Pradeep Rawat: ‘गजनी’ फेम प्रदीप रावत के निधन की खबर निकली फर्जी, अभिनेता पूरी तरह स्वस्थ; महाभारत से बॉलीवुड और साउथ सिनेमा तक ऐसा रहा शानदार सफर

सोशल मीडिया पर वायरल अफवाह गलत, अभिनेता पूरी तरह स्वस्थ; जानिए उनका फिल्मी सफर

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Pradeep Rawat: बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता प्रदीप रावत को लेकर इंटरनेट पर एक चौंकाने वाली खबर वायरल हुई, जिसमें उनके निधन की बात कही गई। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स और कुछ गैर-जिम्मेदार मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि 74 वर्ष की उम्र में लंबे समय तक ब्लड कैंसर से जूझने के बाद उनका निधन हो गया है। हालांकि, सच्चाई इसके ठीक विपरीत है। प्रदीप रावत एकदम जीवित, पूर्णतः स्वस्थ और सुरक्षित हैं। उनके निधन और बीमारी से जुड़ी सभी खबरें पूरी तरह से फर्जी, भ्रामक और निराधार हैं।

बिना किसी आधिकारिक पुष्टि या तथ्य-जांच के फैलाई गई इस अफ़वाह ने उनके प्रशंसकों, परिजनों और संपूर्ण फिल्म इंडस्ट्री को गहरे सदमे में डाल दिया था। अभिनेता से जुड़े करीबी सूत्रों और इंडस्ट्री के साथियों ने स्पष्ट किया है कि प्रदीप रावत बिल्कुल ठीक हैं और अपने सामान्य जीवन का आनंद ले रहे हैं। भारतीय सिनेमा में इस तरह जीवित कलाकारों के निधन की झूठी खबरें फैलना चिंता का विषय है, लेकिन फैंस के लिए राहत की बात यही है कि उनके पसंदीदा विलेन ‘गजनी’ पूरी तरह सेहतमंद हैं।

Pradeep Rawat: सेना का सपना, बैंक की नौकरी और ‘महाभारत’ से मिला अभिनय का मंच

हरियाणा के अंबाला में जन्मे प्रदीप रावत का शुरुआती दौर में अभिनय की दुनिया में आने का कोई इरादा नहीं था। वे एक साधारण और अनुशासित परिवार से आते थे। उनके पिता भारतीय सेना (Indian Army) में कार्यरत थे, इसलिए प्रदीप रावत भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहते थे। उन्होंने इसके लिए तैयारी भी की, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें मध्य प्रदेश के जबलपुर में बैंक ऑफ इंडिया में क्लर्क की स्थाई सरकारी नौकरी मिल गई। एक सुरक्षित और अच्छी नौकरी होने के बावजूद उनका मन किसी रचनात्मक काम में लगा रहता था। इसी दौरान मुंबई में उनकी मुलाकात प्रसिद्ध अभिनेता और राज बब्बर के थिएटर ग्रुप ‘एकजुट’ (Ekjute Theatre Group) से हुई। थिएटर से जुड़ने के बाद उन्हें मंच कला और अभिनय की गहरी समझ मिली।

उनकी प्रतिभा और दमदार आवाज ने बीआर चोपड़ा (B.R. Chopra) की नज़रें अपनी ओर खींचीं। जब दूरदर्शन के ऐतिहासिक धारावाहिक ‘महाभारत’ के लिए कास्टिंग चल रही थी, तब प्रदीप रावत को गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र ‘अश्वत्थामा’ के बहुचर्चित किरदार के लिए चुना गया। 1988 में प्रसारित हुए इस धारावाहिक में उनके अभिनय, कड़क संवाद अदायगी और व्यक्तित्व को देश भर में जबरदस्त सराहना मिली। इस एक किरदार ने प्रदीप रावत को रातों-रात भारत के हर घर में पहचान दिला दी और बैंक की नौकरी पीछे छूट गई।

हिंदी सिनेमा में विलेन के रूप में पहचान: ‘गजनी’, ‘लगान’ और ‘सरफरोश’

‘महाभारत’ की अपार सफलता के बाद प्रदीप रावत ने भारतीय सिनेमा का रुख किया। यद्यपि उन्होंने कई तरह के किरदार निभाए, लेकिन निर्देशकों ने उनकी विशालकाय कद-काठी, गंभीर चेहरा और भारी-भरकम आवाज़ को खलनायक (Villain) की भूमिकाओं के लिए सबसे उपयुक्त माना।

  1. ‘सरफरोश’ (1999) और ‘गुलाम’ (1998): आमिर खान स्टारर फिल्म ‘सरफरोश’ में उन्होंने ‘सुल्तान’ नामक एक खतरनाक अपराधी का किरदार निभाया। इसके अलावा ‘गुलाम’ में भी उनकी भूमिका को काफी सराहा गया।

  2. ‘लगान’ (2001): आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में बनी और ऑस्कर के लिए नामांकित फिल्म ‘लगान’ में प्रदीप रावत ने ‘देवा’ का रोल निभाया था। देवा का किरदार एक ऐसे सिख पूर्व-सैनिक का था जो अंग्रेजों के खिलाफ क्रिकेट मैच खेलने के लिए भुवन की टीम में शामिल होता है। इस सकारात्मक और दमदार किरदार में उन्होंने साबित किया कि वे केवल नेगेटिव रोल तक सीमित नहीं हैं।

  3. ‘गजनी’ (2008) – आइकॉनिक खलनायक: भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी खौफनाक और यादगार विलेन की बात होती है, तो फिल्म ‘गजनी’ के मुख्य विलेन ‘गजनी धर्मात्मा’ का नाम शीर्ष पर आता है। ए.आर. मुरूगादॉस के निर्देशन में बनी इस ब्लॉकबस्टर फिल्म में प्रदीप रावत ने दोहरी भूमिका में मुख्य खलनायक का किरदार निभाया। उनके चेहरे के खौफनाक हाव-भाव और आमिर खान के साथ उनके एक्शन सीन्स ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे। इस रोल के लिए उन्हें कई अवॉर्ड्स और क्रिटिक्स की जबरदस्त तारीफ मिली।

साउथ इंडियन सिनेमा में दबदबा और अलग पहचान

बॉलीवुड में अपनी छाप छोड़ने के बाद प्रदीप रावत ने दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग (Telugu, Tamil, and Kannada Cinema) में कदम रखा। दिलचस्प बात यह है कि जितने चर्चित वे हिंदी सिनेमा में रहे, उससे कहीं अधिक सफलता और सम्मान उन्हें साउथ सिनेमा में मिला।

साल 2003 में महान निर्देशक एस.एस. राजामौली (S.S. Rajamouli) की सुपरहिट तेलुगु फिल्म ‘सिम्हाद्री’ में उन्होंने मुख्य विलेन ‘बाला नायर’ की भूमिका निभाई। फिल्म में जूनियर एनटीआर (Jr NTR) के विपरीत उनका किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि इसके बाद उनके पास साउथ से विलेन के रोल्स की लाइन लग गई। इसके बाद उन्होंने ‘साइ’, ‘भद्र’, ‘छत्रपति’, ‘स्टालिन’, ‘जगमंडी’, और ‘अरासरगल’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया।

एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान प्रदीप रावत ने खुलकर स्वीकार किया था कि उन्हें बॉलीवुड की तुलना में साउथ सिनेमा में काम करना बहुत पसंद आया। उन्होंने बताया कि साउथ इंडस्ट्री में काम करने का माहौल बेहद पेशेवर, अनुशासित और समय का पाबंद होता है। इसके अलावा, वहां कलाकारों के काम की कद्र की जाती है और सम्मान के साथ-साथ पारिश्रमिक भी समय पर मिलता है।

निजी जिंदगी: पहली शादी का दर्दनाक अनुभव और कल्याणी संग लव स्टोरी

पर्दे पर हमेशा बेहद खौफनाक और सख्त दिखने वाले प्रदीप रावत वास्तविक जीवन में बेहद शांत, सीधे, पारिवारिक और रोमांटिक स्वभाव के इंसान हैं। उन्होंने हमेशा अपनी निजी जिंदगी को मीडिया के कैमरों से दूर रखा है, लेकिन कुछ मौकों पर उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन के उतार-चढ़ाव के बारे में खुलकर बात की है।

पांच महीने में टूटी पहली शादी: प्रदीप रावत की पहली शादी एक बेहद दुखद अनुभव साबित हुई थी। शादी के महज पांच महीने के भीतर ही उनका अपनी पहली पत्नी से तलाक हो गया। उन्होंने खुद बताया कि उनकी पहली पत्नी ने उन पर और उनके परिवार पर मानसिक प्रताड़ना व मारपीट के झूठे आरोप लगाकर पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी थी। हालांकि, जब जांच हुई और मामला कोर्ट पहुंचा, तो आरोप झूठे साबित हुए और केस बंद हो गया। इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से काफी चोट पहुंचाई थी।

कल्याणी संग रोमांटिक मुलाकात और दूसरी शादी: पहली शादी के कड़वे अनुभवों से उबरने के बाद उनकी जिंदगी में कल्याणी की एंट्री हुई। दोनों की पहली मुलाकात वर्ष 2006 में तेलुगु फिल्म ‘स्टालिन’ के सेट पर हुई थी। कल्याणी स्वभाव से काफी अनुशासित थीं और शुरुआत में प्रदीप रावत में कोई खास रुचि नहीं दिखा रही थीं। हालांकि, प्रदीप रावत को पहली नज़र में ही उनसे प्यार हो गया था।

एक दिन शूटिंग के दौरान कल्याणी की कार खराब हो गई। प्रदीप रावत के मैनेजर ने उनसे पूछा कि क्या वे प्रदीप जी की गाड़ी में लिफ्ट लेना चाहेंगी। कल्याणी ने थोड़ी हिचकिचाहट के साथ हां कह दी। उस सफर के दौरान दोनों के बीच बातें शुरू हुईं, जो बाद में दोस्ती और प्यार में बदल गईं। दोनों ने कुछ महीने एक-दूसरे को डेट किया और 2006 में शादी के बंधन में बंध गए। कल्याणी और प्रदीप रावत के दो बेटे हैं—विक्रम रावत और सिंह रावत। प्रदीप रावत अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी कल्याणी को देते हैं, जिन्होंने उनके परिवार को संभाला।

Pradeep Rawat: निष्कर्ष

अंबाला के एक साधारण परिवार से निकलकर भारतीय थिएटर्स, टीवी के ऐतिहासिक शो ‘महाभारत’, बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्मों और साउथ इंडस्ट्री तक का प्रदीप रावत का सफर संघर्ष और प्रतिभा का अद्भुत उदाहरण है। उनके निधन की खबरें पूरी तरह से एक कोरी अफ़वाह साबित हुई हैं। 74 वर्ष की उम्र में भी वे पूरी तरह तंदुरुस्त हैं। उनके चाहने वाले और फिल्म जगत यही दुआ कर रहा है कि वे आने वाले कई सालों तक स्वस्थ रहें और अपनी कला से दर्शकों का मनोरंजन करते रहें।

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