UPESSC Update: B.Ed वालों के लिए खुशखबरी, 50 फीसदी अंकों की अनिवार्यता खत्म, विषय चयन के नियम भी साफ
UPESSC Update: B.Ed वालों के लिए खुशखबरी, 50 फीसदी अंकों की अनिवार्यता खत्म, विषय चयन के नियम भी साफ
UPESSC Update: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने शिक्षक भर्ती की पात्रता शर्तों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों से उन अभ्यर्थियों को सीधी राहत मिली है, जिन्होंने 2011 या उससे पहले B.Ed में प्रवेश लिया था और स्नातक में 50 प्रतिशत अंक नहीं ला सके थे। साथ ही, विषय चयन, एकल विषय वाले अभ्यर्थियों और सोशल साइंस विषय को लेकर भी नए नियम स्पष्ट किए गए हैं। ये अपडेट शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि 2011 या उससे पहले B.Ed पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों पर स्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों की बाध्यता लागू नहीं होगी। इसके अलावा, स्नातक में किसी विषय को कम से कम दो वर्ष तक पढ़ने वाले अभ्यर्थियों का वह विषय मान्य माना जाएगा। एकल विषय (सिंगल सब्जेक्ट) वाले अभ्यर्थियों के लिए जल्द ‘Other’ विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे अपनी योग्यता के अनुसार आवेदन भर सकें।
B.Ed में प्रवेश लेने वालों को 50% अंकों की शर्त से कैसे राहत मिली है?
UPESSC ने साफ किया है कि वर्ष 2011 या उससे पहले B.Ed में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों के लिए स्नातक स्तर पर 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता लागू नहीं होगी। पहले कई अभ्यर्थी इस शर्त के कारण आवेदन नहीं कर पा रहे थे, भले ही उन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थान से B.Ed पूरा कर लिया हो। इस नई व्यवस्था से उन अभ्यर्थियों को फायदा होगा, जो NCTE के पुराने मानकों के तहत B.Ed में दाखिला ले चुके थे, लेकिन बाद में प्रतिशत की शर्त सख्त होने के कारण बाहर हो जाते थे।
यह राहत सिर्फ प्रतिशत की शर्त तक सीमित नहीं है। आयोग ने यह भी कहा है कि स्नातक स्तर पर किसी विषय को दो वर्ष तक पढ़ने वाले अभ्यर्थियों का वह विषय वैध माना जाएगा। यानी अगर किसी अभ्यर्थी ने स्नातक के पहले और दूसरे वर्ष में किसी विषय का अध्ययन किया हो, तो उसे उस विषय की पात्रता के लिए मान लिया जाएगा। इससे विषय संबंधी उलझन काफी हद तक कम हो जाएगी और अभ्यर्थी अपनी वास्तविक शैक्षणिक पृष्ठभूमि के अनुसार आवेदन कर सकेंगे।
एकल विषय वाले अभ्यर्थियों के लिए ‘Other’ विकल्प क्यों
कई अभ्यर्थियों ने स्नातक में केवल एक विषय (सिंगल सब्जेक्ट) पढ़ा होता है। ऐसे अभ्यर्थियों को आवेदन फॉर्म भरते समय विषय चयन में दिक्कत आती थी, क्योंकि उपलब्ध विकल्प उनकी योग्यता से मेल नहीं खाते थे। UPESSC ने इस समस्या को ध्यान में रखते हुए जल्द ही ‘Other’ विकल्प उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
इस विकल्प के आने के बाद एकल विषय वाले अभ्यर्थी अपनी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार विषय की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे आवेदन प्रक्रिया में होने वाली तकनीकी परेशानी कम होगी और योग्य अभ्यर्थी गलत विकल्प चुनने या आवेदन अधूरा छोड़ने से बच सकेंगे। आयोग ने संकेत दिया है कि यह सुविधा जल्द ही पोर्टल पर सक्रिय कर दी जाएगी, ताकि अभ्यर्थी समय पर अपना फॉर्म पूरा कर सकें।
सोशल साइंस विषय से आवेदन करने वालों को क्या नए नियम फॉलो करने होंगे?
सोशल साइंस विषय से आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए आयोग ने अलग से निर्देश जारी किए हैं। उन्हें आवेदन फॉर्म में उन्हीं विषयों को भरना होगा, जो उन्होंने स्नातक स्तर पर पढ़े हों। यानी फॉर्म में काल्पनिक या अतिरिक्त विषय लिखने की अनुमति नहीं होगी।
परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को सोशल साइंस के चार मुख्य विषयों (इतिहास, भूगोल, राजनीति शास्त्र और अर्थशास्त्र) में से किसी भी दो विषयों का चयन करने का विकल्प मिलेगा। इसका मतलब है कि आवेदन के समय अभ्यर्थी अपनी स्नातक की वास्तविक विषय-सूची देंगे, लेकिन परीक्षा में वे चार विषयों में से दो को चुनकर सवाल हल कर सकेंगे। यह व्यवस्था अभ्यर्थियों को अपनी मजबूत विषयों पर फोकस करने का मौका देगी और साथ ही पात्रता को लेकर पारदर्शिता भी बढ़ाएगी।
नियम अभ्यर्थियों के लिए कितना फायदेमंद है?
पहले कई अभ्यर्थियों के सामने यह समस्या आती थी कि उन्होंने किसी विषय को स्नातक के तीसरे वर्ष में छोड़ दिया था या सिर्फ दो वर्षों तक पढ़ा था। ऐसे में विषय की पात्रता विवादित हो जाती थी। UPESSC ने अब साफ कर दिया है कि स्नातक स्तर पर दो वर्ष तक पढ़ा गया विषय मान्य होगा।
इस नियम से उन अभ्यर्थियों को लाभ होगा, जिन्होंने स्नातक के दौरान किसी विषय को लगातार दो वर्षों तक अध्ययन किया हो। इससे विषय चयन में स्पष्टता आएगी और आयोग द्वारा बाद में आवेदन निरस्त किए जाने की संभावना भी कम होगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने अंकपत्र और मार्कशीट को ध्यान से देखें और उसी आधार पर विषय दर्ज करें।
इन बदलावों से किन अभ्यर्थियों को सबसे ज्यादा फायदा
इन नियमों से सबसे ज्यादा फायदा उन अभ्यर्थियों को होगा, जिन्होंने 2011 या उससे पहले B.Ed में प्रवेश लिया था और स्नातक में 50 प्रतिशत से कम अंक थे। इसके अलावा एकल विषय वाले अभ्यर्थी और सोशल साइंस से आवेदन करने वाले उम्मीदवार भी इन अपडेट से लाभान्वित होंगे।
अभ्यर्थियों को अब आधिकारिक वेबसाइट upessc.up.gov.in पर नियमित नजर रखनी चाहिए। ‘Other’ विकल्प उपलब्ध होते ही फॉर्म भरना शुरू कर देना चाहिए। साथ ही, स्नातक की मार्कशीट और B.Ed सर्टिफिकेट को तैयार रखें। सोशल साइंस के अभ्यर्थी अपने स्नातक के वास्तविक विषयों की सूची बना लें, ताकि फॉर्म भरते समय कोई गलती न हो।
ये बदलाव UPESSC द्वारा अभ्यर्थियों की वास्तविक कठिनाइयों को ध्यान में रखकर किए गए हैं। उम्मीद है कि इन नियमों के लागू होने से योग्य अभ्यर्थियों को शिक्षक बनने का अवसर मिलेगा और भर्ती प्रक्रिया और पारदर्शी बनेगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और किसी भी अनधिकृत स्रोत से फैलाई जा रही जानकारी से दूर रहें।
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