Nutrient Deficiencies: चॉकलेट, चिप्स या मीठा खाने की क्रेविंग क्यों होती है? न्यूट्रिशनिस्ट किरण कुकरेजा ने बताया शरीर में किस पोषक तत्व की कमी देती है ये संकेत

किरण कुकरेजा ने बताया किस क्रेविंग के पीछे कौन-सी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है

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Nutrient Deficiencies: अचानक चॉकलेट, आलू के चिप्स, मसालेदार नमकीन या कोई मीठी चीज़ खाने की तीव्र इच्छा होना एक आम अनुभव है। अधिकतर लोग इसे केवल जीभ के स्वाद या मन की इच्छा मानकर अनहेल्दी स्नैक्स खाकर शांत कर लेते हैं। हालांकि, न्यूट्रिशनिस्ट और हेल्थ एक्सपर्ट किरण कुकरेजा के अनुसार, ये अचानक होने वाली क्रेविंग्स सिर्फ मन की कोई इच्छा नहीं, बल्कि आपके शरीर द्वारा दिए जाने वाले महत्वपूर्ण संकेत हैं।

जब शरीर में किसी खास पोषक तत्व, मिनरल या विटामिन की कमी होने लगती है, तो मस्तिष्क उस कमी की भरपाई के लिए विशेष खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित होता है। अगर हम इन संकेतों को सही ढंग से समझें और अनहेल्दी जंक फूड्स की जगह सही प्राकृतिक विकल्पों का चुनाव करें, तो न केवल क्रेविंग्स शांत होंगी बल्कि शरीर को सही पोषण भी मिलेगा।

चॉकलेट खाने की क्रेविंग: मैग्नीशियम की कमी का संकेत

अचानक चॉकलेट या डार्क चॉकलेट खाने की तीव्र इच्छा का सीधा संबंध शरीर में मैग्नीशियम (Magnesium) की कमी से हो सकता है।

शरीर में मैग्नीशियम की भूमिका: मैग्नीशियम हमारी मांसपेशियों को आराम देने, नर्वस सिस्टम को संतुलित रखने, तनाव कम करने और कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन में मुख्य भूमिका निभाता है। तनावपूर्ण जीवनशैली, अपर्याप्त नींद और असंतुलित खान-पान के कारण शरीर में मैग्नीशियम का स्तर गिर जाता है।

अनहेल्दी विकल्प बनाम सही समाधान: यद्यपि कोको (Cocoa) में मैग्नीशियम होता है, लेकिन बाजार में मिलने वाली चॉकलेट्स में अत्यधिक रिफाइंड शुगर और सैचुरेटेड फैट होता है। इसकी जगह शरीर को मैग्नीशियम देने के लिए कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds), काजू, बादाम, पालक, हरी पत्तेदार सब्जियां, बीन्स और उबले चने जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

मीठा या मिठाई खाने की इच्छा: प्रोटीन की कमी का संकेत

दिन में या खाने के तुरंत बाद बार-बार मिठाई, पेस्ट्री या मीठा खाने का मन होना शरीर में प्रोटीन (Protein) की कमी को दर्शाता है।

ब्लड शुगर और प्रोटीन का संबंध: प्रोटीन हमारे पाचन को धीमा करता है और ब्लड शुगर के स्तर को स्थिर रखता है। जब आहार में प्रोटीन की मात्रा कम होती है, तो ब्लड शुगर तेजी से घटता और बढ़ता है। शुगर लेवल गिरते ही मस्तिष्क तुरंत क्विक एनर्जी के लिए मीठी चीजों की मांग करता है।

हेल्दी विकल्प: मिठाई खाने से तुरंत एनर्जी मिलती है, लेकिन थोड़ी देर बाद ब्लड शुगर क्रैश हो जाता है। इसकी जगह दही, भुना हुआ चना, उबले अंडे, पनीर, अंकुरित अनाज (Sprouts) या दालों का सेवन करें। ये विकल्प लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं और शुगर क्रैश से बचाते हैं।

चिप्स और नमकीन की क्रेविंग: इलेक्ट्रोलाइट्स और सोडियम का असंतुलन

नमकीन चीजें, चिप्स या प्रोसेस्ड सॉल्टी स्नैक्स खाने की बहुत ज्यादा इच्छा होना शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स (Sodium, Potassium, Magnesium) और पानी की कमी का संकेत होता है।

पसीना और डिहाइड्रेशन: अत्यधिक पसीना आने, कम पानी पीने या भारी वर्कआउट के बाद शरीर से आवश्यक मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं। शरीर इस संतुलन को बहाल करने के लिए नमकीन चीजों की मांग करता है।

हेल्दी विकल्प: पैक्ड चिप्स में ट्रांस-फैट और अत्यधिक प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। इसके स्थान पर ताज़ा नारियल पानी, सेंधा नमक मिला हुआ नींबू पानी, घर की बनी ताज़ा छाछ, भुना हुआ मखाना या खीरा-काकड़ी खाएं। इससे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन तुरंत सही हो जाता है।

ब्रेड, पेस्ट्री या बिस्कुट की इच्छा: सिंपल कार्ब्स और तत्काल ऊर्जा की मांग

मैदा, ब्रेड, पास्ता या बिस्कुट जैसे रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स खाने का मन होना शरीर में ऊर्जा (Energy) की कमी या अत्यधिक थकान को दर्शाता है।

कॉम्प्लेक्स कार्ब्स की आवश्यकता: रिफाइंड कार्ब्स बहुत जल्दी पचकर ब्लड शुगर बढ़ाते हैं और फिर उतनी ही तेजी से थकान लाते हैं।

हेल्दी विकल्प: रिफाइंड कार्ब्स की जगह कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स चुनें जो धीरे-धीरे पचते हैं। इसके लिए शकरकंद (Sweet Potato), ओट्स, ताजे फल (जैसे केला या सेब), ब्राउन राइस या मखाना एक बेहतरीन विकल्प हैं।

Nutrient Deficiencies: क्रेविंग्स को नियंत्रित करने और सेहत सुधारने के व्यावहारिक उपाय

पर्याप्त हाइड्रेशन: कई बार मस्तिष्क प्यास और भूख के संकेतों में भ्रमित हो जाता है। जब भी कोई क्रेविंग हो, सबसे पहले 1-2 गिलास सामान्य पानी पीकर 10 मिनट रुकें।

तनाव और नींद का प्रबंधन: नींद पूरी न होने पर कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) बढ़ता है, जिससे अनहेल्दी जंक फूड की क्रेविंग तेज होती है। रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें।

संतुलित थाली: अपनी मुख्य डाइट में फाइबर, प्रोटीन, हेल्दी फैट्स और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स का सही संतुलन रखें ताकि बार-बार भूख और क्रेविंग न हो।

क्रेविंग्स को दबाने या अनहेल्दी जंक फूड खाकर पेट भरने के बजाय शरीर के इन जैविक संकेतों को समझें। सही पोषण चुनकर आप न केवल अपनी क्रेविंग्स पर काबू पा सकते हैं, बल्कि अपनी दैनिक फिटनेस और ऊर्जा स्तर में भी बड़ा सुधार ला सकते हैं।

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