Delimitation Bill: 16 अगस्त से संसद का विशेष सत्र बुला सकती है सरकार, परिसीमन और महिला आरक्षण पर सियासी घमासान तेज
Delimitation Bill: संसद का विशेष सत्र 16 अगस्त से बुलाया जा सकता है। परिसीमन बिल और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी रस्साकशी जारी है।
Delimitation Bill: भारतीय राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है क्योंकि केंद्र सरकार लंबे समय से लंबित पड़े परिसीमन बिल को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यह तीन दिवसीय विशेष सत्र आगामी 16 से 18 अगस्त के बीच आयोजित किया जा सकता है, जिसका मुख्य एजेंडा देश में नए सिरे से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा तय करना और महिला आरक्षण विधेयक को अमलीजामा पहनाना है। हालांकि एक तरफ जहां सत्ता पक्ष इस बड़े विधायी कदम को उठाने की पूरी तैयारी में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने अभी तक इस पर अपनी पूरी सहमति नहीं दी है। संसद के मौजूदा मानसून सत्र के दौरान लगातार हो रहे हंगामे और गतिरोध के बीच सरकार की यह पहल राजनीतिक लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसके जरिए देश के चुनावी मानचित्र में ऐतिहासिक बदलाव होने की संभावना जताई जा रही है।
Delimitation Bill: विपक्षी दलों की आपत्तियां और संसद में जारी गतिरोध
केंद्र सरकार के इस संभावित कदम पर विपक्षी दलों का रुख अभी स्पष्ट रूप से सकारात्मक नजर नहीं आ रहा है, जिसके चलते सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। विपक्षी दलों का मानना है कि परिसीमन प्रक्रिया से दक्षिण भारत के राज्यों और कम जनसंख्या वृद्धि वाले क्षेत्रों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से कांग्रेस समेत कई अन्य विपक्षी दल संसद में इस मुद्दे पर सरकार से खुलकर जवाब मांगने की रणनीति बना रहे हैं। मानसून सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने कई अन्य मुद्दों को लेकर भी जोरदार हंगामा किया है, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक सरकार सभी दलों को भरोसे में नहीं लेती, तब तक इस बिल को पास कराना आसान नहीं होगा।
किरेन रिजिजू और राहुल गांधी की अहम बैठक के मायने
संसद में चल रहे भारी हंगामे और गतिरोध के बीच विपक्षी दलों के साथ आम सहमति बनाने की दिशा में सरकार ने भी सक्रिय प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसद भवन स्थित कार्यालय जाकर उनसे मुलाकात की है। लगभग पचास मिनट तक चली इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा भी वहां मौजूद थीं, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि सरकार चाहती है कि विशेष सत्र के दौरान बिना किसी बड़े हंगामे के विधायी कामकाज को पूरा किया जाए। हालांकि विपक्षी खेमे का साफ कहना है कि वे इस प्रस्तावित विधेयक से जुड़ी अपनी सभी चिंताओं का ठोस समाधान चाहते हैं, जिसके बाद ही वे अपना अंतिम रुख तय करेंगे।
क्या है परिसीमन विधेयक और इसके सियासी मायने
देश की प्रशासनिक और चुनावी व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित करने वाला परिसीमन विधेयक जनसंख्या के नवीनतम आंकड़ों पर आधारित है। इसके तहत लोकसभा और देश भर की सभी विधानसभाओं की भौगोलिक सीमाओं को नए सिरे से तय किया जाना है ताकि हर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व संतुलित हो सके। वहीं दूसरी ओर महिला आरक्षण विधेयक के तहत देश की सर्वोच्च पंचायत यानी लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई यानी तैंतीस प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। इन दोनों ही विधेयकों के लागू होने से भारतीय राजनीति की पूरी दिशा और दशा बदल सकती है, यही कारण है कि तमाम राजनीतिक दल इसे लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
Delimitation Bill: मानसून सत्र के हंगामे के बीच अन्य गर्माए हुए मुद्दे
संसद के इस सत्र में केवल विधायी कार्य ही नहीं बल्कि कई अन्य राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे भी पूरी तरह से हावी रहे हैं। विपक्षी दल पिछले कुछ दिनों से लगातार दो बड़े मामलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें से एक मामला जुलाई के आखिरी हफ्ते में हुए एक छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसे लेकर विपक्ष आक्रामक है। इसके अलावा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आए चंदे में कथित वित्तीय हेरफेर के आरोपों पर भी सदन के भीतर और बाहर तीखी बहस देखने को मिली है। इन तमाम मुद्दों के बीच संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर जोरदार प्रदर्शन भी किया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर का माहौल काफी गर्म रहने वाला है क्योंकि सरकार और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने एजेंडे को लेकर अडिग नजर आ रहे हैं। यदि आगामी सोलह अगस्त से विशेष सत्र की शुरुआत होती है, तो देश के नीति-निर्धारण से जुड़े इन बड़े फैसलों पर अंतिम मुहर लगने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। देश के संघीय ढांचे और चुनावी संतुलन को गहराई से प्रभावित करने वाले इन विधेयकों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच होने वाली यह रस्साकशी आने वाले भारतीय लोकतंत्र के भविष्य की रूपरेखा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाने जा रही है।
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