Vistadome Train: भारत की 5 खूबसूरत ट्रेनें, जिनमें कांच की छत से दिखेंगे पहाड़, झरने और हरी-भरी वादियां
भारतीय रेलवे के विस्टाडोम कोच में सफर के दौरान बड़ी खिड़कियों और पारदर्शी छत से प्राकृतिक नजारों का आनंद लिया जा सकता है।
Vistadome Train: अगर आप भी उन मुसाफिरों में से हैं जिन्हें सफर की मंजिल से ज्यादा रास्ते की खूबसूरती खींचती है, तो भारतीय रेल की विस्टाडोम ट्रेनें आपके यात्रा के नजरिए को हमेशा के लिए बदल सकती हैं। रेल की खिड़की के बाहर पीछे छूटते हरे-भरे पहाड़, गहरी वादियां, बादलों को छूते जंगल और अचानक नजर के सामने आ जाने वाले दूधिया झरने जब सीधे आंखों के सामने तैरते हैं, तो यह अहसास किसी यूरोपीय मुल्क की वादियों में घूमने से कम नहीं लगता। आधुनिक तकनीक और पर्यटकों की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किए गए ये विस्टाडोम कोच अब भारतीय पटरियों पर सफर को एक नया रोमांचक रूप दे रहे हैं।
Vistadome Train: क्या होती है विस्टाडोम ट्रेन और क्यों खास है यह अनुभव
विस्टाडोम असल में कोई अलग स्वतंत्र ट्रेन नहीं है, बल्कि भारतीय रेलवे द्वारा चुनिंदा खूबसूरत और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मार्गों पर चलने वाली ट्रेनों में जोड़ा गया एक खास डिब्बा है। इन कोचों को इस तरह से गढ़ा गया है कि सफर के दौरान यात्री का बाहर के नजारों से संपर्क एक पल के लिए भी न टूटे। इसकी छत मजबूत पारदर्शी कांच की बनी होती है और खिड़कियां सामान्य डिब्बों के मुकाबले काफी बड़ी और चौड़ी रखी जाती हैं। इसके अलावा भीतर लगी आरामदायक सीटें 180 डिग्री तक घूम सकती हैं, जिससे आप जिधर का नजारा देखना चाहें उधर अपनी कुर्सी घुमा सकते हैं। डिब्बे के पिछले हिस्से में बना ऑब्जर्वेशन लाउंज यात्रियों को पीछे छूटती पटरियों और वादियों को निहारने की खुली छूट देता है।
कालका-शिमला रूट पर पहाड़ों और देवदार के जंगलों का जादुई सफर
हिमाचल प्रदेश की वादियों में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कालका-शिमला हेरिटेज रूट पर विस्टाडोम का सफर सबसे खास माना जाता है। लगभग 96 किलोमीटर लंबे इस संकरे रेल मार्ग पर ट्रेन देवदार और चीड़ के घने जंगलों, 102 ऐतिहासिक सुरंगों और सैकड़ों मेहराबदार पुलों से होकर गुजरती है। जब कांच की छत के ऊपर से धूप छनकर अंदर आती है और बाहर की ऊंची-नीची पहाड़ियां आंखों के सामने से फिसलती हैं, तो ऐसा लगता है मानो समय ठहर गया हो। खासकर सर्दियों के दिनों में जब इन वादियों में हल्की बर्फबारी होती है, तो यह रूट पूरी तरह किसी विदेशी पोस्टकार्ड जैसा नजर आने लगता है।
मुंबई-पुणे मार्ग पर सह्याद्रि की हरियाली और मानसूनी झरने
महाराष्ट्र में मुंबई से पुणे के बीच चलने वाली डेक्कन एक्सप्रेस और डेक्कन क्वीन के विस्टाडोम कोच पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। यह ट्रेन जब खंडाला और लोनावला के मशहूर बोर घाट की चढ़ाई चढ़ती है, तो दोनों ओर सह्याद्रि पर्वतमाला की गहरी खाइयां और बादलों में लिपटी पहाड़ियां रोमांचित कर देती हैं। रास्ते में उल्हास नदी का बहाव और पहाड़ों की छाती चीरकर बहते झरने खिड़की के बेहद करीब महसूस होते हैं। मानसून और उसके ठीक बाद के महीनों में इस रूट की हरियाली देखते ही बनती है, जिसे निहारने के लिए लोग हफ्तों पहले से टिकट बुक कराते हैं।
मुंबई से मडगांव के सफर में कोंकण तट और समंदर का नजारा
कोंकण रेलवे को भारतीय इंजीनियरिंग का अजूबा कहा जाता है और जब इस रूट पर मुंबई से गोवा के मडगांव के लिए विस्टाडोम कोच में बैठकर सफर किया जाए, तो इसका आनंद दोगुना हो जाता है। जनशताब्दी और तेजस एक्सप्रेस में लगे इन डिब्बों से यात्रा करते हुए कोंकण की लाल मिट्टी, मीलों तक फैले नारियल और ताड़ के बाग, छोटी-बड़ी नदियां और विशाल पुल दिल जीत लेते हैं। समुद्र तट के समानांतर चलने वाले इस रास्ते पर प्रकृति का जो रूप दिखाई देता है, वह किसी भी यात्री के जेहन में लंबे समय तक ताजा रहता है।
न्यू जलपाईगुड़ी से अलीपुरद्वार तक डूआर्स के जंगलों की सैर
पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार पश्चिम बंगाल में न्यू जलपाईगुड़ी से अलीपुरद्वार के बीच चलने वाली विस्टाडोम ट्रेन वन्यजीव और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह रेल मार्ग डूआर्स क्षेत्र के घने जंगलों, महानंदा वन्यजीव अभयारण्य और चाय के अनगिनत बागानों के बीच से होकर निकलता है। तीस्ता और तोर्षा जैसी पहाड़ी नदियों के विशाल पुलों से गुजरते समय हिमालय की तलहटी का दृश्य अद्भुत लगता है। कई बार तो भाग्यशाली यात्रियों को घने पेड़ों के बीच से गुजरती ट्रेन की खिड़की से दूर हाथियों के झुंड और जंगली हिरण भी टहलते हुए दिख जाते हैं।
विशाखापत्तनम से अराकू घाटी के बीच सुरंगों और वादियों का रोमांच
आंध्र प्रदेश के तटीय शहर विशाखापत्तनम से अराकू घाटी तक चलने वाली ट्रेन का विस्टाडोम कोच दक्षिण भारत के सबसे लोकप्रिय रेल मार्गों में गिना जाता है। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर चढ़ती यह ट्रेन पूर्वी घाट की अनंतगिरि पहाड़ियों और दर्जनों घुमावदार सुरंगों से होकर अपना रास्ता बनाती है। रास्ते में सीढ़ीदार खेत, कॉफी के महकते बागान और प्रसिद्ध बोरा गुफाओं के आसपास की हरी-भरी घाटियां मुसाफिरों का मन मोह लेती हैं। बादलों के बीच से गुजरने का यह अनुभव हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है।
Vistadome Train: विस्टाडोम में सफर से पहले इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
अगर आप भी विस्टाडोम कोच में सफर की योजना बना रहे हैं, तो कुछ व्यावहारिक बातों को पहले से समझ लेना बेहद जरूरी है। इन डिब्बों में सीटों की संख्या सीमित होती है, आमतौर पर एक कोच में करीब 40 से 44 सीटें ही होती हैं। पर्यटन सीजन और छुट्टियों के दौरान यहां सीटें बहुत तेजी से भर जाती हैं, इसलिए आईआरसीटीसी के जरिए समय रहते पहले से टिकट बुक कर लेना समझदारी होती है। इसका किराया सामान्य चेयर कार की तुलना में कुछ अधिक होता है, लेकिन सफर के दौरान मिलने वाला विहंगम दृश्य और आराम इस अतिरिक्त खर्च को पूरी तरह सार्थक बना देता है।
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