनुभूति प्रदान करेगा।

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