India First AI City: तमिलनाडु में बनेगी भारत की पहली AI सिटी ‘अरीवगम’, बजट में 5 करोड़ रुपये हुए आवंटित
India First AI City: तमिलनाडु सरकार ने अपने पहले बजट में देश की पहली AI सिटी 'अरीवगम' की घोषणा की है। चेन्नई के पास बनने वाली इस स्पेशल टाउनशिप की पूरी जानकारी पढ़ें।
India First AI City: दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य तमिलनाडु में तकनीकी विकास को नई दिशा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। तमिलनाडु सरकार ने अपने पहले बजट में देश की पहली AI सिटी ‘अरीवगम’ विकसित करने का बड़ा ऐलान किया है, जिसके लिए पांच करोड़ रुपये की शुरुआती राशि भी आवंटित की गई है। राजधानी चेन्नई के आसपास बसाई जाने वाली इस विशेष टाउनशिप का मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देना है। राज्य के मुख्यमंत्री ‘थलापति’ विजय की नई सरकार ने तकनीकी शिक्षा और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देते हुए यह साहसिक कदम उठाया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए न केवल तकनीकी स्टार्टअप्स को बल मिलेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी एक नया आयाम प्राप्त होगा।
India First AI City: ‘अरीवगम’ का शाब्दिक अर्थ और इसका रणनीतिक स्वरूप
तमिल भाषा में ‘अरीवगम’ शब्द का शाब्दिक अर्थ नॉलेज सिटी या ज्ञान का नगर होता है, जो इसके मूल उद्देश्य को पूरी तरह स्पष्ट करता है। इस डेडिकेटेड एआई सिटी को एक आधुनिक और स्पेशल टाउनशिप के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां अत्याधुनिक तकनीक से जुड़ी तमाम सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी। सरकार की योजना के मुताबिक, इस परिसर के भीतर एक विश्वस्तरीय एआई यूनिवर्सिटी, इंटरनेशनल स्किल डेवलपमेंट सेंटर और सेमीकंडक्टर टेस्ट लैब की स्थापना की जाएगी। इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी रिसर्च के लिए एक इंटिग्रेटेड हब के तौर पर तैयार किया जा रहा है, जिससे तकनीकी शोधकर्ताओं को वैश्विक स्तर का माहौल मिल सके।
युवाओं के कौशल विकास और एआई मिशन पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री विजय जोसेफ की अगुवाई वाली सरकार के इस पहले बजट का पूरा केंद्रबिंदु आधुनिक तकनीकों और रोजगारपरक शिक्षा पर टिका हुआ है। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री डॉ. एन. मैरी विल्सन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2031 तक लगभग पांच लाख छात्रों को एआई स्किल ट्रेनिंग देना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट्स के पाठ्यक्रम को उन्नत किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने तमिलनाडु एआई मिशन और एआई इकोनॉमी मिशन की भी आधिकारिक घोषणा की है, जिससे यह साफ होता है कि प्रशासन भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए युवाओं को अभी से तैयार करने में जुट गया है।
चेन्नई के पास स्थापना और वैश्विक स्तर की शिक्षण सुविधाएं
राज्य के आईटी और एआई मंत्री आर. कुमार ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी साझा की थी कि इस अनोखी टाउनशिप के लिए चेन्नई के आसपास के क्षेत्रों में उपयुक्त भूमि की तलाश की जा रही है। इस देश की पहली एआई सिटी में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च विश्वविद्यालय स्तर तक की उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराने की रूपरेखा तैयार की गई है, ताकि विकसित देशों के छात्रों के समकक्ष यहां के युवाओं को शिक्षा सहायता मिल सके। इस पहल से न केवल दक्षिण भारत में तकनीकी शिक्षा का स्तर उठेगा, बल्कि वैश्विक स्तर की कंपनियां भी राज्य में निवेश करने के लिए आकर्षित होंगी।
India First AI City: तमिल भाषा में लार्ज लैंग्वेज मॉडल विकसित करने की तैयारी
केवल आधारभूत संरचना और शिक्षा तक ही सीमित न रहते हुए, सरकार क्षेत्रीय भाषाओं के डिजिटल सशक्तिकरण पर भी विशेष जोर दे रही है। इसी कड़ी में तमिलनाडु सरकार तमिल कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए लार्ज लैंग्वेज मॉडल विकसित करने जा रही है। इस तकनीकी उद्देश्य को पूरा करने के लिए सिंगापुर की प्रतिष्ठित नेशनल यूनिवर्सिटी के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मुख्य मकसद तमिल भाषा के आधुनिक एआई टूल्स, स्थानीय डेटासेट्स और डिजिटल सेवाओं का व्यापक विकास करना है, जिससे क्षेत्रीय भाषा बोलने वाले लोग भी तकनीकी क्रांति का पूरा लाभ उठा सकें।
तकनीकी और आर्थिक मोर्चे पर तमिलनाडु सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम देश के डिजिटल भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। पारंपरिक राजनीति से अलग हटकर भविष्य की तकनीकों पर फोकस करना और बजट में इसके लिए ठोस प्रावधान करना यह दर्शाता है कि राज्य प्रशासन आधुनिक विकास को लेकर पूरी तरह गंभीर है। चेन्नई के पास आकार लेने वाली यह अनोखी टाउनशिप आने वाले समय में देश-विदेश के तकनीकी विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का प्रमुख केंद्र बनेगी। यदि ये योजनाएं अपने तय समय और उद्देश्यों के अनुसार धरातल पर उतरती हैं, तो यह राज्य भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर एक नई और मजबूत पहचान दिलाने में पूरी तरह सफल होगी।
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