UP Politics: सीएम योगी का अखिलेश यादव पर बड़ा हमला, कहा- सपा ने हमेशा शिक्षामित्रों के भविष्य के साथ किया खिलवाड़

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। जानिए शिक्षामित्रों के मानदेय और अनुपूरक बजट पर क्या कहा।

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UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर शिक्षामित्रों के भविष्य और मानदेय को लेकर बड़ा सियासी घमासान देखने को मिला है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा और पूर्ववर्ती सरकार पर शिक्षामित्रों के साथ गंभीर खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद शिक्षा मित्रों के हितों का पूरा ध्यान रखा है और उनके मानदेय को तीन हजार रुपये से बढ़ाकर अट्ठारह हजार रुपये तक पहुंचाया है। इसके साथ ही उन्हें पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ भी प्रदान किया गया है। सदन के भीतर दिए गए इस बयान के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है, क्योंकि विपक्ष लगातार सरकार की नीतियों को लेकर हमलावर रुख अपनाए हुए था।

UP Politics: शिक्षामित्रों के मानदेय और कल्याणकारी कदमों का जिक्र

मुख्यमंत्री ने विधानसभा को संबोधित करते हुए पुरानी सरकारों के कार्यकाल की याद दिलाई और वर्तमान व्यवस्था की तुलना की। उन्होंने बताया कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब इन शिक्षकों और कर्मियों की सुध लेने वाला कोई नहीं था और उन्हें मात्र तीन हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाता था। वर्तमान सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इस राशि में भारी बढ़ोतरी की और इसे पहले दस हजार और फिर बढ़ाकर अट्ठारह हजार रुपये कर दिया। आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखते हुए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस सुविधा से जोड़ा गया है। इन ऐतिहासिक कदमों से राज्यभर के लाखों परिवारों को एक बड़ी राहत मिली है और उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है।

अनुदेशकों और शिक्षकों के लिए बड़े वित्तीय सुधार

शिक्षामित्रों के अलावा राज्यभर के अनुदेशकों और विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों के हितों का भी पूरा ख्याल रखा गया है। मुख्यमंत्री ने सदन में जानकारी दी कि अनुदेशकों का मानदेय जो पहले नौ हजार रुपये हुआ करता था, उसे बढ़ाकर सत्रह हजार रुपये कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधाओं के दायरे में लाया गया है। सरकार का यह प्रयास शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ शिक्षकों को आर्थिक और मानसिक रूप से सुरक्षित करना है ताकि वे पूरी निष्ठा के साथ नौनिहालों के भविष्य को संवारने के कार्य में अपना योगदान दे सकें।

महापुरुषों के स्मारकों और स्थलों के लिए भारी बजट

सरकार की विकास नीतियों का दायरा केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक विरासत को सहेजना भी इसका मुख्य उद्देश्य है। मुख्यमंत्री ने बताया कि समाज सुधारकों और महान विभूतियों जैसे बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, महर्षि वाल्मीकि, संत रविदास, ज्योतिबा फुले, शाहू जी महाराज और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर से जुड़े स्थलों के विकास के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। इन महापुरुषों की मूर्तियों के स्थलों पर छाजन, सुरक्षित पार्क और बाउंड्री वॉल के निर्माण के वास्ते चार सौ सात करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि आवंटित की गई थी। हालांकि, सदन में विपक्षी दलों के नकारात्मक और व्यवधानकारी रवैये के कारण इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर खुलकर चर्चा नहीं हो सकी।

UP Politics: अनुपूरक बजट और विपक्ष के रवैये पर तीखी प्रतिक्रिया

राज्य के समग्र विकास और जनहित की विभिन्न योजनाओं को गति देने के लिए सरकार द्वारा उनसठ हजार करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया गया था। इस बजट में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने, स्किल डेवलपमेंट, किसानों की बेहतरी और महिलाओं तथा गरीबों के कल्याण से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शामिल थीं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने सदन की कार्यवाही को बार-बार बाधित करके इन जनहितकारी मुद्दों पर चर्चा होने से रोकने का प्रयास किया। लोकतांत्रिक संस्थाओं के भीतर इस तरह का गतिरोध पैदा करना प्रदेश की जनता के हितों के साथ सीधा कुठाराघात है, जिसे किसी भी कीमत पर उचित नहीं ठहराया जा सकता है।

UP Politics: विभिन्न वर्गों के मानदेय और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार

सरकार केवल शिक्षकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े कामगारों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए भी लगातार प्रयासरत है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर, रसोइया, ग्राम चौकीदार और कोटेदारों के मानदेय तथा इंसेंटिव में बढ़ोतरी करने के लिए भी व्यापक प्रशासनिक तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को मिलने वाली पेंशन की राशि में भी इजाफा किया गया है। आउटसोर्सिंग के जरिए अपनी सेवाएं दे रहे कर्मियों को एक तय न्यूनतम मानदेय और सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करने के उद्देश्य से विशेष रूप से आउटसोर्सिंग कमीशन का गठन किया गया है, जो सरकार की जनहितैषी नीतियों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

विधानसभा के पटल पर मुख्यमंत्री द्वारा रखे गए इन तमाम तथ्यों और आंकड़ों से यह स्पष्ट हो जाता है कि राज्य सरकार हर वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। एक तरफ जहां विपक्ष सदन की कार्यवाही में अड़चनें डालकर विकास कार्यों को बाधित करने का आरोप झेल रहा है, वहीं सत्ता पक्ष अपनी कल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय सुधारों को जनता के सामने रख रहा है। शिक्षकों, कर्मचारियों और समाज के कमजोर वर्गों के लिए उठाए गए ये कदम आने वाले समय में राज्य के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को एक नई दिशा देने का काम करेंगे।

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