Toxic Dating Trend: रिलेशनशिप में हैं फिर भी तलाश रहे हैं बैकअप, जानिए क्या है ‘Cushioning’ और कैसे यह तबाह कर रहा रिश्ते

Toxic Dating Trend: रिलेशनशिप में हैं फिर भी तलाश रहे हैं बैकअप, जानिए क्या है 'Cushioning' और कैसे यह तबाह कर रहा रिश्ते

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Toxic Dating Trend: आजकल रिलेशनशिप में एक नया शब्द चर्चा में है जिसे Cushioning कहा जा रहा है। नाम सुनकर सहारा देने जैसा लगता है लेकिन इसका मतलब उल्टा है। आप किसी के साथ कमिटेड रिलेशनशिप में हों और आपका पार्टनर चुपके से एक्स को मैसेज करे, डेटिंग ऐप पर प्रोफाइल एक्टिव रखे या किसी और से फ्लर्ट करे ताकि ब्रेकअप होने पर तुरंत दूसरा ऑप्शन तैयार रहे। इसी को कुशनिंग कहते हैं। एम्स दिल्ली की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. विधि पिलनिया और अन्य एक्सपर्ट्स इसे टॉक्सिक और धोखा मानते हैं।

Cushioning क्या होता है और यह घोस्टिंग से कैसे अलग है?

डेटिंग की दुनिया में घोस्टिंग और ब्रेडक्रंबिंग पुराने शब्द हो गए हैं। अब नया ट्रेंड कुशनिंग है। इसमें इंसान रिलेशनशिप में रहकर ही बैकअप तैयार करता है। यह दोस्ती नहीं बल्कि सोची-समझी प्लानिंग है। माना जा रहा है कि यह घोस्टिंग से ज्यादा खतरनाक है क्योंकि यहां व्यक्ति रिलेशनशिप में रहकर ही चीटिंग की तैयारी करता है। कमिटेड होने के बावजूद ऑप्शंस ओपन रखना और इमोशनल सपोर्ट कहीं और से लेना इस ट्रेंड का हिस्सा है। एक्सपर्ट्स इसे माइक्रो-चीटिंग की श्रेणी में रखते हैं।

कैसे पहचानें कि आपका पार्टनर कुशनिंग कर रहा है?

कई संकेत बता सकते हैं कि पार्टनर कुशनिंग कर रहा है। पहला है फोन में जरूरत से ज्यादा सीक्रेसी। पार्टनर फोन दिखाना बंद कर देता है, हमेशा उल्टा रखता है, पासवर्ड बदल देता है और मैसेज डिलीट करने लगता है। दूसरा संकेत है डेटिंग प्रोफाइल पर एक्टिव रहना। कमिटेड होने के बाद भी Tinder या Bumble जैसी ऐप पर प्रोफाइल रखना और सवाल पूछने पर बस ऐसे ही रखा है कहना। तीसरा है एक्स से जरूरत से ज्यादा नजदीकी। हम तो बस दोस्त हैं कहकर रोज रात लंबी चैटिंग करना और इमोशनल सपोर्ट हासिल करना। चौथा संकेत है फ्यूचर की बात से बचना। शादी, परिवार से मिलवाने या लॉन्ग टर्म प्लान पर बात आते ही टॉपिक बदल देना।

लोग कुशनिंग क्यों करते हैं?

कुशनिंग के पीछे कई कारण हो सकते हैं। ब्रेकअप के बाद अकेलापन फेस करना पड़ेगा, इसलिए पहले से सेफ्टी नेट तैयार रखना। खुद पर भरोसा नहीं होने के कारण बाहर से बार-बार वैलिडेशन चाहिए। रिलेशनशिप में कोई प्रॉब्लम है तो पार्टनर से बात करने की बजाय बाहर ऑप्शन ढूंढना आसान लगता है। कई लोग इसे स्मार्ट प्लानिंग समझते हैं लेकिन असल में इससे रिश्ता धीरे-धीरे खोखला होता जाता है। व्यक्ति न तो अपने करंट पार्टनर को पूरा दे पाता है और न ही बैकअप वाले के साथ ईमानदार रहता है।

क्या कुशनिंग को चीटिंग माना जाना चाहिए?

टेक्निकली इसमें फिजिकल रिलेशन नहीं होता इसलिए कई लोग इसे चीटिंग नहीं मानते। रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स इसे माइक्रो-चीटिंग कहते हैं। जब आप एक रिश्ते में होते हुए भी चुपके से किसी और को बैकअप के तौर पर रखते हैं, एक्स को मैसेज करते हैं, डेटिंग ऐप चालू रखते हैं या किसी और से फ्लर्ट करते हैं तो आप अपने पार्टनर से किए ईमानदारी के वादे को तोड़ रहे होते हैं। इसलिए इसे माइक्रो-चीटिंग कहा जाता है। डॉ. विधि पिलनिया और अन्य एक्सपर्ट्स इसे सीधा-सीधा टॉक्सिक और धोखा बताते हैं।

कुशनिंग से रिश्ते को कैसे बचाया जा सकता है?

कुशनिंग करने वाले को लगता है कि वो स्मार्ट है और सॉफ्ट लैंडिंग मिलेगी लेकिन असल में वह धीरे-धीरे अपना रिश्ता खोखला कर देता है। अगर रिश्ते में डाउट लग रहा है तो बैकअप ढूंढने की बजाय बैठकर बात करनी चाहिए। तय करें कि कमिटमेंट आपके लिए क्या है और क्या चीज आपके लिए धोखा है। ईमानदारी और खुली बातचीत से रिश्ते मजबूत होते हैं। बाहर ऑप्शन तलाशने से समस्या हल नहीं होती बल्कि और जटिल हो जाती है। दोनों पार्टनर्स को एक-दूसरे पर भरोसा और स्पष्ट संवाद रखना चाहिए।

कुशनिंग एक टॉक्सिक डेटिंग ट्रेंड है जिसमें रिलेशनशिप में रहते हुए बैकअप तैयार किया जाता है। एक्सपर्ट्स इसे माइक्रो-चीटिंग और धोखा मानते हैं। बातचीत और ईमानदारी से रिश्तों को बचाया जा सकता है।

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