पश्चिम बंगाल में 31 करोड़ की फेंसिडिल पर बुलडोजर, CM Suvendu Adhikari बोले- नशा महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ा रहा है

पश्चिम बंगाल में 31 करोड़ की फेंसिडिल पर बुलडोजर, CM Suvendu Adhikari बोले- नशा महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ा रहा है

0

CM Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में बुधवार को न्यू टाउन स्थित इको पार्क में 31 करोड़ रुपये मूल्य की 3.10 लाख प्रतिबंधित कफ सिरप फेंसिडिल की बोतलें नष्ट कर दी गईं। बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के इस कार्यक्रम में बुलडोजर चलाकर जब्त स्टॉक खत्म किया गया। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य को नशामुक्त बनाना है। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे जघन्य अपराधों का संबंध नशे की लत से जोड़ा और बारुईपुर कांड समेत पहले की घटनाओं का हवाला दिया। सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य सरकार ड्रग सिंडिकेट और अवैध कफ सिरप की तस्करी पर कार्रवाई तेज कर रही है। बीएसएफ, राज्य पुलिस, एसटीएफ, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और कोलकाता पुलिस अब एक साथ काम कर रही हैं। सितंबर की शुरुआत में बालूरघाट में करीब दो लाख बोतलें पहले ही नष्ट की जा चुकी हैं। यह कार्यक्रम केंद्र और राज्य के साझा मिशन नशामुक्त भारत-2029 का हिस्सा बताया गया।

इको पार्क में हुई बड़ी नष्टीकरण कार्रवाई

कोलकाता के न्यू टाउन स्थित इको पार्क में बुधवार को विशेष आयोजन हुआ। बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय ने जब्त फेंसिडिल की 3.10 लाख बोतलें एक जगह इकट्ठा कीं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद रहे और बुलडोजर से इन्हें नष्ट करवाया।

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल रहे। पत्रकारों के सामने यह कार्रवाई सार्वजनिक रूप से दिखाई गई। सरकार का उद्देश्य साफ था कि जब्त माल गोदामों में न पड़ा रहे, बल्कि नष्ट हो।

फेंसिडिल जैसी कफ सिरप की अवैध आपूर्ति लंबे समय से पूर्वी भारत में चर्चा का विषय रही है। इस स्टॉक का मूल्य 31 करोड़ रुपये बताया गया। एक साथ इतनी बड़ी मात्रा नष्ट करना राज्य में चल रहे अभियान का सबसे बड़ा सार्वजनिक कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री का नशामुक्त बंगाल संदेश

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि नशामुक्त भारत अभियान जितना देश के लिए जरूरी है, उतना ही पश्चिम बंगाल के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपनी सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट कर दी कि राज्य को पूरी तरह नशामुक्त बनाना सबसे ऊपर है।

उन्होंने नशे को केवल व्यक्तिगत आदत नहीं बताया। उनके अनुसार यह लत परिवारों को तबाह करती है और पूरे सामाजिक व प्रशासनिक तंत्र को प्रभावित करती है। अपराध बढ़ने के पीछे नियमित नशा करने वालों की भूमिका जांच में सामने आई है, ऐसा उन्होंने कहा।

मुख्यमंत्री ने सरकार के पांच महीने के कामकाज का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक भाजपा सरकार बनते ही ड्रग सिंडिकेट और अवैध कफ सिरप की तस्करी पर नकेल कसना शुरू हो गया था। इको पार्क की कार्रवाई उसी क्रम की अगली कड़ी है।

महिलाओं के खिलाफ अपराध और नशे का संबंध

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर अलग से बात की। उन्होंने कहा कि नियमित नशा करने वाले लोग ही गंभीर कृत्यों, खासकर महिलाओं के खिलाफ हिंसा के पीछे पाए गए हैं।

बारुईपुर की घटना का उन्होंने नाम लिया। उनके अनुसार राज्य में पहले हुए बर्बर अपराधों की जांच में भी यही सूत्र निकला। नशा अपराध को जन्म देता है, यह बात उन्होंने साफ शब्दों में कही।

यह बयान प्रशासनिक कार्रवाई को सामाजिक संदर्भ देता है। सरकार नशे को केवल तस्करी का मामला नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा से जोड़कर देख रही है। इको पार्क में कही गई ये बातें अब राज्य की अपराध नीति की चर्चा का हिस्सा बनेंगी।

बालूरघाट के बाद दूसरी बड़ी कार्रवाई

सितंबर की शुरुआत में दक्षिण दिनाजपुर के बालूरघाट में भी इसी तरह की कार्रवाई हुई थी। वहां करीब दो लाख फेंसिडिल बोतलें नष्ट की गई थीं। उस समय भी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने निगरानी की थी।

इको पार्क का आयोजन उससे बड़ा रहा। मात्रा और मूल्य दोनों अधिक थे। दो कार्यक्रमों से संकेत मिलता है कि जब्ती के बाद नष्टीकरण को नियमित प्रक्रिया बनाने की कोशिश हो रही है।

एक जिले से शुरू हुई कार्रवाई अब राजधानी क्षेत्र तक पहुंच गई है। इससे अभियान का दायरा राज्यव्यापी दिखने लगा है। पुलिस इकाइयां अलग-अलग जगहों से स्टॉक इकट्ठा कर एक मंच पर नष्ट कर रही हैं।

कई एजेंसियों का साझा अभियान

बंगाल को नशामुक्त करने के दावे के साथ कई एजेंसियां एक मंच पर आई हैं। बीएसएफ सीमा से जुड़ी तस्करी पर नजर रखती है। राज्य पुलिस और एसटीएफ आंतरिक नेटवर्क पर कार्रवाई करते हैं। एनसीबी केंद्रीय जांच का हिस्सा है। कोलकाता पुलिस महानगर के भीतर सक्रिय है।

मुख्यमंत्री ने इन एजेंसियों के समन्वय को अभियान की ताकत बताया। पहले ये इकाइयां अपने-अपने क्षेत्र में काम करती थीं। अब साझा लक्ष्य के तहत बैठकें और संयुक्त कार्रवाई बढ़ी हैं, ऐसा कार्यक्रम में कहा गया।

नशामुक्त भारत-2029 मिशन के तहत यह मेगा डिस्ट्रक्शन आयोजित हुआ। केंद्र और राज्य दोनों इस लक्ष्य से जुड़े हुए हैं। 2029 तक नशा घटाने का व्यापक लक्ष्य इसी अभियान से जुड़ा है।

अवैध कफ सिरप का राज्य में पुराना संकट

पश्चिम बंगाल में प्रतिबंधित कफ सिरप की तस्करी लंबे समय से चुनौती रही है। सीमावर्ती इलाकों और शहरी बाजारों में इसकी मांग और आपूर्ति दोनों रही हैं। पुलिस समय-समय पर छापे मारती रही है, लेकिन बड़े स्टॉक बार-बार सामने आते रहे।

नई सरकार ने इसे अपनी प्राथमिकता सूची में ऊपर रखा है। पांच महीने में बालूरघाट और इको पार्क जैसी सार्वजनिक कार्रवाइयां उसी नीति का हिस्सा हैं। सरकार का कहना है कि सिंडिकेट पर दबाव बढ़ाना है।

नष्टीकरण का दृश्य आम लोगों तक संदेश पहुंचाने के लिए भी किया जाता है। बुलडोजर चलने से कार्रवाई दिखती है। प्रशासन का दावा है कि इससे तस्करों में भय भी बढ़ेगा और युवाओं तक चेतावनी जाएगी।

सामाजिक असर और परिवारों पर पड़ने वाला बोझ

मुख्यमंत्री ने नशे को परिवार तोड़ने वाला बताया। लत लगने के बाद नौकरी, पढ़ाई और घरेलू शांति प्रभावित होती है। कई मामलों में हिंसा घर के अंदर भी शुरू हो जाती है। महिलाओं के खिलाफ अपराध का जिक्र इसी सामाजिक असर से जुड़ा है।

राज्य में महिला समूह भी नशे के खिलाफ सड़क पर उतरे हैं। नदिया में दुकानों के खिलाफ प्रदर्शन की खबरें पहले आ चुकी हैं। प्रशासनिक कार्रवाई और सामाजिक दबाव अब एक साथ दिख रहे हैं।

नशा मुक्ति केवल पुलिसिया विषय नहीं रह गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सुरक्षा के विभाग भी इससे जुड़ते हैं। सरकार अगर पुनर्वास और जागरूकता को कार्रवाई के साथ जोड़ती है तो असर लंबा माना जाता है। फिलहाल सामने आई खबर मुख्य रूप से जब्ती और नष्टीकरण तक सीमित है।

कानून व्यवस्था की नई प्राथमिकता

सत्ता परिवर्तन के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने अपराधमुक्त राज्य का लक्ष्य रखा है। नशा उस लक्ष्य का बड़ा हिस्सा बन गया है। मुख्यमंत्री बार-बार कह रहे हैं कि गंभीर अपराधों की जड़ में नशा है।

इस तर्क से पुलिस की रणनीति भी बदलती है। केवल घटना के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि आपूर्ति तंत्र तोड़ना जरूरी माना जा रहा है। फेंसिडिल जैसे पदार्थ उसी आपूर्ति तंत्र का हिस्सा बताए जाते हैं।

विधानसभा में पूर्ण शराबबंदी की मांग भी उठी है। सौमेन करफा ने बिहार का उदाहरण दिया था। सरकार ने फिलहाल नशामुक्ति को व्यापक अभियान के रूप में आगे बढ़ाया है। शराब और ड्रग्स दोनों पर कितनी समान नीति बनेगी, यह आगे की घोषणाओं पर निर्भर करेगा।

CM Suvendu Adhikari: आगे की राह और प्रशासनिक चुनौती

एक दिन में 31 करोड़ का माल नष्ट करना प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों है। प्रतीकात्मक इसलिए कि सरकार अपनी प्राथमिकता दिखा रही है। व्यावहारिक इसलिए कि जब्त पदार्थ दोबारा बाजार में न आए।

चुनौती यह रहेगी कि नई खेप फिर न पहुंचे। सीमा पार रूट, नकली बिल और स्थानीय वितरक लंबे समय से सक्रिय बताए जाते हैं। एजेंसियों का समन्वय कायम रहा तो जब्ती जारी रह सकती है।

नशामुक्त भारत-2029 का लक्ष्य अभी दूर है। पश्चिम बंगाल में इको पार्क और बालूरघाट की कार्रवाई उस लक्ष्य की शुरुआती तस्वीरें हैं। महिलाओं की सुरक्षा से जोड़कर दिए गए बयान अभियान को केवल ड्रग्स विरोधी नहीं, अपराध विरोधी भी बनाते हैं।

कोलकाता के इको पार्क में बुधवार को जो बुलडोजर चला, उसने 3.10 लाख फेंसिडिल बोतलें खत्म कर दीं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे नशामुक्त बंगाल की दिशा में बड़ा कदम बताया और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जड़ नशे में बताई। बालूरघाट के बाद यह दूसरी बड़ी सार्वजनिक कार्रवाई है। कई एजेंसियां अब एक साथ काम कर रही हैं और कार्यक्रम को नशामुक्त भारत-2029 से जोड़ा गया है। राज्य सरकार के पांच महीने के कार्यकाल में ड्रग सिंडिकेट पर दबाव बढ़ाने का दावा किया गया है। आगे असल परीक्षा जब्ती के बाद के परिणामों में होगी कि बाजार में अवैध कफ सिरप कितना घटता है और गंभीर अपराधों पर कितना असर पड़ता है।

Read More Here:- 

Asian Games 2026: बैडमिंटन में ब्रॉन्ज, वुशु में सिल्वर पक्का, चौथे दिन भारत का शानदार प्रदर्शन

Maruti Celerio Price Hike: Celerio के चुनिंदा पेट्रोल वेरिएंट महंगे, ₹2,500 तक बढ़े दाम

CEER Exobot Electric Car: 850HP पावर और 670KM रेंज, 2.1 सेकंड में 100 की रफ्तार

LPG e-KYC: LPG सिलिंडर e-KYC के नाम पर मांगे जा रहे पैसे? जानें सही नियम और कहां करें शिकायत

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.