Supreme Court: कोटा मामले में CJI की अहम टिप्पणी, याचिकाकर्ता को दी प्रदर्शन करने की सलाह
Supreme Court: कोटा मामले में CJI की अहम टिप्पणी, याचिकाकर्ता को दी प्रदर्शन करने की सलाह
Supreme Court में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों के रोटेशन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे गलत नंबर डायल कर रहे हैं और इस दौर में विरोध-प्रदर्शन करना चाहिए। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के कादीपुर विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी इस याचिका में 1952 से सीट आरक्षित रहने को चुनौती दी गई थी।
CJI सूर्यकांत ने याचिका पर क्या टिप्पणी की?
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि उन्होंने अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाया और इसके बजाय विरोध-प्रदर्शन क्यों नहीं किया। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “आप गलत नंबर डायल कर रहे हैं, यह तो विरोध-प्रदर्शनों का दौर है। शायद आपको भी ऐसा ही करना चाहिए।” याचिकाकर्ता के वकील ने जवाब दिया कि उनका विरोध करने का कोई इरादा नहीं है और ऊपर से उनका गला भी खराब है। यह टिप्पणी देश में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के संदर्भ में की गई। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।
याचिका में कादीपुर सीट के रोटेशन की क्या मांग की गई है?
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के 191-कादीपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता जगदीश सिंह ने याचिका दायर की थी। उन्होंने इस बात को चुनौती दी कि 1952 में हुए पहले चुनाव के बाद से सात दशकों से अधिक समय से यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित क्यों है। याचिकाकर्ता ने कहा कि इससे केवल चार-पांच परिवारों को ही फायदा हुआ है। उन्होंने मांग की कि कम से कम अधिकारियों को यह निर्देश दिया जाए कि वे विधानसभा सीटों के आरक्षण के लिए रोटेशन सिस्टम लागू करने पर विचार करें। ऐसी व्यवस्था पंचायत और नगर निकाय चुनावों में पहले से लागू है। उन्होंने तर्क दिया कि रोटेशन न होने से संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 19 का उल्लंघन होता है और मतदाताओं के विकल्प सीमित हो जाते हैं।
अदालत ने मतदान और आरक्षण पर क्या कहा?
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह मान लेना सही नहीं है कि मतदान जाति के आधार पर होता है। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यह तर्क इस धारणा पर आधारित है कि बहुसंख्यक समुदाय जाति या समुदाय के आधार पर वोट देगा, लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है। अदालत लोकतांत्रिक विकल्पों पर कोई न्यायिक फैसला नहीं सुना सकती। यह तय करना मतदाताओं का काम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी निर्वाचन क्षेत्र के आरक्षित होने से किसी व्यक्ति के मतदान के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता।
मतदान और चुनाव लड़ने के अधिकार पर कोर्ट की क्या राय रही?
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि आपका मतदान का अधिकार पूरी तरह सुरक्षित है। आप किसी भी समुदाय के उम्मीदवार को वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं। यह दावा करना कि आप अपने ही समुदाय के किसी उम्मीदवार को वोट नहीं दे सकते, कोई वैध तर्क नहीं है। इसके अलावा, चुनाव लड़ने का अधिकार किसी एक सीट तक सीमित नहीं है। आप चाहें तो अन्य गैर-आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों से भी चुनाव लड़ सकते हैं। पीठ ने याचिका में उठाए गए मुद्दों पर यह स्पष्ट किया कि आरक्षित सीट होने से मतदाता के अधिकार सीमित नहीं होते।
इस मामले का आगे क्या महत्व हो सकता है?
यह याचिका विधानसभा सीटों के लंबे समय तक आरक्षित रहने और रोटेशन की व्यवस्था से जुड़ी है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि एक ही सीट पर लंबे समय तक आरक्षण से कुछ परिवारों को ही फायदा होता है और मतदाताओं के विकल्प कम हो जाते हैं। अदालत ने हालांकि मतदान के अधिकार को सुरक्षित बताया और जाति आधारित वोटिंग की धारणा को खारिज किया। CJI की हल्की टिप्पणी ने सुनवाई को चर्चा में ला दिया। आगे देखना होगा कि कोर्ट इस याचिका पर क्या अंतिम आदेश देता है और रोटेशन की मांग पर क्या रुख अपनाता है।
सुप्रीम कोर्ट में कादीपुर सीट की आरक्षण याचिका पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने हल्के अंदाज में विरोध-प्रदर्शन की बात कही। अदालत ने मतदान के अधिकार को सुरक्षित बताया।
Read More Here:-
सिंगर Kanika Kapoor की 4 साल में टूटी शादी, पति गौतम से अलग होने का खुद किया ऐलान
UP Election 2027: गोरखपुर में नितिन नवीन का बड़ा दावा, यूपी में फिर बनेगी भाजपा की सरकार
बिहार में ₹1.5 लाख करोड़ निवेश का बड़ा प्लान, झारखंड से आएगा कच्चा माल, अनिल अग्रवाल की तैयारी